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Auraiya News: गैलरी के कब्जे को लेकर की गई अपील को कोर्ट ने किया खारिज
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औरैया। जिला न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने सुनवाई करते हुए वादी राकेश द्विवेदी की अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के आठ मई 2024 के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सहार थाना क्षेत्र के गांव पुरवा दानशाह निवासी वादी के पक्ष में अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया था।
राकेश द्विवेदी ने अपर सिविल जज के न्यायालय में मूल वाद दायर किया था। उनका आरोप था कि सुशील कुमार, हिमांशु और बृजबिहारी द्विवेदी अवैध विक्रय पत्र के आधार पर उनकी निजी गैलरी में हस्तक्षेप कर रहे हैं। वादी ने दखल रोकने के लिए अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी। प्रतिवादीगण ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि विवादित गैलरी वादी की अकेली संपत्ति नहीं है। उन्होंने इसे संयुक्त गैलरी बताया। प्रतिवादीगण का तर्क था कि वादी झूठा मुकदमा दायर कर गैलरी पर कब्जा करना चाहता है।
जनपद न्यायाधीश मयंक चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उन्होंने पाया कि वादी यह साबित करने में विफल रहा कि गैलरी केवल उसकी निजी संपत्ति है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा 8 मई 2024 को दिया गया आदेश विधि सम्मत माना। इसके बाद, न्यायाधीश ने सिविल अपील खारिज कर निचली अदालत के आदेश को पुष्ट कर दिया।
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राकेश द्विवेदी ने अपर सिविल जज के न्यायालय में मूल वाद दायर किया था। उनका आरोप था कि सुशील कुमार, हिमांशु और बृजबिहारी द्विवेदी अवैध विक्रय पत्र के आधार पर उनकी निजी गैलरी में हस्तक्षेप कर रहे हैं। वादी ने दखल रोकने के लिए अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी। प्रतिवादीगण ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि विवादित गैलरी वादी की अकेली संपत्ति नहीं है। उन्होंने इसे संयुक्त गैलरी बताया। प्रतिवादीगण का तर्क था कि वादी झूठा मुकदमा दायर कर गैलरी पर कब्जा करना चाहता है।
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जनपद न्यायाधीश मयंक चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उन्होंने पाया कि वादी यह साबित करने में विफल रहा कि गैलरी केवल उसकी निजी संपत्ति है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा 8 मई 2024 को दिया गया आदेश विधि सम्मत माना। इसके बाद, न्यायाधीश ने सिविल अपील खारिज कर निचली अदालत के आदेश को पुष्ट कर दिया।
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