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Amroha News: ...तन्हा सिपाहे शाम जब घिर गया हुसैन
Fri, 04 Jul 2025 01:40 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 04 Jul 2025 01:40 AM IST
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अमरोहा।
शोहदा-ए-कर्बला की याद में सात मोहर्रम का मातमी जुलूस अजाखाना कटरा गुलाम अली से बरामद हुआ। जुलूस में सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। अराईश की खासियत यह थी कि हर तख्त पर ऊंची छतरी का साया था। जुलूस की समाप्ति पर मरसिया...तन्हा सिपाहे शाम जब घिर गया हुसैन पढ़ा गया। वहीं, मोहर्रम के जुलूस का हिंदू परिवारों ने भी स्वागत कर एकता और सौहार्द की मिसाल पेश की।
जुलूस में चांदी का झूला भी शामिल था, जो हजरत इमाम हुसैन के काफिले में उनके छह माह के बेटे हजरत अली असगर की मासूम शहादत की याद ताजा कर रहा था। मैदाने कर्बला में हुरमला ने अपने तीर से इमाम हुसैन के हाथों पर मासूम अली असगर को कत्ल कर दिया था। रौशन चौकियों को रंगबिरंगी कागज के फूलों से सजाया गया था। अराईश के पीछे शबीहे ताबूत और दुलुदल चल रहे थे।
सात मोहर्रम के जुलूस में शामिल दुलदुल पर खुबसूरत चादर, तलवार व तबर भी लगी हुई थी। हुसैनी बाजा बज रहा था, जिसके पीछे अजादाराने हुसैन, या हुसैन-या हुसैन कीं सदाएं बुलंद करते चल रहे थे। जुलूस की शुरुआत में मास्टर तबारक अली व हमनवा ने मरसिया पढ़ा। जुलूस तयशुदा रास्तों से होते हुए देर शाम अजाखाना कटरा गुलाम अली पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस की समाप्ति के बाद मरसिया...तन्हा सिपाहे शाम जब घिर गया हुसैन पढ़ा गया।
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अजादारों ने की सीनाजनी
नईम हैदर, वसीम हैदर, सलीम अम्रोहवी ने नौहा खानी की, जिसे सुनकर गमगीन अजादारों ने सीनाजनी की। जुलूस में डीएम द्वारा जुलूस अजा के लिए नामित अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी की ओर से समिति के सदस्य लियाकत अली, जिया एजाज, बाकर रजा नकवी, नदीम नकवी, कासिम जैदी आदि मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अंजुमन रजाकाराने हुसैनी ने किया।
हिंदुओं ने दुलदुल घोड़े को खिलाई चने की दाल
संचालन में रजाकारान काईद गुलाम सज्जाद, इमदाद आब्दी, जनरल सेक्रेटरी खुर्शीद हैदर जैदी, मो. तकी, डॉ. चंदन नकवी, रहे। हिंदू समाज के लोगों ने अपने परिवार के साथ मोहल्ला मंडी चौब में जुलूस का स्वागत किया। उन्होंने जुलूस में दुलदुल को चने की दाल खिलाई। अजादारों को शरबत पिला कर इमाम हुसैन से अपनी अकीदत का इजहार किया।
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शोहदा-ए-कर्बला की याद में सात मोहर्रम का मातमी जुलूस अजाखाना कटरा गुलाम अली से बरामद हुआ। जुलूस में सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। अराईश की खासियत यह थी कि हर तख्त पर ऊंची छतरी का साया था। जुलूस की समाप्ति पर मरसिया...तन्हा सिपाहे शाम जब घिर गया हुसैन पढ़ा गया। वहीं, मोहर्रम के जुलूस का हिंदू परिवारों ने भी स्वागत कर एकता और सौहार्द की मिसाल पेश की।
जुलूस में चांदी का झूला भी शामिल था, जो हजरत इमाम हुसैन के काफिले में उनके छह माह के बेटे हजरत अली असगर की मासूम शहादत की याद ताजा कर रहा था। मैदाने कर्बला में हुरमला ने अपने तीर से इमाम हुसैन के हाथों पर मासूम अली असगर को कत्ल कर दिया था। रौशन चौकियों को रंगबिरंगी कागज के फूलों से सजाया गया था। अराईश के पीछे शबीहे ताबूत और दुलुदल चल रहे थे।
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सात मोहर्रम के जुलूस में शामिल दुलदुल पर खुबसूरत चादर, तलवार व तबर भी लगी हुई थी। हुसैनी बाजा बज रहा था, जिसके पीछे अजादाराने हुसैन, या हुसैन-या हुसैन कीं सदाएं बुलंद करते चल रहे थे। जुलूस की शुरुआत में मास्टर तबारक अली व हमनवा ने मरसिया पढ़ा। जुलूस तयशुदा रास्तों से होते हुए देर शाम अजाखाना कटरा गुलाम अली पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस की समाप्ति के बाद मरसिया...तन्हा सिपाहे शाम जब घिर गया हुसैन पढ़ा गया।
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अजादारों ने की सीनाजनी
नईम हैदर, वसीम हैदर, सलीम अम्रोहवी ने नौहा खानी की, जिसे सुनकर गमगीन अजादारों ने सीनाजनी की। जुलूस में डीएम द्वारा जुलूस अजा के लिए नामित अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी की ओर से समिति के सदस्य लियाकत अली, जिया एजाज, बाकर रजा नकवी, नदीम नकवी, कासिम जैदी आदि मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अंजुमन रजाकाराने हुसैनी ने किया।
हिंदुओं ने दुलदुल घोड़े को खिलाई चने की दाल
संचालन में रजाकारान काईद गुलाम सज्जाद, इमदाद आब्दी, जनरल सेक्रेटरी खुर्शीद हैदर जैदी, मो. तकी, डॉ. चंदन नकवी, रहे। हिंदू समाज के लोगों ने अपने परिवार के साथ मोहल्ला मंडी चौब में जुलूस का स्वागत किया। उन्होंने जुलूस में दुलदुल को चने की दाल खिलाई। अजादारों को शरबत पिला कर इमाम हुसैन से अपनी अकीदत का इजहार किया।