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विभाग की चूक के कारण कोरोना मृतक आश्रित को नहीं मिल पा रहा मुआवजा
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फोटो-20एयूआरपी-23- जानकारी देता अभय राठौर
- फोटो : AURAIYA
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दिबियापुर (औरैया)। स्वास्थ्य विभाग की जरा सी चूक का दंश कोरोना संक्रमण से काल के गाल में समाए व्यक्ति के परिजन भुगत रहे हैं। आरटीपीसीआर जांच के दौरान मृतक का पता दिबियापुर की बजाय देवरिया दर्ज हो गया था। इसके कारण औरैया जिले से कोरोना की सत्यापित जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही है। इस कारण कोरोना मृतक आश्रित का मुआवजा भी नहीं मिल पा रहा है।
दिबियापुर के वीर अब्दुल हमीद नगर निवासी अभय राठौर ने बताया कि उनके 42 वर्षीय पिता संदीप राठौर दिबियापुर में पान की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। बीमार पड़े तो 31 अगस्त, 2020 को लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर आरटीपीसीआर जांच में कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। बाद में उन्हें लखनऊ के ही कोविड हास्पिटल में भर्ती करा दिया गया। उपचार के दौरान ही पिता ने चार सितंबर को दम तोड़ दिया।
पिछले दिनों सरकार ने कोरोना से काल के गाल में समाए लोगों के आश्रितों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की। इस पर अभय अपने पिता की जांच रिपोर्ट सत्यापित कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। वहां जानकारी हुई कि संदीप राठौर की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में देवरिया जिले का पता पड़ा है। जिले के स्वास्थ्य विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर देवरिया से ही सत्यापन एवं प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए कहा। अभय का कहना है कि उनके पिता घर में अकेले कमाने वाले थे। वह बीएससी तृतीय वर्ष का छात्र है। उसका छोटा भाई हर्ष बीएससी द्वितीय वर्ष में है, छोटी बहन अवनि कक्षा 8 की छात्रा है। अभय ने अपनी छोटी बहन की पढ़ाई के लिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आवेदन किया है। इस योजना के तहत कोरोना संक्रमण के कारण अनाथ हुए बच्चे की देखभाल के लिए वयस्क होने तक प्रतिमाह रुपये मिलते हैं। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट का सत्यापन न होने एवं प्रमाणपत्र न मिल पाने के कारण बहन का आवेदन भी नहीं हो पा रहा है। अभय ने जल्द से जल्द समस्या का समाधान कराने की मांग की है।
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बोले जिम्मेदार
मामला संज्ञान में है। देवरिया जिले का पता होने के कारण जांच रिपोर्ट औरैया के पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रही है। देवरिया सीएमओ कार्यालय से संशोधन के बाद ही औरैया के पोर्टल पर डिटेल दिखाई देगी। इसके बाद तत्काल प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
-डॉ. शिशिर पुरी, जिला सर्विलांस अधिकारी
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दिबियापुर के वीर अब्दुल हमीद नगर निवासी अभय राठौर ने बताया कि उनके 42 वर्षीय पिता संदीप राठौर दिबियापुर में पान की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। बीमार पड़े तो 31 अगस्त, 2020 को लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया। यहां पर आरटीपीसीआर जांच में कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई। बाद में उन्हें लखनऊ के ही कोविड हास्पिटल में भर्ती करा दिया गया। उपचार के दौरान ही पिता ने चार सितंबर को दम तोड़ दिया।
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पिछले दिनों सरकार ने कोरोना से काल के गाल में समाए लोगों के आश्रितों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की। इस पर अभय अपने पिता की जांच रिपोर्ट सत्यापित कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। वहां जानकारी हुई कि संदीप राठौर की आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट में देवरिया जिले का पता पड़ा है। जिले के स्वास्थ्य विभाग ने जांच रिपोर्ट के आधार पर देवरिया से ही सत्यापन एवं प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए कहा। अभय का कहना है कि उनके पिता घर में अकेले कमाने वाले थे। वह बीएससी तृतीय वर्ष का छात्र है। उसका छोटा भाई हर्ष बीएससी द्वितीय वर्ष में है, छोटी बहन अवनि कक्षा 8 की छात्रा है। अभय ने अपनी छोटी बहन की पढ़ाई के लिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत आवेदन किया है। इस योजना के तहत कोरोना संक्रमण के कारण अनाथ हुए बच्चे की देखभाल के लिए वयस्क होने तक प्रतिमाह रुपये मिलते हैं। आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट का सत्यापन न होने एवं प्रमाणपत्र न मिल पाने के कारण बहन का आवेदन भी नहीं हो पा रहा है। अभय ने जल्द से जल्द समस्या का समाधान कराने की मांग की है।
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बोले जिम्मेदार
मामला संज्ञान में है। देवरिया जिले का पता होने के कारण जांच रिपोर्ट औरैया के पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रही है। देवरिया सीएमओ कार्यालय से संशोधन के बाद ही औरैया के पोर्टल पर डिटेल दिखाई देगी। इसके बाद तत्काल प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
-डॉ. शिशिर पुरी, जिला सर्विलांस अधिकारी