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Auraiya News: दौड़कर जांचें, कहीं ऑक्सीजन का प्रेशर कम तो नहीं
Wed, 12 Apr 2023 12:45 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 12 Apr 2023 12:45 AM IST
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औरैया। मरीज की हालत गंभीर है, दौड़कर जांच करें कि कहीं ऑक्सीजन का प्रेशर कम तो नहीं। इतना सुनते ही संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य के आसपास खड़े कर्मचारी बगले झांकने लगे। उन्हें समझ ही नहीं आया कि वह कैसे ऑक्सीजन का प्रेशर चेक करें। इस पर उन्होंने डॉक्टरों को नए स्टाफ (प्रशिक्षुओं) को ठीक से दोबारा प्रशिक्षण दिलाने की सलाह दी।
मंगलवार को जिले के सभी एल-वन और एल-टू अस्पतालों में मॉकड्रिल का आयोजन हुआ। इसमें उपचार के दौरान होने वाली बारीकियों को परखा गया। विशेष तौर पर ऑक्सीजन के प्रेशर और शुद्धता पर जोर दिया गया। वेंटिलेटर ऑपरेट करने में नए प्रशिक्षुओं को समस्या आने पर दोबारा प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए।
कोरोना महामारी की पहली दो लहरों में ऑक्सीजन की कमी से जिले के कुल 200 लोग काल के गाल में समा गए थे। इसे लेकर शासन की ओर से दोनों जिला अस्पताल व सीएचसी दिबियापुर में ऑक्सीजन प्लांट लगवाए गए थे। मौजूदा समय में जिले में तीन संक्रमित मरीज मिलने से खतरा बढ़ गया है। इसी के तहत स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को मॉकड्रिल कर अपनी व्यवस्थाओं की हकीकत परखी।
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मंगलवार सुबह कोविड कंट्रोल रूम में सूचना मिली कि कोरोना के मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस पर अलर्ट हुए एंबुलेंस कर्मियों ने तुरंत मरीज को 100 शैया युक्त जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां तैयार टीम ने उसे एक मिनट में वार्ड तक पहुंचाया गया। इसके बाद वार्ड में मौजूद कर्मचारियों ने वेंटिलेटर की सुविधा देना शुरू किया। इस दौरान कुछ प्रशिक्षुओं को वेंटिलेटर ऑपरेट करने में समस्या हुई।
इसी दौरान नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. प्रहलाद सिंह ने वार्ड में मौजूद स्टाफ को ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर, शुद्धता व सप्लाई पाइप में लीकेज की जांच करने के लिए दौड़ाया। तब वार्ड के सभी बेडों पर ऑक्सीजन सप्लाई की भी जांच की गई। सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डब्ल्यूएचओ डॉ. चेतन शर्मा व डॉ अमितेश ने स्वास्थ्य कर्मियों को इलाज के दौरान विशेष छोटी-छोटी गलतियों को समझाया।
सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि अस्पताल में 24 वेंटिलेटर मौजूद हैं। सभी चालू हालत में हैं। शासन के निर्देश पर 40 बेड का वार्ड तैयार किया गया है। इसमें 10 एचडीयू बेड, 10 आईसीयू बेड व 20 आइसोलेशन बेड मौजूद हैं। वहीं, सीएचसी अयाना पर एसीएमओ डॉ. शिशिर पुरी व सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुनील शर्मा की मौजूदगी में मॉकड्रिल कराई गई। इस दौरान एसीएमओ ने अस्पताल में मौजूद संसाधनों की जांच व रोकथाम के लिए जरूरी दवाइयों की उपलब्धता की जानकारी ली।
विभाग के तरकश में मौजूद नहीं कोरोना का ब्रह्मास्त्र
- कोरोना महामारी से लड़ने में ब्रह्मास्त्र का काम करने वाली वैक्सीन जिले में 10 फरवरी से नहीं है। इससे लोगों को महामारी से लड़ने में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक 12 से 14 साल के 5,702 बच्चों, 15 से 18 साल के 90,506 और 18 साल से अधिक उम्र वाले 10,10,372 लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। जिले की कुल आबादी 17 लाख के लगभग है। शासन की ओर से 12 साल से कम आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं, अभी 12 साल से अधिक उम्र के बहुत से लोग भी टीके से प्रतिरक्षित नहीं हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में कुछ पलों की देरी हो सकती घातक
