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बीमार अस्पतालों को स्वस्थ्य करने की तैयारी, चालू होगी ओपीडी
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औरैया। ग्रामीण क्षेत्र में बदहाल हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए शासन से निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद अब स्वास्थ्य विभाग एक नए सिरे से जिले में बीमार पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को सही करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही जल्द ओपीडी शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की बदहाल हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से पटरी पर लाने का फरमान जारी किया गया है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित मोहन प्रसाद ने सीएमओ को दिए निर्देश में कहा है कि जिले के स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही उप स्वास्थ्य केंद्रों को चालू हालत में लाया जाए। इसके लिए रंगाई-पुताई के साथ जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त करा ली जाएं। अस्पतालों में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी होने पर आयुष चिकित्सकों को ड्यूटी पर तैनात किया जाए।
जिले में संचालित हो रहे इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर पर चिकित्सकों के जगह पर अन्य अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाए। जिससे चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाएं ली जा सकें। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटीजन जांच की व्यवस्था के साथ पर्याप्त दवाइयां रखी जाएं। ओपीडी बंद करने के आदेश नहीं है, इसके बाद भी ओपीड बंद है। ओपीडी का सोशल डिस्टेंसिंग के साथ संचालन कराया जाए। जिससे ग्रामीण क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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अब 10 से 12 होगा इलाज
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने जारी आदेश में साफ कहा कि ब्लैक फंगस की बीमारी को देखते हुए जिला अस्पतालों में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक नेत्र रोग विशेषज्ञ, नाक, कान, गला के डॉक्टर ओपीडी करेंगे। इस दौरान कोविड नियमों का पालन कराया जाएगा। जिससे ब्लैक फंगस के रोगियों की पहचान हो सके। इसके साथ ही कोविड कमांड सेंटर को पोस्ट कोविड कमांड सेंटर के रूप में संचालन के निर्देश दिए हैं।
स्टेप डाउन वार्ड बनेगा
कोविड हॉस्पिटलों में अब स्टेप डाउन वार्ड बनाया जाएगा। इसमें कोविड के भर्ती मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें इसी वार्ड में रख कर कुछ दिन इलाज किया जाएगा। जब तक वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते, उनकी छुट्टी नहीं की जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक उनकी देखरेख करते रहेंगे।
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कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की बदहाल हो चुकी स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से पटरी पर लाने का फरमान जारी किया गया है। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित मोहन प्रसाद ने सीएमओ को दिए निर्देश में कहा है कि जिले के स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही उप स्वास्थ्य केंद्रों को चालू हालत में लाया जाए। इसके लिए रंगाई-पुताई के साथ जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त करा ली जाएं। अस्पतालों में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी होने पर आयुष चिकित्सकों को ड्यूटी पर तैनात किया जाए।
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जिले में संचालित हो रहे इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर पर चिकित्सकों के जगह पर अन्य अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाए। जिससे चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाएं ली जा सकें। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटीजन जांच की व्यवस्था के साथ पर्याप्त दवाइयां रखी जाएं। ओपीडी बंद करने के आदेश नहीं है, इसके बाद भी ओपीड बंद है। ओपीडी का सोशल डिस्टेंसिंग के साथ संचालन कराया जाए। जिससे ग्रामीण क्षेत्र की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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अब 10 से 12 होगा इलाज
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने जारी आदेश में साफ कहा कि ब्लैक फंगस की बीमारी को देखते हुए जिला अस्पतालों में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक नेत्र रोग विशेषज्ञ, नाक, कान, गला के डॉक्टर ओपीडी करेंगे। इस दौरान कोविड नियमों का पालन कराया जाएगा। जिससे ब्लैक फंगस के रोगियों की पहचान हो सके। इसके साथ ही कोविड कमांड सेंटर को पोस्ट कोविड कमांड सेंटर के रूप में संचालन के निर्देश दिए हैं।
स्टेप डाउन वार्ड बनेगा
कोविड हॉस्पिटलों में अब स्टेप डाउन वार्ड बनाया जाएगा। इसमें कोविड के भर्ती मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें इसी वार्ड में रख कर कुछ दिन इलाज किया जाएगा। जब तक वह पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो जाते, उनकी छुट्टी नहीं की जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक उनकी देखरेख करते रहेंगे।