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भिंड में होने वाली चंबल मैराथन में शामिल होंगे औरैया के खिलाड़ी
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औरैया। चंबल फाउंडेशन की ओर से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली चंबल मैराथन प्रतियोगिता इस बार मध्य प्रदेश के जिला भिंड के गांव अटेर में 16 जनवरी सुबह नौ बजे से शुरू होगी। इसमें औरैया जिले के खिलाड़ी भी सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम को लेकर आयोजकों की ओर से तैयारियां चल रही हैं। शुक्रवार को बीहड़ के दुर्गम रास्तों का निरीक्षण करके रोडमैप तैयार किया गया।
चंबल फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रही ‘चंबल नेचुरल टूर्रिम’ ‘स्प्रिट चंबल’ और ‘रन फॉर बेटर चंबल’ जैसी मुहिम से चंबल घाटी क्षेत्र की पहचान पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। चंबल मैराथन के संयोजक और कार्यक्रम प्रभारी राधेगोपाल यादव ने कहा कि आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों को सबसे बड़ी चुनौती चंबल के रणबांकुरों से ही मिली थी। रूद्राक्ष मैन डॉ. रिपुदमन सिंह ने कहा कि गौरवशाली विरासत रखने वाली चंबल घाटी में बिना देर किए उसकी प्राकृतिक संरचनाओं को सहेजा जाए और विकास कार्य कराए जाएं।
चंबल क्षेत्र के युवाओं की शिक्षा, ऊर्जा और आवेश का सही इस्तेमाल हो। बीहड़ी इलाके के लिए विशेष पैकेज जारी किए जाएं। चंबल के उपेक्षित स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ा जाए। इससे बड़े पैमाने पर
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स्वरोजगार का सृजन होगा। चंबल के बीहड़ों की अकेले साइकिल से 2800 किमी से अधिक यात्रा कर दस्तावेजीकरण करने वाले चंबल परिवार के मुखिया शाह आलम ने बताया कि चंबल मैराथन में आसपास के प्रदेशों के खिलाड़ी दौड़ में प्रतिभागी बनेंगे। मैराथन के बाद उन्हें चंबल परिवार की तरफ से पुरस्कृत किया जाएगा। मैराथन रूट का खाका तैयार करते समय उत्तम सिंह, गोविंद यादव, सागर कुमार, विमलेश यादव आदि मौजूद रहे।
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चंबल फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रही ‘चंबल नेचुरल टूर्रिम’ ‘स्प्रिट चंबल’ और ‘रन फॉर बेटर चंबल’ जैसी मुहिम से चंबल घाटी क्षेत्र की पहचान पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। चंबल मैराथन के संयोजक और कार्यक्रम प्रभारी राधेगोपाल यादव ने कहा कि आजादी के आंदोलन में अंग्रेजों को सबसे बड़ी चुनौती चंबल के रणबांकुरों से ही मिली थी। रूद्राक्ष मैन डॉ. रिपुदमन सिंह ने कहा कि गौरवशाली विरासत रखने वाली चंबल घाटी में बिना देर किए उसकी प्राकृतिक संरचनाओं को सहेजा जाए और विकास कार्य कराए जाएं।
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चंबल क्षेत्र के युवाओं की शिक्षा, ऊर्जा और आवेश का सही इस्तेमाल हो। बीहड़ी इलाके के लिए विशेष पैकेज जारी किए जाएं। चंबल के उपेक्षित स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ा जाए। इससे बड़े पैमाने पर
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स्वरोजगार का सृजन होगा। चंबल के बीहड़ों की अकेले साइकिल से 2800 किमी से अधिक यात्रा कर दस्तावेजीकरण करने वाले चंबल परिवार के मुखिया शाह आलम ने बताया कि चंबल मैराथन में आसपास के प्रदेशों के खिलाड़ी दौड़ में प्रतिभागी बनेंगे। मैराथन के बाद उन्हें चंबल परिवार की तरफ से पुरस्कृत किया जाएगा। मैराथन रूट का खाका तैयार करते समय उत्तम सिंह, गोविंद यादव, सागर कुमार, विमलेश यादव आदि मौजूद रहे।