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एक महीने में खून की कमी से रेफर होते 80 रोगी
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औैरैया। ब्लड बैंक के संचालन में जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उदासीनता भारी पड़ रही है। महीने में औसतन 80 लोग खून की कमी से दूसरे जिलों को रेफर किए जाते हैं। खुद स्वास्थ्य अधिकारी मानते हैं कि शहर के प्राइवेट और दो सरकारी अस्पतालों से रेफर होने वाले मरीजों की संख्या कई बार सौ को पार कर जाती है।
छह साल पहले 50 शैय्या अस्पताल में शुरू हुआ ब्लड बैंक पैथालॉजिस्ट के स्थानांतरण के बाद बंद हो गया। तब से लेकर आज तक उसकी शुरुआत नहीं की जा सकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 50 शैय्या जिला अस्पताल और चिचौली स्थित 100 शैय्या अस्पताल के अलावा शहर के प्राइवेट अस्पतालों समेत हर महीने रेफर होने वाले मरीजों की संख्या एक सैकड़ा के पार रहती है। दो सरकारी अस्पतालों में जुलाई माह में रेफर हुए गंभीर रोगियों की संख्या एक सैकड़ा के पार रही है। इसमें खून की कमी पाए जाने वाले उसकी पूर्ति न हो पाने पर उन्हें कानपुर व सैफई अस्पताल के लिए रेफर किया गया। ऐसे रोगियों की संख्या जुलाई माह में 80 रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार यह संख्या हर महीने 80 से 90 के बीच रहती है। जुलाई माह में रेफर होने वाले गंभीर मरीजों में अधिकांश मरीज गर्भवती महिलाओं और सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए लोग हैं।
पन्हर निवासी मनोज कुमार ने बताया कि जिले में मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। अधिकारी उनकी दिक्कतों को समझें और वह जिले में शीघ्र ब्लड बैंक की शुरुआत कराएं। ब्लड बैंक की शुरुआत होना जिले के लिए बहुत जरूरी है।
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व्यापारी धीरज दीक्षित ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले गंभीर रोगियों को जब बिना उपचार के रेफर कर दिया जाता है, तो ऐसे में उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसे रोगियों की मुश्किलों को कम करने के लिए ब्लड बैंक का शुरू होना बहुत जरूरी है।
आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि जिले में खून की कमी को पूरा करने के कोई इंतजाम नहीं है। जिस कारण जिले में सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में किसी तरह के आपरेशन नहीं हो रहे हैं। ब्लड बैंक की व्यवस्था होने पर ये व्यवस्थाएं भी जिले के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में शुरू हो सकेंगी।
कल्लू यादव ने बताया कि जिले के विकास और जिले में संचालित होने वालीं स्वास्थ्य योजनाओं के विकास के लिए ब्लड बैंक का संचालन कराया जाना जरूरी है। बताया कि ब्लड बैंक जिले के लिए अब बहुत जरूरी हो गया है।
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छह साल पहले 50 शैय्या अस्पताल में शुरू हुआ ब्लड बैंक पैथालॉजिस्ट के स्थानांतरण के बाद बंद हो गया। तब से लेकर आज तक उसकी शुरुआत नहीं की जा सकी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 50 शैय्या जिला अस्पताल और चिचौली स्थित 100 शैय्या अस्पताल के अलावा शहर के प्राइवेट अस्पतालों समेत हर महीने रेफर होने वाले मरीजों की संख्या एक सैकड़ा के पार रहती है। दो सरकारी अस्पतालों में जुलाई माह में रेफर हुए गंभीर रोगियों की संख्या एक सैकड़ा के पार रही है। इसमें खून की कमी पाए जाने वाले उसकी पूर्ति न हो पाने पर उन्हें कानपुर व सैफई अस्पताल के लिए रेफर किया गया। ऐसे रोगियों की संख्या जुलाई माह में 80 रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार यह संख्या हर महीने 80 से 90 के बीच रहती है। जुलाई माह में रेफर होने वाले गंभीर मरीजों में अधिकांश मरीज गर्भवती महिलाओं और सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए लोग हैं।
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पन्हर निवासी मनोज कुमार ने बताया कि जिले में मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। अधिकारी उनकी दिक्कतों को समझें और वह जिले में शीघ्र ब्लड बैंक की शुरुआत कराएं। ब्लड बैंक की शुरुआत होना जिले के लिए बहुत जरूरी है।
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व्यापारी धीरज दीक्षित ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले गंभीर रोगियों को जब बिना उपचार के रेफर कर दिया जाता है, तो ऐसे में उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसे रोगियों की मुश्किलों को कम करने के लिए ब्लड बैंक का शुरू होना बहुत जरूरी है।
आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि जिले में खून की कमी को पूरा करने के कोई इंतजाम नहीं है। जिस कारण जिले में सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में किसी तरह के आपरेशन नहीं हो रहे हैं। ब्लड बैंक की व्यवस्था होने पर ये व्यवस्थाएं भी जिले के सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में शुरू हो सकेंगी।
कल्लू यादव ने बताया कि जिले के विकास और जिले में संचालित होने वालीं स्वास्थ्य योजनाओं के विकास के लिए ब्लड बैंक का संचालन कराया जाना जरूरी है। बताया कि ब्लड बैंक जिले के लिए अब बहुत जरूरी हो गया है।