- 100 शैया युक्त जिला अस्पताल में हुई मॉकड्रिल में नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक डॉ. प्रहलाद ने स्वास्थ्य कर्मियों को मरीज को वार्ड में भर्ती करने व उपचार शुरू करने के दौरान समय का विशेष ध्यान रखने को कहा। बताया कि मरीज को स्वास्थ्य सेवाएं देने में बचाया गए एक-एक पल मरीज के लिए वरदान साबित होता है। मरीज को समय रहते सही सुविधा मिलने पर खतरा बहुत कम हो जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से कोविड के दौरान दी जाने वाली दवाइयों की जानकारी की।
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मंगलवार को जिले के सभी एल-वन और एल-टू अस्पतालों में मॉकड्रिल का आयोजन हुआ। इसमें उपचार के दौरान होने वाली बारीकियों को परखा गया। विशेष तौर पर ऑक्सीजन के प्रेशर और शुद्धता पर जोर दिया गया। वेंटिलेटर ऑपरेट करने में नए प्रशिक्षुओं को समस्या आने पर दोबारा प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए।
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कोरोना महामारी की पहली दो लहरों में ऑक्सीजन की कमी से जिले के कुल 200 लोग काल के गाल में समा गए थे। इसे लेकर शासन की ओर से दोनों जिला अस्पताल व सीएचसी दिबियापुर में ऑक्सीजन प्लांट लगवाए गए थे। मौजूदा समय में जिले में तीन संक्रमित मरीज मिलने से खतरा बढ़ गया है। इसी के तहत स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को मॉकड्रिल कर अपनी व्यवस्थाओं की हकीकत परखी।
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मंगलवार सुबह कोविड कंट्रोल रूम में सूचना मिली कि कोरोना के मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस पर अलर्ट हुए एंबुलेंस कर्मियों ने तुरंत मरीज को 100 शैया युक्त जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां तैयार टीम ने उसे एक मिनट में वार्ड तक पहुंचाया गया। इसके बाद वार्ड में मौजूद कर्मचारियों ने वेंटिलेटर की सुविधा देना शुरू किया। इस दौरान कुछ प्रशिक्षुओं को वेंटिलेटर ऑपरेट करने में समस्या हुई।
इसी दौरान नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. प्रहलाद सिंह ने वार्ड में मौजूद स्टाफ को ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर, शुद्धता व सप्लाई पाइप में लीकेज की जांच करने के लिए दौड़ाया। तब वार्ड के सभी बेडों पर ऑक्सीजन सप्लाई की भी जांच की गई। सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डब्ल्यूएचओ डॉ. चेतन शर्मा व डॉ अमितेश ने स्वास्थ्य कर्मियों को इलाज के दौरान विशेष छोटी-छोटी गलतियों को समझाया।
सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने बताया कि अस्पताल में 24 वेंटिलेटर मौजूद हैं। सभी चालू हालत में हैं। शासन के निर्देश पर 40 बेड का वार्ड तैयार किया गया है। इसमें 10 एचडीयू बेड, 10 आईसीयू बेड व 20 आइसोलेशन बेड मौजूद हैं। वहीं, सीएचसी अयाना पर एसीएमओ डॉ. शिशिर पुरी व सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुनील शर्मा की मौजूदगी में मॉकड्रिल कराई गई। इस दौरान एसीएमओ ने अस्पताल में मौजूद संसाधनों की जांच व रोकथाम के लिए जरूरी दवाइयों की उपलब्धता की जानकारी ली।
विभाग के तरकश में मौजूद नहीं कोरोना का ब्रह्मास्त्र
- कोरोना महामारी से लड़ने में ब्रह्मास्त्र का काम करने वाली वैक्सीन जिले में 10 फरवरी से नहीं है। इससे लोगों को महामारी से लड़ने में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक 12 से 14 साल के 5,702 बच्चों, 15 से 18 साल के 90,506 और 18 साल से अधिक उम्र वाले 10,10,372 लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। जिले की कुल आबादी 17 लाख के लगभग है। शासन की ओर से 12 साल से कम आयु के बच्चों के लिए टीकाकरण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं, अभी 12 साल से अधिक उम्र के बहुत से लोग भी टीके से प्रतिरक्षित नहीं हैं।
स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में कुछ पलों की देरी हो सकती घातक
- 100 शैया युक्त जिला अस्पताल में हुई मॉकड्रिल में नोडल अधिकारी संयुक्त निदेशक डॉ. प्रहलाद ने स्वास्थ्य कर्मियों को मरीज को वार्ड में भर्ती करने व उपचार शुरू करने के दौरान समय का विशेष ध्यान रखने को कहा। बताया कि मरीज को स्वास्थ्य सेवाएं देने में बचाया गए एक-एक पल मरीज के लिए वरदान साबित होता है। मरीज को समय रहते सही सुविधा मिलने पर खतरा बहुत कम हो जाता है। इसके साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से कोविड के दौरान दी जाने वाली दवाइयों की जानकारी की।