{"_id":"6a11f2f149abe2889c077f1b","slug":"accused-of-pouring-kerosene-and-burning-acquitted-auraiya-news-c-211-1-aur1009-145405-2026-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: मिट्टी का तेल डालकर जलाने के आरोपी दोषमुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: मिट्टी का तेल डालकर जलाने के आरोपी दोषमुक्त
Sun, 24 May 2026 12:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 24 May 2026 12:03 AM IST
विज्ञापन
औरैया। आग से जलाकर हत्या करने के आरोपियों प्रहलाद, हरिकेश और भूरे को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम पारुल जैन ने दोषमुक्त कर दिया।
अछल्दा थाना क्षेत्र में 12 साल पुराने मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका।
घटन गांव इकघरा में 23 मई 2014 को हुई थी। वादी तेज सिंह ने आरोप लगाया था कि सरकारी राशन वितरण के कोटेदार कल्लू और अन्य लोगों के साथ उनके बेटे सूरज की रंजिश थी। आरोप था कि इसी रंजिश के चलते नामजदों ने उनके बेटे सूरज को पकड़कर पीटा और मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी, इससे इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
मामले की सुनवाई के दौरान पूरा मामला ही उलट गया। मृतक की मां ने न्यायालय के समक्ष प्रतिपरीक्षा के दौरान स्वीकार किया कि उसके पति ने गांव वालों के बहकावे में आकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके बेटे की मौत खुद को आग लगने से हुई थी, क्योंकि वह गांजा पीने का आदी था।
विज्ञापन
इसके अलावा, अभियोजन के अन्य गवाहों दुर्जन सिंह और धर्मेंद्र ने भी घटना का समर्थन नहीं किया। इन गवाहों ने भी अपने बयानों में अभियुक्तों को निर्दोष बताया। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य विरोधाभासी हैं और किसी भी स्तर पर यह साबित नहीं हो सका कि अभियुक्तों ने कोई अपराध किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संदेह के मामलों में निर्दोष को सजा दिलाने के बजाय उसे बरी करना अधिक न्यायोचित है। इस मामले में विचारण के दौरान मुख्य आरोपी कल्लू और सुधीर की मौत पहले ही हो चुकी थी। कोर्ट ने शेष अभियुक्तों प्रहलाद, हरिकेश और भूरे को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
विज्ञापन
अछल्दा थाना क्षेत्र में 12 साल पुराने मामले में शुक्रवार को फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका।
घटन गांव इकघरा में 23 मई 2014 को हुई थी। वादी तेज सिंह ने आरोप लगाया था कि सरकारी राशन वितरण के कोटेदार कल्लू और अन्य लोगों के साथ उनके बेटे सूरज की रंजिश थी। आरोप था कि इसी रंजिश के चलते नामजदों ने उनके बेटे सूरज को पकड़कर पीटा और मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी, इससे इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई के दौरान पूरा मामला ही उलट गया। मृतक की मां ने न्यायालय के समक्ष प्रतिपरीक्षा के दौरान स्वीकार किया कि उसके पति ने गांव वालों के बहकावे में आकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके बेटे की मौत खुद को आग लगने से हुई थी, क्योंकि वह गांजा पीने का आदी था।
विज्ञापन
इसके अलावा, अभियोजन के अन्य गवाहों दुर्जन सिंह और धर्मेंद्र ने भी घटना का समर्थन नहीं किया। इन गवाहों ने भी अपने बयानों में अभियुक्तों को निर्दोष बताया। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य विरोधाभासी हैं और किसी भी स्तर पर यह साबित नहीं हो सका कि अभियुक्तों ने कोई अपराध किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संदेह के मामलों में निर्दोष को सजा दिलाने के बजाय उसे बरी करना अधिक न्यायोचित है। इस मामले में विचारण के दौरान मुख्य आरोपी कल्लू और सुधीर की मौत पहले ही हो चुकी थी। कोर्ट ने शेष अभियुक्तों प्रहलाद, हरिकेश और भूरे को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।