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तीसरी लहर का बढ़ा खतरा, गेल में सीआईएसएफ जवान संक्रमित
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औरैया। कोरोना के बदले स्वरूप ओमिक्रॉन और तीसरी लहर का जिले में खतरा बढ़ने लगा है। शुक्रवार देर रात आई रिपोर्ट में गेल का सीआईएसएफ जवान संक्रमित पाया गया है। जिले में दूसरी लहर की शुरुआत भी गेल से हुई थी। यहां मरीज मिलने के बाद एकाएक संख्या बढ़ी थी। इस बार भी गेल से ही संक्रमित मिलने की शुरुआत हुई है और अभी तक चार लोग संक्रमित मिल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की परेशानी और बढ़ी है।
कोरोना गाइड लाइन का जिले में कतई पालन होता नजर नहीं आ रहा है। हालात यह हैं कि बाजारों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लोग आज भी बेखौफ हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग भी बाहर से आने जाने वालों पर निगरानी नहीं रख पा रहा है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि एक सप्ताह के अंदर चार कोरोना संक्रमित मरीज मिले। संक्रमित लोग उन स्थानों से लौटे हैं, जहां ओमिक्रॉन के मरीज पाए जा रहे हैं।
इसी को लेकर उनका जीनोम सैंपल भी कराया गया है। अपर सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि गेल में रहने वाला एक सीआईएसएफ जवान शुक्रवार को कराई गई जांच में संक्रमित मिला है। वह कुछ दिन पहले गया बिहार ड्यूटी पर गया था।
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वहां से लौट कर आने पर उसकी एंटीजन जांच कराई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव मिला है। अब गेल गांव में चार एक्टिव केस हो गए हैं। उन्होंने बताया कि गेल के लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है। दूसरी लहर की शुरुआत में भी यहीं से मरीज मिलने की शुरुआत हुई थी।
कागजों पर निगरानी समिति और हेल्प डेस्क
प्रदेश सरकार के तमाम निर्देशों के बाद भी आज तक स्वास्थ्य विभाग निगरानी समितियों और हेल्प डेस्क को सक्रिय नहीं कर सका। जबकि नाइट कर्फ्यू लगने के बाद जारी की गई गाइड लाइन में साफ तौर पर कहा गया था कि सार्वजनिक स्थानों के साथ रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी दफ्तरों के पास कोरोना हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही बाहर से आने जाने वाले लोगों पर निगरानी रखने के लिए गांव में बनाई गई निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाएगा।
कुछ थर्मल स्कैनर खराब तो कुछ में सेल नहीं
गांव स्तर पर निगरानी समिति का जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकत्री, एएनएम, आशा को दिया गया था। कुछ कर्मियों ने दबी जुबान में बताया कि पिछले आठ माह से थर्मल स्कैनर काम नहीं कर रहे हैं। कुछ में तकनीकी खामियां आ गई हैं तो कुछ के सेल ही डाउन हो गए हैं। इसकी जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है।
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कोरोना गाइड लाइन का जिले में कतई पालन होता नजर नहीं आ रहा है। हालात यह हैं कि बाजारों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लोग आज भी बेखौफ हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग भी बाहर से आने जाने वालों पर निगरानी नहीं रख पा रहा है। इसी लापरवाही का नतीजा है कि एक सप्ताह के अंदर चार कोरोना संक्रमित मरीज मिले। संक्रमित लोग उन स्थानों से लौटे हैं, जहां ओमिक्रॉन के मरीज पाए जा रहे हैं।
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इसी को लेकर उनका जीनोम सैंपल भी कराया गया है। अपर सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि गेल में रहने वाला एक सीआईएसएफ जवान शुक्रवार को कराई गई जांच में संक्रमित मिला है। वह कुछ दिन पहले गया बिहार ड्यूटी पर गया था।
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वहां से लौट कर आने पर उसकी एंटीजन जांच कराई गई तो रिपोर्ट पॉजिटिव मिला है। अब गेल गांव में चार एक्टिव केस हो गए हैं। उन्होंने बताया कि गेल के लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है। दूसरी लहर की शुरुआत में भी यहीं से मरीज मिलने की शुरुआत हुई थी।
कागजों पर निगरानी समिति और हेल्प डेस्क
प्रदेश सरकार के तमाम निर्देशों के बाद भी आज तक स्वास्थ्य विभाग निगरानी समितियों और हेल्प डेस्क को सक्रिय नहीं कर सका। जबकि नाइट कर्फ्यू लगने के बाद जारी की गई गाइड लाइन में साफ तौर पर कहा गया था कि सार्वजनिक स्थानों के साथ रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सरकारी दफ्तरों के पास कोरोना हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही बाहर से आने जाने वाले लोगों पर निगरानी रखने के लिए गांव में बनाई गई निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाएगा।
कुछ थर्मल स्कैनर खराब तो कुछ में सेल नहीं
गांव स्तर पर निगरानी समिति का जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकत्री, एएनएम, आशा को दिया गया था। कुछ कर्मियों ने दबी जुबान में बताया कि पिछले आठ माह से थर्मल स्कैनर काम नहीं कर रहे हैं। कुछ में तकनीकी खामियां आ गई हैं तो कुछ के सेल ही डाउन हो गए हैं। इसकी जानकारी भी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को दी जा चुकी है।