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बर्न यूनिट क़ा संचालन नहीं, झुलसने पर रेफर करना मजबूरी
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औरैया। जिला अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट सात साल पहले बनाई गई। इसमें लाखों रुपये के उपकरण भी लगा दिए गए, लेकिन डॉक्टरों और स्टॉफ की तैनाती आज तक नहीं की गई है। इस कारण आग से झुलसे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालत गंभीर होने पर कानपुर, लखनऊ, सैफई या आगरा रेफर कर दिया जाता है। कई बार तो अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज दम तोड़ देते हैं।
100 शैया जिला अस्पताल में वर्ष 2015 में एक करोड़ रुपये की लागत से वातानुकूलित प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट की स्थापना की गई थी। लोगों को उम्मीद थी कि झुलसे मरीजों को इलाज मिल जाएगा। साथ ही सर्जरी भी आसानी से हो सकेगी, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती न होने से यूनिट चालू नहीं हो पाई।
यूनिट पर आज भी ताला लटक रहा है। इमारत की देखरेख ढंग से न होने से अंदर से बाहर तक धूल और गंदगी है। यूनिट की बाहरी फर्श जगह-जगह धंस गई है। कई खिड़कियों के कांच टूट गए हैं। कमरों के अंदर रखे उपकरण खराब हो रहे हैं।
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बर्न यूनिट के संचालन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन से डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की मांग की गई है। जल्द ही डॉक्टरों की तैनाती की उम्मीद है। डाक्टरों की तैनाती के बाद संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
-डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ
सावधानी से जलाएं पटाखे
दीपावली पर पटाखे सावधानी से जलाएं। पटाखे जलाते समय झुलसने व आंखों में किसी भी तरह की दिक्कत हुई तो परेशानी उठानी पड़ सकती है। जिले में कोई भी नेत्र सर्जन नहीं है। इलाज कराने के लिए रेफर होना मजबूरी बनी हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने दीपावली को देखते हुए दोनों जिला अस्पताल 50 शैया, 100 शैया अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों व स्टाफ की तैनाती कर विशेष तैयारी किए जाने का दावा किया है।
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100 शैया जिला अस्पताल में वर्ष 2015 में एक करोड़ रुपये की लागत से वातानुकूलित प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट की स्थापना की गई थी। लोगों को उम्मीद थी कि झुलसे मरीजों को इलाज मिल जाएगा। साथ ही सर्जरी भी आसानी से हो सकेगी, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती न होने से यूनिट चालू नहीं हो पाई।
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यूनिट पर आज भी ताला लटक रहा है। इमारत की देखरेख ढंग से न होने से अंदर से बाहर तक धूल और गंदगी है। यूनिट की बाहरी फर्श जगह-जगह धंस गई है। कई खिड़कियों के कांच टूट गए हैं। कमरों के अंदर रखे उपकरण खराब हो रहे हैं।
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बर्न यूनिट के संचालन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन से डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की मांग की गई है। जल्द ही डॉक्टरों की तैनाती की उम्मीद है। डाक्टरों की तैनाती के बाद संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
-डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ
सावधानी से जलाएं पटाखे
दीपावली पर पटाखे सावधानी से जलाएं। पटाखे जलाते समय झुलसने व आंखों में किसी भी तरह की दिक्कत हुई तो परेशानी उठानी पड़ सकती है। जिले में कोई भी नेत्र सर्जन नहीं है। इलाज कराने के लिए रेफर होना मजबूरी बनी हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने दीपावली को देखते हुए दोनों जिला अस्पताल 50 शैया, 100 शैया अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टरों व स्टाफ की तैनाती कर विशेष तैयारी किए जाने का दावा किया है।