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Auraiya News: परिषदीय स्कूलों में जर्जर और टपकती छत के नीचे पढ़ाई
Mon, 13 Jul 2026 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 13 Jul 2026 11:41 PM IST
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फोटो-10- टपकती छत पर लगाई गई पन्नी और नीचे चलती कक्षा। संवाद
औरैया। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भले ही खूब प्रयास किए गए हों लेकिन स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।
जिलेभर में कई ऐसे परिषदीय स्कूल हैं जहां भवन जर्जर हैं। छतों का प्लास्टर उखड़ चुका है। सरिया नजर आ रही हैं। टपकती छत के नीचे पढ़ाई चल रही है।
कई स्कूलों की हालत तो इतनी खराब है कि मजबूरन शिक्षक कमरे से कक्षाएं बरामदे में शिफ्ट कर रहे हैं। वहीं कुछ जगह छत पर पन्नी लगाकर कक्षाएं चलाई जा रही हैं। प्रधानाध्यापक इस समस्या को लेकर लगातार उच्चाधिकारियों को पत्राचार भी कर रहे हैं लेकिन जर्जर भवनों की समस्या का हल निकल नहीं पा रहा है।
खास बात तो यह है कि कागजों में यह समस्या अधिकारियों की टेबल पर इधर से उधर दौड़ रही है लेकिन स्थायी समाधान पर कुछ खास कदम नहीं उठाया जा सका है। बारिश के इस सीजन में स्कूलों में चल रहे पठन-पाठन में आ रही दिक्कतों को लेकर सोमवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की। इस पड़ताल में शिक्षक से लेकर अभिभावक तक स्कूलों की टपकती छतों की समस्या पर चिंतित नजर आए। भवनों में दौड़ती चटकन भी उन्हें डरा रही है।
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बरामदे और पेड़ के नीचे चल रही पाठशाला
अजीतमल क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय टड़वा रंगिया कंपोजिट स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर मिली। भवन के कक्षों में छत के सरिया साफ-साफ दिखाई देते मिले। शिक्षकों ने बताया कि बरसात में छत टपकती रहती है। ऐसे में कमरों में पठन-पाठन के बजाय बरामदे और खुले में पेड़ के नीचे पढ़ाई कराई जा रही है। प्रधानाध्यापक मधुबाला दुबे ने बताया कि बिल्डिंग की नीलामी के लिए आदेश आ चुका है लेकिन दूसरी बिल्डिंग न होने के चलते बरामदे और खुले में क्लास लगानी पड़ रही है।
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कंडम भवन में पढ़ रहे बच्चे, आफत में 40 बच्चों की जान
ब्लॉक बिधूना के प्राथमिक विद्यालय सिरयावा में एक साल पहले खंडहर घोषित होने के बाद भी जर्जर कमरे में कक्षाएं चल रही हैं। यहां पर भवन कंडम घोषित होने के बाद नए भवन का निर्माण ही नहीं कराया गया है। ऐसे में टपकती छत की समस्या को लेकर शिक्षकों ने छत पर पन्नी लगा ली है।
पन्नी भी छत टपकने की वजह से फट चुकी है। शिक्षकों ने बताया कि एक लाख 26 हजार की नीलामी रकम तय हुई थी। किसी ने बोली नहीं लगाई। इसके बाद न तो नया भवन बना और न पुराने को गिराया गया। बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई जारी है। स्कूल में 40 बच्चे पंजीकृत हैं।
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दीवार और छत में दरार, दो कमरे कर दिए बंद
अजीतमल में बीहड़ी क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय हनुमान गढ़ी की बिल्डिंग भी जर्जर हो गई है। इसके दो कमरे के लिंटर से लेकर दीवारों तक में दरार आ गई हैं। जर्जर हो चुके दो कमरे बंद कर दिए गए हैं। एक अन्य कमरे में कक्षा चलाई जा रही है। स्कूल के प्रधानाध्यापक दीपक दुबे ने बताया कि स्कूल में छात्र संख्या 65 है। उन्हें किसी तरह पढ़ाया जा रहा है। दो कमरे बंद कर दिए गए है। इससे कोई खतरा न रहे।
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कंडम भवन नहीं हो सका जमींदोज
एरवाकटरा ब्लॉक के कुकरकाट कंपोजिट विद्यालय है। इसमें कुल 103 छात्र पंजीकृत हैं। परिसर में वर्ष 1988 में निर्मित प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। कई वर्षों से निष्प्रयोज्य पड़ा है। स्कूल के प्रधानाध्यापक प्रभुदयाल ने बताया कि अप्रैल 2026 में इस जर्जर भवन के मलबे की नीलामी की सूचना उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। बच्चों को जर्जर भवन से दूर रहने के लिए बोला जाता है।
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किसी भी स्कूल में जर्जर भवनों में कक्षाएं न चलें। इसके लिए प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी किए गए हैं। जरूरी मरम्मत कार्य के लिए भी कहा गया है। कंडम भवनों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। नए भवनों के लिए प्रयास चल रहा है।-संजीव कुमार, बीएसए
