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10 दिन के अंतराल में दूसरी बार स्थगित हुई नगर पंचायत दिबियापुर की बजट बैठक
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दिबियापुर (औरैया)। नगर पंचायत दिबियापुर बोर्ड की बजट बैठक शुक्रवार को 10 दिन के अंतराल में दूसरी बार कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित करनी पड़ी। जहां एक कमरे में विधायक, चेयरमैन एवं पांच सभासद बैठे रहे वहीं दूसरे कमरे में नौ सभासद बैठे रहे। इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा। लगभग एक घंटे के इंतजार के बाद बोर्ड की बैठक स्थगित कर दी गई।
वर्ष 2019-20 के बजट पर चर्चा के लिए चार जून को नगर पंचायत दिबियापुर बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मात्र चार सभासदों के पहुंचने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई थी। दस दिन के अंतराल में 14 जून को अपराह्न साढ़े तीन बजे दोबारा बजट बैठक रखी गई। इस बार सभी सभासदों को डाक द्वारा बैठक की सूचना भेजी गई। निर्धारित समय पर सभी 15 में से 14 सभासद नगर पंचायत कार्यालय में पहुंच भी गए। पर नौ सभासद प्रमोद कुमार, प्रदीप कुमार, सचिन गुप्ता, रवि प्रकाश, सोनू यादव, राहुल दीक्षित, गीता देवी, रानी देवी, मालती देवी एक कमरे में बैठे रहे। जबकि दूसरे कमरे में विधायक लाखन सिंह राजपूत, चेयरमैन अरविंद पोरवाल, ईओ मोनिका उमराव, लिपिक नरेंद्र सिंह, 5 सभासद मधु गुप्ता, रेखा देवी, साधना, अखिलेश बाथम, रजत यादव बैठे रहे। ईओ मोनिका उमराव ने बताया कि बैठक स्थल पर सभासदों के न पहुंचने पर कोरम पूरा नहीं हुआ। इसलिए आज की बोर्ड बैठक भी स्थगित कर दी गई। इस दौरान एक कमरे में दिबियापुर थाने का पुलिस बल भी रहा।
दिबियापुर (औरैया)।15 में से 9 सभासदों ने कहा कि वे मीटिंग में ही सम्मिलित होने आए हैं। सभासद प्रमोद कुमार ने कहा कि वे लोग जिस कमरे में बैठे हैं। हर बार इसी कमरे में मीटिंग होती थी। वे लोग निर्धारित समय से पहले ही बैठक में पहुंच गए थे। पर कोई भी उन्हें बुलाने नहीं आया। फोर्स की मौजूदगी में मीटिंग होने पर भी आपत्ति जताई। सभासद राहुल दीक्षित ने कहा कि उन लोगों को बजट पास होने से पहले आय व्यय का ब्यौरा चाहिए। इसके लिए डीएम एवं एडीएम को रजिस्ट्री भी भेजी हैं। सभासद सोनू यादव ने कहा कि बोर्ड बैठक से पूर्व दिबियापुर में विकास के लिए हुए 5 करोड़ 30 लाख के टेंडर खोले जाएं। अगर नहीं खोले जाते तो उन्हें रद्द किया जाए। इसके साथ ही खरीदीं जा चुकीं एलईडी लाइटें नगर में लगाए जाने की मांग की।
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दिबियापुर (औरैया)। नगर पंचायत दिबियापुर ईओ मोनिका उमराव ने कहा कि विधायक लाखन सिंह के आने के बाद लिपिक नरेंद्र सिंह 3.15 से 4.30 बजे तक दो बार बुलाने गए। सभासदों ने अलग अलग बहाना करने आने से इंकार कर दिया। पुलिस फोर्स पॉलिथीन अभियान के लिए बुलाया गया था। अभियान चला और ढाई हजार रुपए वसूली भी हुई। धारा 99 से धारा 103 नगर पालिका एक्ट में बजट का प्रावधान है। इसमें प्रावधान है कि बजट को सदन के समक्ष रखा जाएगा। इसपर वहीं पर ही विचार विमर्श होगा। उसमें कहीं नहीं लिखा कि बजट पास होने से पहले ही घर ले जाने के लिए प्रतियां उपलब्ध कराईं जाएं। उनकी दिबियापुर में तैनाती से पूर्व नगर पंचायत जेई के डोंगल से 600 एलईडी लाइटें खरीदीं गईं थीं। अब जेई ने मना कर दिया कि उन्होंने लाइटें नहीं खरीदीं। इसपर हमने जांच के लिए डीएम को पत्र मिला। इसपर जांच चल रही है। आचार संहिता से पहले बोर्ड बैठक में विकास कार्यों के लिए टेंडर पास किए गए थे। 11 मार्च को टैंडर खुल जाते तो वर्क आर्डर जारी हो जाते। इसके पहले ही आचार संहिता लग गई थी। क्योंकि 31 मार्च तक का बजट पास था। 31 मार्च 2019 के बाद पुराने बजट पर काम नहीं कराया जा सकता। नया बजट पास होने के बाद ही टैंडर खोले जा सकेंगे। ई टेंडरिंग कर विधिक प्रक्रिया से टेंडर डलवाए गए थे। इसलिए निरस्त भी नहीं किए जा सकते।
