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Hindi News ›   Automobiles News ›   E-Scooter Delivers Only 16 km Range vs Promised 85 km: Kerala Consumer Commission Awards Rs 1.7 Lakh

85 किमी का दावा लेकिन मिली सिर्फ 16 किमी की रेंज: उपभोक्ता आयोग ने ईवी निर्माता पर लगाया ₹1.7 लाख का जुर्माना

Sat, 03 Oct 2026 10:58 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Sat, 03 Oct 2026 10:58 PM IST
सार

केरल के एक उपभोक्ता आयोग ने खराब रेंज की शिकायत के मामले में इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता को मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट और सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया है। जानें क्या है पूरा मामला।

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E-Scooter Delivers Only 16 km Range vs Promised 85 km: Kerala Consumer Commission Awards Rs 1.7 Lakh
Consumer commission on Electric Scooter Range - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केरल के पलक्कड़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता कंपनी को मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (उत्पादन में खराबी) का दोषी पाया है।
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वर्ष 2022 में शिकायतकर्ता ने अधिकृत डीलर से 88,000 रुपये में एक इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा था। डीलर और कंपनी ने दावा किया था कि यह स्कूटर 6 घंटे की फुल चार्जिंग पर 85 किमी की रेंज देगा और इस पर 3 साल की वारंटी भी थी। हालांकि, शुरुआत से ही स्कूटर केवल 40 किमी की रेंज दे रहा था, जो समय के साथ और घटती चली गई। बार-बार सर्विसिंग और बैटरी बदलने के बावजूद आखिरकार इसकी रेंज घटकर मात्र 18 से 20 किमी रह गई।
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रेंज में गिरावट के अलावा, राइडर को चार्जर में खराबी और फ्रंट-व्हील बियरिंग ढीला होने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। डीलर द्वारा जरूरी स्पेयर पार्ट्स और सही रिपेयरिंग न मिलने पर ग्राहक ने दिसंबर 2024 में कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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उपभोक्ता अदालत ने अपने आदेश में क्या फैसला सुनाया और कितना जुर्माना लगाया?

30 सितंबर को दिए गए अपने आदेश में कंज्यूमर कमीशन के अध्यक्ष विनय मेनन वी, सदस्य विद्या ए और कृष्णनकुट्टी एन के की पीठ ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि बार-बार बैटरी बदलने के बावजूद वाहन की समस्या दूर नहीं हुई और कंपनी अपनी सेवाओं में विफल रही।
अदालत ने कुल मिलाकर लगभग 1.68 लाख रुपये (लगभग 1.7 लाख रुपये) के भुगतान का आदेश दिया, जिसमें शामिल हैं:
  • ₹88,000: स्कूटर की पूरी कीमत का रिफंड।
  • ₹55,000: मानसिक उत्पीड़न और असुविधा के लिए मुआवजा।
  • ₹25,000: कानूनी प्रक्रिया में हुआ खर्च।

 

जांच रिपोर्ट में कौन सी मैन्युफैक्चरिंग खराबियां सामने आईं?

अदालत द्वारा नियुक्त दो विशेषज्ञों की संयुक्त जांच रिपोर्ट में इस इलेक्ट्रिक स्कूटर के भीतर कई गंभीर और अंदरूनी खराबियों की पुष्टि हुई:
  • वास्तविक रेंज: फुल चार्ज होने पर स्कूटर मात्र 16 किमी की दूरी ही तय कर पा रहा था।
  • बैटरी और वोल्टेज: बैटरी में वोल्टेज की कमी और चार्ज रिटेंशन (चार्ज रोके रखने की क्षमता) बेहद खराब पाई गई।
  • मैकेनिकल खराबी: ओवल शेप शाफ्ट होल के कारण मिसअलाइनमेंट की समस्या थी और फ्रंट-व्हील शाफ्ट बियरिंग सिस्टम में भी खराबी थी।

 

कंपनी और डीलर ने क्या बचाव किया और कोर्ट ने उसे क्यों खारिज कर दिया?

निर्माता कंपनी और डीलर ने अपनी दलील में कहा कि कम माइलेज के पीछे राइडर का वजन, सड़क की स्थिति, टायर प्रेशर, राइडिंग स्टाइल, तापमान और तेज गति से गाड़ी चलाना जैसे कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि शिकायत समय सीमा से बाहर दर्ज की गई थी।
हालांकि, आयोग ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत समय सीमा के भीतर ही दर्ज की गई थी। क्योंकि कारण तब पैदा हुआ जब यह स्पष्ट हो गया कि समस्या ठीक नहीं हो सकती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही कंपनी ने कई कारण गिनाए, लेकिन वे यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या दस्तावेज पेश नहीं कर सके कि ये कारण वास्तव में खराबी के लिए जिम्मेदार थे।
कंपनी और डीलर लगातार नौ सुनवाइयों में अनुपस्थित रहे। जिसके कारण आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा फैसला सुनाया।

 

इस अदालती फैसले से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदारों को क्या सबक मिलता है?

यह ऐतिहासिक फैसला स्पष्ट करता है कि वाहन निर्माता कंपनियां बिना किसी ठोस सबूत के ग्राहकों को खराब परफॉरमेंस के लिए "सामान्य राइडिंग कंडीशंस" का बहाना बनाकर गुमराह नहीं कर सकती हैं। यदि एक्सपर्ट रिपोर्ट में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित होता है और बार-बार रिपेयरिंग के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता, तो कंज्यूमर कमीशन रिफंड और मुआवजा दिला सकता है।

यदि आप भी इस तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो अपने राज्य के कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर या राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1915 पर संपर्क कर सकते हैं।
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