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Auraiya News: संवरेगा जमौली का ब्रह्मदेव व बिधूना का वनखंडेश्वर मंदिर

Sat, 07 Jun 2025 11:41 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 07 Jun 2025 11:41 PM IST
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Brahmadev temple of Jamauli and Vankhandeshwar temple of Bidhuna will be improved
वन खंडेश्वर मंदिर में पूजन करता भक्त। - फोटो : वन खंडेश्वर मंदिर में पूजन करता भक्त।
औरैया। जनपद के दो प्राचीन मंदिरों का कायाकल्प होगा। इसके लिए पर्यटन विभाग ने जमौली का ब्रह्मदेव बाबा मंदिर और बिधूना का वनखंडेश्वर मंदिर चयनित किया है।
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दोनों मंदिरों का सुंदरीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही वहां पर सुविधाएं भी चकाचक की जाएंगी। इसके लिए विभाग प्रस्ताव तैयार करने में जुटा है।
बिधूना के वनखंडेश्वर मंदिर की बात करें तो यह मंदिर कस्बे के अरिंद नदी से कुछ दूरी पर स्थित है। वनखंडेश्वर शिव मंदिर सिद्धपीठ मंदिरों में माना जाता है, लेकिन इस मंदिर को अभी तक भव्यता नहीं मिल सकी। कुछ ऐसा ही हाल जमौली के ब्रह्मदेव मंदिर का भी है। ये दोनों प्राचीन मंदिर हैं। बावजूद इसके इनका सौंदर्यीकरण नहीं हो पाया।
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ऐसे में पर्यटन विभाग ने इस बार इन मंदिरों को संवारने का फैसला लिया है। जिला पर्यटन अधिकारी मोहित सिंह बताते है कि दोनों मंदिरों को संवारने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। कार्ययोजना तैयार करने के बाद मंजूरी के लिए इसे शासन को भेजा जाएगा। स्वीकृत व बजट मिलते ही इन मंदिरों की सूरत बदली जाएगी।
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अज्ञातवास में पांडवों ने की थी वनखंडेश्वर मंदिर में पूजा
वनखंडेश्वर शिव मंदिर के पुजारी उमेश चंद्र शुक्ला बताते हैं कि यह मंदिर पौराणिक काल का है। मान्यता है कि अज्ञातवास के समय जब पांडव कन्नौज जा रहे थे तो वह इसी रास्ते से गए थे। घने वन में भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग झाड़ियों दिखा तो पांडव यहीं पर रुक गए थे।
इसी मंदिर पर पांडवों ने पूजा अर्चना की थी। पुजारी बताते हैं कि यह शिवलिंग स्वयंभू है। चबूतरा आदि बनने पर शिवलिंग की ऊंची अपने आप बढ़ जाती है। ये नजारा कई बार देखा जा चुका है। महाभारत कालीन इस मंदिर में श्रावण मास पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। वहीं प्रत्येक सोमवार को भी मंदिर में श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए तांता लगता हैं।

वहीं, कंचौसी के रेलवे स्टेशन से तीन किमी दूर जमौली गांव में बाबा ब्रह्मदेव का बड़ा महत्व है। पुजारी मोहन दास बताते हैं कि देव स्थान पर लगा पीपल का पेड़ कई बार अपने स्वरूप को बदल चुका है। यहां भक्तों की कुंडली का मंगल और बृहस्पति सुधर जाता है। मंदिर में भगवान शनिदेव, शिव, दुर्गा माता ब राधा-कृष्ण के भी छोटे-छोटे मंदिर हैं, जहां प्रतिदिन पूजा होती है।
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