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प्रशासन के दावे फेल, नहर में अब तक नहीं आया पानी
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औरैया की सूखी पड़ी नहर में क्रिकेट खेलते नरोत्तमपुर गांव के बच्चे।
- फोटो : AURAIYA
रबी फसल की बुआई का सीजन समाप्त होने को है, लेकिन भोगनीपुर प्रखंड निचली गंग नहर में पिछले तीन माह से धूल उड़ रही है। इससे नहर के किनारे के सैकड़ों एकड़ जमीन के किसान प्राइवेट नलकूपों से महंगी सिंचाई करने को विवश हो रहे हैं।
सिंचाई विभाग के अधिकारी नवंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर 15 दिसंबर के बीच में दो बार नहर में पानी आने के दावे कर चुके हैं। हर बार उनके दावे फेल साबित हुए हैं। इससे किसानों में प्रशासन के खिलाफ रोष है।
जिले के अनंतराम सीमा से लेकर गाजीपुर तक लगभग 27 किलोमीटर क्षेत्र से होकर भोगनीपुर प्रखंड निचली गंग नहर निकली है। सौ से अधिक गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन नहर के पानी से सिंचित होती है। पिछले तीन माह से नहर में धूल उड़ रही है।
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रबी की बुआई का समय 15 अक्तूबर से लेकर 15 दिसंबर के बीच होता है, लेकिन इन निर्धारित समय में नहर में पानी न आने से पलेवा व गेहूं की बुआई में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसानों को लंबे इंतजार के बाद थक हारकर प्राइवेट नलकूपों से महंगी सिंचाई कर गेहूं की बुआई करनी पड़ी।
जिन्होंने समय से गेहूं की बुआई कर दी है, उन्हें पानी की दरकार है, लेकिन अभी तक नहरें सूखी पड़ी हैं। थक-हारकर प्राइवेट नलकूपों से खेतों की सिंचाई करने को विवश हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पहले बताया था कि नवंबर के अंतिम सप्ताह तक पानी आ जाएगा।
फिर 15 दिसंबर तक नहर में पानी आने की बात कही थी, लेकिन तय समय गुजर जाने के बाद भी नहरों में धूल उड़ रही है। आसपास के गांवों के बच्चे सूखी पड़ी नहर में खेलते देखे जा सकते हैं। नहरों की सफाई के नाम पर भी महज खानापूर्ति की जा रही है।
रोस्टर लखनऊ से तैयार होता है। नरौरा बांध में मरम्मत के चलते पानी आने में कुछ विलंब हुआ है। नहरों की सफाई का काम भी अंतिम चरण में है। 27 दिसंबर तक नहरों में पानी आने की संभावना है। -हरेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, भोगनीपुर प्रखंड निचली गंग नहर
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सिंचाई विभाग के अधिकारी नवंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर 15 दिसंबर के बीच में दो बार नहर में पानी आने के दावे कर चुके हैं। हर बार उनके दावे फेल साबित हुए हैं। इससे किसानों में प्रशासन के खिलाफ रोष है।
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जिले के अनंतराम सीमा से लेकर गाजीपुर तक लगभग 27 किलोमीटर क्षेत्र से होकर भोगनीपुर प्रखंड निचली गंग नहर निकली है। सौ से अधिक गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन नहर के पानी से सिंचित होती है। पिछले तीन माह से नहर में धूल उड़ रही है।
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रबी की बुआई का समय 15 अक्तूबर से लेकर 15 दिसंबर के बीच होता है, लेकिन इन निर्धारित समय में नहर में पानी न आने से पलेवा व गेहूं की बुआई में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। किसानों को लंबे इंतजार के बाद थक हारकर प्राइवेट नलकूपों से महंगी सिंचाई कर गेहूं की बुआई करनी पड़ी।
जिन्होंने समय से गेहूं की बुआई कर दी है, उन्हें पानी की दरकार है, लेकिन अभी तक नहरें सूखी पड़ी हैं। थक-हारकर प्राइवेट नलकूपों से खेतों की सिंचाई करने को विवश हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पहले बताया था कि नवंबर के अंतिम सप्ताह तक पानी आ जाएगा।
फिर 15 दिसंबर तक नहर में पानी आने की बात कही थी, लेकिन तय समय गुजर जाने के बाद भी नहरों में धूल उड़ रही है। आसपास के गांवों के बच्चे सूखी पड़ी नहर में खेलते देखे जा सकते हैं। नहरों की सफाई के नाम पर भी महज खानापूर्ति की जा रही है।
रोस्टर लखनऊ से तैयार होता है। नरौरा बांध में मरम्मत के चलते पानी आने में कुछ विलंब हुआ है। नहरों की सफाई का काम भी अंतिम चरण में है। 27 दिसंबर तक नहरों में पानी आने की संभावना है। -हरेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, भोगनीपुर प्रखंड निचली गंग नहर