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Auraiya News: हरिद्वार के लिए रवाना हुआ 50 कांवड़ियों का जत्था
Sat, 15 Jul 2023 12:04 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 15 Jul 2023 12:04 AM IST
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अजीतमल। कस्बा के मोहल्ला गांधीनगर स्थिति प्राचीन मेला स्थल से 50 शिवभक्त कांवड़ यात्रा के लिए हरिद्वार रवाना हुए। जिला पंचायत सदस्य सोनू सेंगर ने हरी झंडी दिखाते हुए सभी को रवाना किया। कस्बा के लोगों ने कावंड़ियों पर पुष्प वर्षा करते हुए उन्हें अंगवस्त्र भेंट किए।
डाक कांवड़ के लिए जा रहे भक्तों को अशोक कुमारी, शोभा भदौरिया और वसुंधरा दुबे ने तिलक कर यात्रा मनोरथपूर्ण होने की कामना की। बम बम भोले और हर हर महादेव के नारों के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान रहा। दो घंटे के कार्यक्रम के बाद हरिद्वार के लिए रवाना हो गए।
जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि कांवड़ लेकर तो प्रतिवर्ष भक्त जाते हैं, लेकिन डाक कांवड़ लेकर इस क्षेत्र में पहली बार भक्त निकले हैं। कावड़ लेकर जा रहे आशीष गुप्ता, आशीष तिवारी, सत्यपाल, हीरा नागर, छोटू दिवाकर, भानू दुबे आदि भक्तों ने बताया कि वह अजीतमल से रवाना होकर बाइक से हरिद्वार पहुंचेंगे।
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वहां हर की पौढ़ी से गंगाजल लेकर, पैदल चलते हुए एवं दौड़ते हुए वापस औरैया स्थित देवकली मंदिर पर पहुंचकर जलाभिषेक कर विराम लेंगे। इस दौरान अभय चौहान, सत्यपाल गुर्जर, राहुल दोहरे, आशीष गुप्ता, हीरा नागर, छोटू दिवाकर आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
ऐसा माना जाता है कि कांवड़िए कांवड़ लेकर लंबी यात्रा करने के दौरान बीच में विश्राम भी लेते हैं। लेकिन डाक कांवड़ लेकर चलने वाले कांवड़िए को बीच में विश्राम करने की अनुमति नहीं होती है। डाक कांवड़ में जब एक बार कांवड़ उठा ली जाती है तब बिना गंतव्य तक पहुंचे हुए, बीच में कहीं रुकती नहीं है। अगर लोग थक जाते है तो दूसरे कंधे पर कावण चलते में ही पहुंचती है। निश्चित समय सीमा के अंदर ही निर्धारित शिवालय में जलाभिषेक करना होता है। ऐसा माना जाता है यात्रा के दौरान कांवड़िये मूत्र-मल भी नहीं त्यागते हैं। अगर नियमों को कोई तोड़ता है तो यात्रा खंडित हो जाती है। आमतौर पर डाक कावंड़िए समूह में चलते हैं।
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डाक कांवड़ के लिए जा रहे भक्तों को अशोक कुमारी, शोभा भदौरिया और वसुंधरा दुबे ने तिलक कर यात्रा मनोरथपूर्ण होने की कामना की। बम बम भोले और हर हर महादेव के नारों के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान रहा। दो घंटे के कार्यक्रम के बाद हरिद्वार के लिए रवाना हो गए।
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जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि कांवड़ लेकर तो प्रतिवर्ष भक्त जाते हैं, लेकिन डाक कांवड़ लेकर इस क्षेत्र में पहली बार भक्त निकले हैं। कावड़ लेकर जा रहे आशीष गुप्ता, आशीष तिवारी, सत्यपाल, हीरा नागर, छोटू दिवाकर, भानू दुबे आदि भक्तों ने बताया कि वह अजीतमल से रवाना होकर बाइक से हरिद्वार पहुंचेंगे।
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वहां हर की पौढ़ी से गंगाजल लेकर, पैदल चलते हुए एवं दौड़ते हुए वापस औरैया स्थित देवकली मंदिर पर पहुंचकर जलाभिषेक कर विराम लेंगे। इस दौरान अभय चौहान, सत्यपाल गुर्जर, राहुल दोहरे, आशीष गुप्ता, हीरा नागर, छोटू दिवाकर आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
ऐसा माना जाता है कि कांवड़िए कांवड़ लेकर लंबी यात्रा करने के दौरान बीच में विश्राम भी लेते हैं। लेकिन डाक कांवड़ लेकर चलने वाले कांवड़िए को बीच में विश्राम करने की अनुमति नहीं होती है। डाक कांवड़ में जब एक बार कांवड़ उठा ली जाती है तब बिना गंतव्य तक पहुंचे हुए, बीच में कहीं रुकती नहीं है। अगर लोग थक जाते है तो दूसरे कंधे पर कावण चलते में ही पहुंचती है। निश्चित समय सीमा के अंदर ही निर्धारित शिवालय में जलाभिषेक करना होता है। ऐसा माना जाता है यात्रा के दौरान कांवड़िये मूत्र-मल भी नहीं त्यागते हैं। अगर नियमों को कोई तोड़ता है तो यात्रा खंडित हो जाती है। आमतौर पर डाक कावंड़िए समूह में चलते हैं।