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जिलेभर में कई ऐसे परिषदीय स्कूल हैं जहां भवन जर्जर हैं। छतों का प्लास्टर उखड़ चुका है। सरिया नजर आ रही हैं। टपकती छत के नीचे पढ़ाई चल रही है।
कई स्कूलों की हालत तो इतनी खराब है कि मजबूरन शिक्षक कमरे से कक्षाएं बरामदे में शिफ्ट कर रहे हैं। वहीं कुछ जगह छत पर पन्नी लगाकर कक्षाएं चलाई जा रही हैं। प्रधानाध्यापक इस समस्या को लेकर लगातार उच्चाधिकारियों को पत्राचार भी कर रहे हैं लेकिन जर्जर भवनों की समस्या का हल निकल नहीं पा रहा है।
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खास बात तो यह है कि कागजों में यह समस्या अधिकारियों की टेबल पर इधर से उधर दौड़ रही है लेकिन स्थायी समाधान पर कुछ खास कदम नहीं उठाया जा सका है। बारिश के इस सीजन में स्कूलों में चल रहे पठन-पाठन में आ रही दिक्कतों को लेकर सोमवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की। इस पड़ताल में शिक्षक से लेकर अभिभावक तक स्कूलों की टपकती छतों की समस्या पर चिंतित नजर आए। भवनों में दौड़ती चटकन भी उन्हें डरा रही है।
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बरामदे और पेड़ के नीचे चल रही पाठशाला
अजीतमल क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय टड़वा रंगिया कंपोजिट स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर मिली। भवन के कक्षों में छत के सरिया साफ-साफ दिखाई देते मिले। शिक्षकों ने बताया कि बरसात में छत टपकती रहती है। ऐसे में कमरों में पठन-पाठन के बजाय बरामदे और खुले में पेड़ के नीचे पढ़ाई कराई जा रही है। प्रधानाध्यापक मधुबाला दुबे ने बताया कि बिल्डिंग की नीलामी के लिए आदेश आ चुका है लेकिन दूसरी बिल्डिंग न होने के चलते बरामदे और खुले में क्लास लगानी पड़ रही है।
कंडम भवन में पढ़ रहे बच्चे, आफत में 40 बच्चों की जान
ब्लॉक बिधूना के प्राथमिक विद्यालय सिरयावा में एक साल पहले खंडहर घोषित होने के बाद भी जर्जर कमरे में कक्षाएं चल रही हैं। यहां पर भवन कंडम घोषित होने के बाद नए भवन का निर्माण ही नहीं कराया गया है। ऐसे में टपकती छत की समस्या को लेकर शिक्षकों ने छत पर पन्नी लगा ली है।
पन्नी भी छत टपकने की वजह से फट चुकी है। शिक्षकों ने बताया कि एक लाख 26 हजार की नीलामी रकम तय हुई थी। किसी ने बोली नहीं लगाई। इसके बाद न तो नया भवन बना और न पुराने को गिराया गया। बच्चों की जान जोखिम में डालकर पढ़ाई जारी है। स्कूल में 40 बच्चे पंजीकृत हैं।
दीवार और छत में दरार, दो कमरे कर दिए बंद
अजीतमल में बीहड़ी क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय हनुमान गढ़ी की बिल्डिंग भी जर्जर हो गई है। इसके दो कमरे के लिंटर से लेकर दीवारों तक में दरार आ गई हैं। जर्जर हो चुके दो कमरे बंद कर दिए गए हैं। एक अन्य कमरे में कक्षा चलाई जा रही है। स्कूल के प्रधानाध्यापक दीपक दुबे ने बताया कि स्कूल में छात्र संख्या 65 है। उन्हें किसी तरह पढ़ाया जा रहा है। दो कमरे बंद कर दिए गए है। इससे कोई खतरा न रहे।
कंडम भवन नहीं हो सका जमींदोज
एरवाकटरा ब्लॉक के कुकरकाट कंपोजिट विद्यालय है। इसमें कुल 103 छात्र पंजीकृत हैं। परिसर में वर्ष 1988 में निर्मित प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। कई वर्षों से निष्प्रयोज्य पड़ा है। स्कूल के प्रधानाध्यापक प्रभुदयाल ने बताया कि अप्रैल 2026 में इस जर्जर भवन के मलबे की नीलामी की सूचना उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है। बच्चों को जर्जर भवन से दूर रहने के लिए बोला जाता है।
किसी भी स्कूल में जर्जर भवनों में कक्षाएं न चलें। इसके लिए प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी किए गए हैं। जरूरी मरम्मत कार्य के लिए भी कहा गया है। कंडम भवनों की नीलामी की प्रक्रिया चल रही है। नए भवनों के लिए प्रयास चल रहा है।-संजीव कुमार, बीएसए

फोटो-10- टपकती छत पर लगाई गई पन्नी और नीचे चलती कक्षा। संवाद

फोटो-10- टपकती छत पर लगाई गई पन्नी और नीचे चलती कक्षा। संवाद

फोटो-10- टपकती छत पर लगाई गई पन्नी और नीचे चलती कक्षा। संवाद

फोटो-10- टपकती छत पर लगाई गई पन्नी और नीचे चलती कक्षा। संवाद

फोटो-10- टपकती छत पर लगाई गई पन्नी और नीचे चलती कक्षा। संवाद