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-मंदिरों में गू्जीं भजन संध्या, लगे जयकारे

Sun, 10 Apr 2016 12:12 AM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Sun, 10 Apr 2016 12:12 AM IST
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Bhajan Sandhya in -mndiron Gunje engaged Jaykare
देवी गीतों पर थिरकते भक्तगण - फोटो : amar ujala beuro
शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों के द्वारों पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। शनिवार की भोर से ही प्रमुख मंदिरों में दर्शन के लिए महिलाओं और पुरुषों की लाइन लगी रही। मां के जयकारे से मंदिर गूंजते रहे। उधर घरों में देवी भक्तों ने आराधना कर मैया की उपासना की।
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शनिवार को मां दुर्गा के दूसरे स्वरुप माता ब्रहमाचारिणी की पूजा अर्चना की गई है। ब्रहमा जी की शक्ति होने से मां का यह स्वरुप ब्रहमचारिणी के नाम से लोकप्रसिद्ध है। ब्रहमा जी सृष्टि के सर्जक है। उद्भव ब्रहमा जी के कमंडल से माना जाता है। शहर के काली माता मंदिर व मां मंगला काली मंदिर के पट खुलते ही भक्तों की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। भक्तों ने मैया को चुनरी, नारियल, माला चढ़ाकर नमन किया। मंदिरों में दीप जलाकर महाआरती का आयोजन किया गया।
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मंदिरों में कई बच्चों के मुंडन और कर्णछेदन संस्कार भी कराए गए। उधर बड़ी माता मंदिर में देवी भक्तों ने चुनरी व माला अर्पित कर मैया का आशीर्वाद लिया। शहर के आर्यनगर मोहल्ला स्थित काली माता मंदिर, जेसीज चौराहा स्थित प्राचीन काली माई मंदिर, बनारसीदास स्थित बड़ी माता मंदिर, नारायनपुर स्थित शीतला माता मंदिर व मां मंगला काली मंदिर समेत शहर के दर्जन भर देवी मंदिरों मां दुर्गा के गूंज गुंजायमान रहे। मंदिरों में सुबह आरती व शाम को भजन संध्या में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना की।
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रोग-शोक को दूर करती हैं मां कूष्मांडा
मंदिरों में रविवार को माता के चौथे रूप कूष्मांडा की पूजा होगी। माता का यह रू प आयु, यश और बल प्रदान करता है। वहीं सच्चे मन से कूष्मांडा देवी की पूजा करने से रोग और शोक दूर हो जाते हैं। पंडित राम कुमार शास्त्री बताते हैं कि नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरुप की पूजा की जाती है। माना जाता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब कू्ष्मांडा देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने के कारण इन्हें कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है। इसलिए यह सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। माता का यह स्वरुप भक्तों के कष्टों का निवारण करता है।


कैसे करें मां कूष्मांडा का पूजन
पंडित राम कुमार शास्त्री बताते हैं कि सबसे पहले कलश की स्थापना करें। घर में उपस्थित देवी देवताओं का पूजन करें। इसी पूजन के पश्चात देवी कूष्मांडा देवी का पूजन करें। पूजन के दौरान हाथों मे फूल लेकर देवी को प्रणाम करें। कूष्मांडा देवी पूजन के बाद महादेव और श्री हरि की पूजा देवी लक्ष्मी के साथ अवश्य करनी चाहिए।
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