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अमरोहा में उपेक्षा से पीपे का पुल बन गया खतरनाक, किसी तरह निकल रहे लोग
ब्यूरो/अमर उजाला,गजरौला।
Updated Fri, 06 Jul 2018 02:02 AM IST
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गजरौला में रामगंगा पोषक नहर के जर्जर पोंटून पुल से किसी तरह बाइक निकालता ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा के खादर में बसे दर्जनभर गांव का शहर से जुड़ने का पीपे का पुल ही एक जरिया है। इस पुल से गुजरने की राह भी आसान नहीं रही। पुल पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। जिस पर पैदल निकलना भी खतरे से खाली नही हैं लेकिन, यह हजारों लोगों की किस्मत में शामिल हो चुका है।
गजरौला से करीब 12 किलोमीटर दूर जाटोवाली, भुड्डीवाली, टिकोवाली, मंदिरवाली, दारानगर, शीशोवाली आदि गांव बसते हैं। चकनवाला गांव तक को संपर्क मार्ग ठीक है। चकनवाला से नीचे उतरते ही रामगंगा पोषक नहर पड़ती है। खादर के इन गांव में जाने के लिए रामगंगा पोषक नहर पर बने पैंटून पुल से गुजरना जरूरी है।
पुल की हालत ये हो चुकी है कि पीपे तो नहर में पड़े हुए हैं, लेकिन इनके ऊपर से तख्त गायब हो चुका है। ग्रामीणों ने किसी तरह पीपों को जोड़कर इसके ऊपर लकड़ी की बल्ली रख ली थी। जिससे किसी तरह से निकला जा सके। अब बीच बीच में ये लकड़ियां गायब हो चुुकी हैं। बाइक सवार भी पैदल ही निकलते हैं। रात में इस पुल से निकलने के लिए कल्पना भी नहीं की जा सकती। चार पहिया वाहन तो इस पुल से नहीं गुजर सकता है। अगर गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो ग्रामीणों को शेरपुर से होकर निकलना पड़ता है। जिसकी दूरी तीस किलोमीटर बैठती है।
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गजरौला से करीब 12 किलोमीटर दूर जाटोवाली, भुड्डीवाली, टिकोवाली, मंदिरवाली, दारानगर, शीशोवाली आदि गांव बसते हैं। चकनवाला गांव तक को संपर्क मार्ग ठीक है। चकनवाला से नीचे उतरते ही रामगंगा पोषक नहर पड़ती है। खादर के इन गांव में जाने के लिए रामगंगा पोषक नहर पर बने पैंटून पुल से गुजरना जरूरी है।
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पुल की हालत ये हो चुकी है कि पीपे तो नहर में पड़े हुए हैं, लेकिन इनके ऊपर से तख्त गायब हो चुका है। ग्रामीणों ने किसी तरह पीपों को जोड़कर इसके ऊपर लकड़ी की बल्ली रख ली थी। जिससे किसी तरह से निकला जा सके। अब बीच बीच में ये लकड़ियां गायब हो चुुकी हैं। बाइक सवार भी पैदल ही निकलते हैं। रात में इस पुल से निकलने के लिए कल्पना भी नहीं की जा सकती। चार पहिया वाहन तो इस पुल से नहीं गुजर सकता है। अगर गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो ग्रामीणों को शेरपुर से होकर निकलना पड़ता है। जिसकी दूरी तीस किलोमीटर बैठती है।
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