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संयम को अपने जीवन में उताएं
Auraiya
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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औरैया। शहर में श्रीगोपाल इंटर कालेज और ब्रह्मनगर स्थित रानी भदौरिया स्कूल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान शनिवार को रुक्मिणी विवाह की लीला का वर्णन किया। इसके साथ भक्तों ने भगवान की झांकी के भी दर्शन किए।
शहर के मोहल्ला ब्रह्मनगर स्थित रानी भदौरिया स्कूल में आचार्य सतीश जी अवस्थी ने प्रवचन किया। इसमें उन्होेंने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों एवं नीतिशास्त्रो में संयम की महत्ता बताई गई है। कहा कि जो व्यक्ति संयमशील होता है, प्रभु की साधना में लीन रहता है। उससे मिलने के लिए प्रभु भी तत्पर हो उठते हैं। ऐसा व्यक्ति समाज में खूब मान सम्मान पाता है। संत तुकाराम भी ऐसे ही व्यक्ति थे। जब वह तन्मय होकर तानपुरे पर भगवान का संकीर्तन करते तो श्रोता मंत्रमुंध हो उठते थे। वह बीच बीच में इंद्रियाें पर संयम रखने तथा अहम भाव से ऊपर उठ कर भगवान की भक्ति करने की भी प्रेरणा दिया करते थे। राघोबा नामक व्यक्ति उनके संकीर्तन में प्रतिदिन भाग लिया करता था। अंदर ही अंदर वह उनसे ईर्ष्या भी रखता था। वह प्राय: कहा करता था कि संयम बरतने का उद्देश्य दूसरे के लिए होता है। एक दिन तुकाराम की गाय राघोबा के खेत में जा घुसी तथा खेत में उगी फ सल में कुछ को चर गई वह भागा भागा तुकाराम के घर पहुंचा उन्हेें गालियां देता हुआ बोला तू औरों को संदेश देता है और अपनी गायों को संयम में नही रख सकता संध्या समय कीर्तन शुरू हुआ तो संत तुकाराम ने देखा कि राघोबा नहीं आया तुकाराम उनके घर पहुंचे और बोले भइया गाय की गलती से नाराज होकर भगवान का संकीर्तन क्यों त्याग दिया। गाय की गलती के लिए मुझे क्षमा करो और संकीर्तन में चलो राघोबा समझ गए कि संत तुकाराम संयम की साक्षात मूर्ति हैं और वह उनके चरणाें में पड़ गया। यहां श्याम मुरारी त्रिपाठी, रामकिशोरी, अतुल आदि सहयोग दिया।
श्रीगोपाल इंटर कालेज में आयोजित भागवत कथा के दौरान आचार्य मनोज जी अवस्थी ने कहा धरती पर सुखों को पाने के लिए भगवान ने यहां जन्म लिया था। आज आचार्य ने रुक्मिणी विवाह की लीला का वर्णन करते हुए झांकी के दर्शन भी लोगों को कराए। इस दौरान गीतों पर श्रोता जमकर झूमे और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह का लुफ्त उठाया। इस कथा को सफल बनाने के लिए मुरलीधर विश्नोई, अशोक विश्नोई, विवेक कुमार विश्नोई, विनय कुमार विश्नोई, राम प्रवेश विश्नोई, कुसुम विश्नोई आदि मौजूद रहे।
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शहर के मोहल्ला ब्रह्मनगर स्थित रानी भदौरिया स्कूल में आचार्य सतीश जी अवस्थी ने प्रवचन किया। इसमें उन्होेंने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों एवं नीतिशास्त्रो में संयम की महत्ता बताई गई है। कहा कि जो व्यक्ति संयमशील होता है, प्रभु की साधना में लीन रहता है। उससे मिलने के लिए प्रभु भी तत्पर हो उठते हैं। ऐसा व्यक्ति समाज में खूब मान सम्मान पाता है। संत तुकाराम भी ऐसे ही व्यक्ति थे। जब वह तन्मय होकर तानपुरे पर भगवान का संकीर्तन करते तो श्रोता मंत्रमुंध हो उठते थे। वह बीच बीच में इंद्रियाें पर संयम रखने तथा अहम भाव से ऊपर उठ कर भगवान की भक्ति करने की भी प्रेरणा दिया करते थे। राघोबा नामक व्यक्ति उनके संकीर्तन में प्रतिदिन भाग लिया करता था। अंदर ही अंदर वह उनसे ईर्ष्या भी रखता था। वह प्राय: कहा करता था कि संयम बरतने का उद्देश्य दूसरे के लिए होता है। एक दिन तुकाराम की गाय राघोबा के खेत में जा घुसी तथा खेत में उगी फ सल में कुछ को चर गई वह भागा भागा तुकाराम के घर पहुंचा उन्हेें गालियां देता हुआ बोला तू औरों को संदेश देता है और अपनी गायों को संयम में नही रख सकता संध्या समय कीर्तन शुरू हुआ तो संत तुकाराम ने देखा कि राघोबा नहीं आया तुकाराम उनके घर पहुंचे और बोले भइया गाय की गलती से नाराज होकर भगवान का संकीर्तन क्यों त्याग दिया। गाय की गलती के लिए मुझे क्षमा करो और संकीर्तन में चलो राघोबा समझ गए कि संत तुकाराम संयम की साक्षात मूर्ति हैं और वह उनके चरणाें में पड़ गया। यहां श्याम मुरारी त्रिपाठी, रामकिशोरी, अतुल आदि सहयोग दिया।
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श्रीगोपाल इंटर कालेज में आयोजित भागवत कथा के दौरान आचार्य मनोज जी अवस्थी ने कहा धरती पर सुखों को पाने के लिए भगवान ने यहां जन्म लिया था। आज आचार्य ने रुक्मिणी विवाह की लीला का वर्णन करते हुए झांकी के दर्शन भी लोगों को कराए। इस दौरान गीतों पर श्रोता जमकर झूमे और भगवान श्रीकृष्ण के विवाह का लुफ्त उठाया। इस कथा को सफल बनाने के लिए मुरलीधर विश्नोई, अशोक विश्नोई, विवेक कुमार विश्नोई, विनय कुमार विश्नोई, राम प्रवेश विश्नोई, कुसुम विश्नोई आदि मौजूद रहे।
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