नगर पंचायत अध्यक्ष अरविंद पोरवाल का कहना है कि सभासदों की कोई समस्या है तो सदन में आकर अपना पक्ष रखें और उनको संतुष्ट करने की जिम्मेदारी नगर पंचायत प्रशासन की है। बैठक का बहिष्कार किसी समस्या का समाधान नहीं है। नगर के विकास की जितनी जिम्मेदारी मेरी है, उतनी ही सभासदों की भी है।
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वर्ष 2019-20 के बजट पर चर्चा के लिए चार जून को नगर पंचायत दिबियापुर बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मात्र चार सभासदों के पहुंचने के कारण बैठक स्थगित कर दी गई थी। दस दिन के अंतराल में 14 जून को अपराह्न साढ़े तीन बजे दोबारा बजट बैठक रखी गई। इस बार सभी सभासदों को डाक द्वारा बैठक की सूचना भेजी गई। निर्धारित समय पर सभी 15 में से 14 सभासद नगर पंचायत कार्यालय में पहुंच भी गए। पर नौ सभासद प्रमोद कुमार, प्रदीप कुमार, सचिन गुप्ता, रवि प्रकाश, सोनू यादव, राहुल दीक्षित, गीता देवी, रानी देवी, मालती देवी एक कमरे में बैठे रहे। जबकि दूसरे कमरे में विधायक लाखन सिंह राजपूत, चेयरमैन अरविंद पोरवाल, ईओ मोनिका उमराव, लिपिक नरेंद्र सिंह, 5 सभासद मधु गुप्ता, रेखा देवी, साधना, अखिलेश बाथम, रजत यादव बैठे रहे। ईओ मोनिका उमराव ने बताया कि बैठक स्थल पर सभासदों के न पहुंचने पर कोरम पूरा नहीं हुआ। इसलिए आज की बोर्ड बैठक भी स्थगित कर दी गई। इस दौरान एक कमरे में दिबियापुर थाने का पुलिस बल भी रहा।
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दिबियापुर (औरैया)।15 में से 9 सभासदों ने कहा कि वे मीटिंग में ही सम्मिलित होने आए हैं। सभासद प्रमोद कुमार ने कहा कि वे लोग जिस कमरे में बैठे हैं। हर बार इसी कमरे में मीटिंग होती थी। वे लोग निर्धारित समय से पहले ही बैठक में पहुंच गए थे। पर कोई भी उन्हें बुलाने नहीं आया। फोर्स की मौजूदगी में मीटिंग होने पर भी आपत्ति जताई। सभासद राहुल दीक्षित ने कहा कि उन लोगों को बजट पास होने से पहले आय व्यय का ब्यौरा चाहिए। इसके लिए डीएम एवं एडीएम को रजिस्ट्री भी भेजी हैं। सभासद सोनू यादव ने कहा कि बोर्ड बैठक से पूर्व दिबियापुर में विकास के लिए हुए 5 करोड़ 30 लाख के टेंडर खोले जाएं। अगर नहीं खोले जाते तो उन्हें रद्द किया जाए। इसके साथ ही खरीदीं जा चुकीं एलईडी लाइटें नगर में लगाए जाने की मांग की।
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दिबियापुर (औरैया)। नगर पंचायत दिबियापुर ईओ मोनिका उमराव ने कहा कि विधायक लाखन सिंह के आने के बाद लिपिक नरेंद्र सिंह 3.15 से 4.30 बजे तक दो बार बुलाने गए। सभासदों ने अलग अलग बहाना करने आने से इंकार कर दिया। पुलिस फोर्स पॉलिथीन अभियान के लिए बुलाया गया था। अभियान चला और ढाई हजार रुपए वसूली भी हुई। धारा 99 से धारा 103 नगर पालिका एक्ट में बजट का प्रावधान है। इसमें प्रावधान है कि बजट को सदन के समक्ष रखा जाएगा। इसपर वहीं पर ही विचार विमर्श होगा। उसमें कहीं नहीं लिखा कि बजट पास होने से पहले ही घर ले जाने के लिए प्रतियां उपलब्ध कराईं जाएं। उनकी दिबियापुर में तैनाती से पूर्व नगर पंचायत जेई के डोंगल से 600 एलईडी लाइटें खरीदीं गईं थीं। अब जेई ने मना कर दिया कि उन्होंने लाइटें नहीं खरीदीं। इसपर हमने जांच के लिए डीएम को पत्र मिला। इसपर जांच चल रही है। आचार संहिता से पहले बोर्ड बैठक में विकास कार्यों के लिए टेंडर पास किए गए थे। 11 मार्च को टैंडर खुल जाते तो वर्क आर्डर जारी हो जाते। इसके पहले ही आचार संहिता लग गई थी। क्योंकि 31 मार्च तक का बजट पास था। 31 मार्च 2019 के बाद पुराने बजट पर काम नहीं कराया जा सकता। नया बजट पास होने के बाद ही टैंडर खोले जा सकेंगे। ई टेंडरिंग कर विधिक प्रक्रिया से टेंडर डलवाए गए थे। इसलिए निरस्त भी नहीं किए जा सकते।
नगर पंचायत अध्यक्ष अरविंद पोरवाल का कहना है कि सभासदों की कोई समस्या है तो सदन में आकर अपना पक्ष रखें और उनको संतुष्ट करने की जिम्मेदारी नगर पंचायत प्रशासन की है। बैठक का बहिष्कार किसी समस्या का समाधान नहीं है। नगर के विकास की जितनी जिम्मेदारी मेरी है, उतनी ही सभासदों की भी है।