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हड़ताल से मरीजों और तीमारदारों को हो रही परेशानी
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फोटो 29एयूआरपी28- प्रसव के लिए किराए की वैन से गर्भवती महिला को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे परिजन । संव?
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। छह सूत्री मांगों को लेकर जारी एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राइवेट एंबुलेंस चालक व अन्य गाड़ियों का सहारा लेकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। इधर, चिचौली स्थित जिला अस्पताल गुरुवार को भी चालक हड़ताल पर रहे। एआरटीओ ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी मांग पर अड़े रहे।
संगठन के जिलाध्यक्ष संजीव यादव ने कहा कि मांगे पूरी न होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। चालकों ने कहा कि शासन उन्हें फर्जी तरीके से मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दे रहा है। जिससे वह डरने वाले नहीं हैं। वह अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसे वह पाकर रहेंगे।
गुरुवार को बारिश के दौरान भी प्रदर्शनकारी चालकों ने नारेबाजी कर भड़ास निकाली। प्रदर्शन के दौरान सतीश यादव, सोनू यादव, यशवीर यादव, विकास यादव, गोपाल शुक्ला, नीरज यादव, बाबा राजा रजत सिंह, अर्जुन राजपूत, देवेंद्र, शरद यादव, प्रियंका चौहान, आरती, करिश्मा, आकांक्षा, ऋचा, शाकरा बानो, हरिशरण, शशिकांत, रतन सिंह, विनोद यादव आदि मौजूद रहे। दोपहर के समय एआरटीओ अशोक कुमार प्रदर्शनकारियों से मिले। उन्हें समझाने का प्रयास किया। लेकिन बात नहीं बनीं।
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सीन - एक
गांव रौतियापुर निवासी सरोजनी का प्रसव बुधवार की देररात को हुआ। गुरुवार की दोपहर अस्पताल से उन्हें छुट्टी दी गई। परिजन ने बताया कि जब उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से एंबुलेंस उपलब्ध कराए जाने की मांग की। तब उन्हें हड़ताल की जानकारी देकर स्वयं अपने खर्चे से घर जाने की बात कही गई। जिस पर मजबूरी में ऑटो किराये पर करना पड़ा।
सीन- दो
सदर ब्लॉक के गांव महतेपुर निवासिनी गर्भवती रोशनी की गुरुवार की दोपहर अचानक पेट में दर्द होने पर परिजनों ने कई बार सरकारी एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन किया। लेकिन गाड़ी न आने पर परिजन किराए पर वैन करके रोशनी को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। रोशनी के साथ आए परिजनों ने बताया कि कई बार फोन करने के बाद एंबुलेंस नहीं मिली। आशा ने हड़ताल की जानकारी दी। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें अधिक रुपये भी खर्च करने को मजबूर होना पड़ा है।
प्रमुख मांगेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेें
- इस आंदोलन में जिन साथियों पर मुकदमा दर्ज या सेवा समाप्ति का पत्र जारी किया गया। उनकी बहाली और मुकदमा हटाया जाए।
- ठेका प्रथा को बंद कर एंबुलेंसकर्मियों को एनएचएम के तहत शामिल किया जाए।
- एडवांस लाइफ सपोर्ट के जो कर्मचारी निकाले गए हैं। उनको वापस लिया जाए।
- न्यूनतम वेतनमान जारी किया जाए।
- 20 हजार की एफडी मांगी जा रही है। इस आदेश को वापस लिया जाए।
- जान पर खेलकर नौकरी करने वाले एंबुलेंसकर्मियों की नौकरी सुरक्षित की जाए।
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संगठन के जिलाध्यक्ष संजीव यादव ने कहा कि मांगे पूरी न होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। चालकों ने कहा कि शासन उन्हें फर्जी तरीके से मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दे रहा है। जिससे वह डरने वाले नहीं हैं। वह अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसे वह पाकर रहेंगे।
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गुरुवार को बारिश के दौरान भी प्रदर्शनकारी चालकों ने नारेबाजी कर भड़ास निकाली। प्रदर्शन के दौरान सतीश यादव, सोनू यादव, यशवीर यादव, विकास यादव, गोपाल शुक्ला, नीरज यादव, बाबा राजा रजत सिंह, अर्जुन राजपूत, देवेंद्र, शरद यादव, प्रियंका चौहान, आरती, करिश्मा, आकांक्षा, ऋचा, शाकरा बानो, हरिशरण, शशिकांत, रतन सिंह, विनोद यादव आदि मौजूद रहे। दोपहर के समय एआरटीओ अशोक कुमार प्रदर्शनकारियों से मिले। उन्हें समझाने का प्रयास किया। लेकिन बात नहीं बनीं।
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सीन - एक
गांव रौतियापुर निवासी सरोजनी का प्रसव बुधवार की देररात को हुआ। गुरुवार की दोपहर अस्पताल से उन्हें छुट्टी दी गई। परिजन ने बताया कि जब उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से एंबुलेंस उपलब्ध कराए जाने की मांग की। तब उन्हें हड़ताल की जानकारी देकर स्वयं अपने खर्चे से घर जाने की बात कही गई। जिस पर मजबूरी में ऑटो किराये पर करना पड़ा।
सीन- दो
सदर ब्लॉक के गांव महतेपुर निवासिनी गर्भवती रोशनी की गुरुवार की दोपहर अचानक पेट में दर्द होने पर परिजनों ने कई बार सरकारी एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन किया। लेकिन गाड़ी न आने पर परिजन किराए पर वैन करके रोशनी को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। रोशनी के साथ आए परिजनों ने बताया कि कई बार फोन करने के बाद एंबुलेंस नहीं मिली। आशा ने हड़ताल की जानकारी दी। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें अधिक रुपये भी खर्च करने को मजबूर होना पड़ा है।
प्रमुख मांगेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेें
- इस आंदोलन में जिन साथियों पर मुकदमा दर्ज या सेवा समाप्ति का पत्र जारी किया गया। उनकी बहाली और मुकदमा हटाया जाए।
- ठेका प्रथा को बंद कर एंबुलेंसकर्मियों को एनएचएम के तहत शामिल किया जाए।
- एडवांस लाइफ सपोर्ट के जो कर्मचारी निकाले गए हैं। उनको वापस लिया जाए।
- न्यूनतम वेतनमान जारी किया जाए।
- 20 हजार की एफडी मांगी जा रही है। इस आदेश को वापस लिया जाए।
- जान पर खेलकर नौकरी करने वाले एंबुलेंसकर्मियों की नौकरी सुरक्षित की जाए।