{"_id":"5ae60d9c4f1c1b5f098b731e","slug":"arya-found-in-interstate-8th-place-in-the-state","type":"story","status":"publish","title_hn":"आर्या ने इंटर में पाया प्रदेश में आठवां स्थान ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आर्या ने इंटर में पाया प्रदेश में आठवां स्थान
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sun, 29 Apr 2018 11:53 PM IST
विज्ञापन
आठवां स्थान पाने पर आर्या को मिठाई खिलाकर आशीर्वाद देते परिजन
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औरैया। इंटरमीडिएट की परीक्षा में अपनी प्रतिभआ का लोहा मनवाने वाली आर्या त्रिपाठी फ फूंद की रहने वाली हैं। उन्होंने प्रदेश में आठवीं रैंक पाक यह साबित कर दिया कि शिक्षित परिवार का परवरिश में अहम रोल होता है। बचपन से ही पढ़ाई की तरफ झुकाव से आर्या हाईस्कूल में जिला टॉप रहीं तो इस बार इंटरमीडिएट में आठवीं रैंक हासिल की। आर्या का कहना है कि वह प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं।
विज्ञापन
फफूंद निवासी आर्या त्रिपाठी के पिता सुधीर त्रिपाठी श्री राधाकृष्ण इंटर कॉलेज फफूंद में प्रधानाचार्य हैं। मां नीलम त्रिपाठी डबल एमए बीएड हैं। वह वर्तमान में जूनियर हाईस्कूल कटरा मनेपुर में प्रधानाध्यापिका हैं। आर्या के बाबा रिटायर्ड प्रधानाचार्य प्रताप नारायण त्रिपाठी हैं। आर्या के ताऊ सुनील त्रिपाठी हैं।
विज्ञापन
बड़े भाई विशाल त्रिपाठी प्राइमरी स्कूल अछल्दा के भासी का पुरवा में अध्यापक हैं। छोटा भाई प्रगांसू त्रिपाठी कक्षा 10 में है। बड़ी बहन सौम्या त्रिपाठी गाजियाबाद से बीटेक कर रहीं हैं। अमर उजाला से बातचीत करते हुए आर्या ने कहा कि उन्होंने घर में पांच से छह घंटे पढ़ाई की है। वह प्रशासनिक अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहतीं हैं। अपनी सफलता के पीछे परिजनों को पूरा श्रेय देते हुए कहती हैं कि बिना उनके मार्गदर्शन के सफलता हासिल नहीं की जा सकती है।
विज्ञापन
इसके लिए वह अपने माता-पिता समेत ताऊ को श्रेय देतीं हैं। उन्होंने परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को टिप्स देते हुए कहा लगन से पढ़ाई करें तो पांच से छह घंटा बहुत है। पर पढ़ाई में ईमानदारी हो। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओे के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सोच बदलनी होगी तभी इसकी सार्थकता सिद्ध हो सकती है। जब सोच ही खराब होगी तो किसी भी अभियान सफल नहीं हो सकता।