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प्रशासन की सख्ती से काम शुरू
औरैया
Updated Wed, 29 Mar 2017 11:43 PM IST
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जमीन के समतलीकरण का काम करती मशीनें।
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर के मुआवजे के विवाद को लेकर रुका काम आज जिला प्रशासन ने शुरू करा दिया। प्रदेश के मुख्य सचिव के आदेश के बाद जिले भर के आला अधिकारियों की मौजूदगी में कथित रूप से विवादित भूमि पर काम कराया गया।
शाम छह बजे तक अधिकारियों की मौजूदगी में काम होता रहा। हालांकि भू स्वामियों ने इसे जिला प्रशासन की जबरदस्ती बताया।
बुधवार की सुबह एडीएम, एएसपी, एसडीएम, सीओ सदर पुलिस फोर्स व फायर ब्रिगेड के साथ रेलवे लाइन के किनारे रेलवे पावर ग्रिड के पास पहुंचे। यहां डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर के अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी व अन्य मशीनों के माध्यम से कथित रूप से विवादित भूमि का समतलीकरण कराया जाने लगा। इस बीच पहुंचे भूमि स्वामी सुनील चौहान ने कहा कि उनका उच्च न्यायालय में वाद चल रहा है।
इससे इस जमीन पर कब्जा अवैधानिक है। यह प्रशासन की जबरदस्ती है। उन्होंने इसकी जिलाधिकारी से शिकायत की। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन के आदेश के अनुसार काम कराया जा रहा है। सचिव भारत सरकार ने अवगत कराया है कि किसानों के विरोध के कारण भूमि का कब्जा भारत सरकार को नहीं दिया जा सका है।
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इनमें से अधिकतर प्रकरणों में भू स्वामियों ने मूल प्रतिकर की धनराशि प्राप्त कर ली। प्रतिकर की धनराशि में वृद्घि के लिए उच्च न्यायालय में रिट एवं आर्बीटेशन वाद दाखिल किए हैं। प्रतिकर की धनराशि विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय में जमा करा दी गई है। 17 नवंबर 2015 को समन्वय समिति की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया है कि अधिग्रहीत भूमियों का भौतिक कब्जा डीएफसीसीआईएल को दे दिया जाए।
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शाम छह बजे तक अधिकारियों की मौजूदगी में काम होता रहा। हालांकि भू स्वामियों ने इसे जिला प्रशासन की जबरदस्ती बताया।
बुधवार की सुबह एडीएम, एएसपी, एसडीएम, सीओ सदर पुलिस फोर्स व फायर ब्रिगेड के साथ रेलवे लाइन के किनारे रेलवे पावर ग्रिड के पास पहुंचे। यहां डेडीकेटिड फ्रेट कॉरीडोर के अधिकारियों की मौजूदगी में जेसीबी व अन्य मशीनों के माध्यम से कथित रूप से विवादित भूमि का समतलीकरण कराया जाने लगा। इस बीच पहुंचे भूमि स्वामी सुनील चौहान ने कहा कि उनका उच्च न्यायालय में वाद चल रहा है।
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इससे इस जमीन पर कब्जा अवैधानिक है। यह प्रशासन की जबरदस्ती है। उन्होंने इसकी जिलाधिकारी से शिकायत की। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन के आदेश के अनुसार काम कराया जा रहा है। सचिव भारत सरकार ने अवगत कराया है कि किसानों के विरोध के कारण भूमि का कब्जा भारत सरकार को नहीं दिया जा सका है।
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इनमें से अधिकतर प्रकरणों में भू स्वामियों ने मूल प्रतिकर की धनराशि प्राप्त कर ली। प्रतिकर की धनराशि में वृद्घि के लिए उच्च न्यायालय में रिट एवं आर्बीटेशन वाद दाखिल किए हैं। प्रतिकर की धनराशि विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के कार्यालय में जमा करा दी गई है। 17 नवंबर 2015 को समन्वय समिति की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया है कि अधिग्रहीत भूमियों का भौतिक कब्जा डीएफसीसीआईएल को दे दिया जाए।