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Auraiya News: पुलिस पर फायरिंग के आरोपियों को मिली जमानत
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औरैया। पुलिस पर जानलेवा हमला करने और तमंचे से फायरिंग करने के आरोप में जेल में बंद पुरुषोत्तम शुक्ला और गौतम शुक्ला को जिला एवं सत्र न्यायालय से राहत मिल गई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपियों की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर लीं। अदालत ने 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि का जमानतदार प्रस्तुत करने पर दोनों को रिहा करने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना नौ मई 2026 की रात की है। कोतवाली पुलिस सुरान बंबा पुलिया के पास संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार दो संदिग्धों को रोकने का इशारा किया गया। आरोप है कि भागने की नीयत से दोनों ने पुलिस टीम पर जान से मारने के इरादे से एक राउंड फायर कर दिया। पुलिस ने घेराबंदी कर पुरुषोत्तम शुक्ला और गौतम शुक्ला को मौके से पकड़ लिया।
पुलिस का दावा था कि आरोपियों के कब्जे से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद हुए थे। मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया गया था। दोनों आरोपी 10 मई से जेल में बंद थे। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। शनिवार को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने राहत का विरोध किया। दलील दी गई कि आरोपियों ने पुलिस फोर्स पर हमला किया और उनके पास से अवैध हथियार व कारतूस बरामद हुए हैं। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
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बचाव पक्ष ने कहानी को बताया फर्जी
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पुलिस की ओर से गढ़ी गई पूरी कहानी फर्जी है और आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। कथित घटना और बरामदगी का कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं है। फायरिंग की घटना में पुलिस पार्टी का कोई सदस्य चोटिल या घायल भी नहीं हुआ। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए आवश्यक जमानतनामा प्रस्तुत करने पर पुरुषोत्तम शुक्ला और गौतम शुक्ला को रिहा करने का आदेश दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना नौ मई 2026 की रात की है। कोतवाली पुलिस सुरान बंबा पुलिया के पास संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार दो संदिग्धों को रोकने का इशारा किया गया। आरोप है कि भागने की नीयत से दोनों ने पुलिस टीम पर जान से मारने के इरादे से एक राउंड फायर कर दिया। पुलिस ने घेराबंदी कर पुरुषोत्तम शुक्ला और गौतम शुक्ला को मौके से पकड़ लिया।
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पुलिस का दावा था कि आरोपियों के कब्जे से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद हुए थे। मुकदमा दर्ज कर दोनों को जेल भेज दिया गया था। दोनों आरोपी 10 मई से जेल में बंद थे। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। शनिवार को जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने राहत का विरोध किया। दलील दी गई कि आरोपियों ने पुलिस फोर्स पर हमला किया और उनके पास से अवैध हथियार व कारतूस बरामद हुए हैं। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
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बचाव पक्ष ने कहानी को बताया फर्जी
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पुलिस की ओर से गढ़ी गई पूरी कहानी फर्जी है और आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। कथित घटना और बरामदगी का कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं है। फायरिंग की घटना में पुलिस पार्टी का कोई सदस्य चोटिल या घायल भी नहीं हुआ। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए आवश्यक जमानतनामा प्रस्तुत करने पर पुरुषोत्तम शुक्ला और गौतम शुक्ला को रिहा करने का आदेश दिया।