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‘‘रुख हवाओं का बदलना भी हमें आता है, काईद-ए-वक्त हैं जीने का हुनर रखते हैं’’
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अमरोहा के मोहल्ला अली नगर में आयोजित महफिल में कमाल पेश करते शायर। संवाद
- फोटो : JPNAGAR
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अमरोहा। इंडियन कल्चरल सोसाइटी के सौजन्य से ऑल इंडिया मुशायरे में शायरों ने अपने-अपने कलाम पेश कर खूब दाद हासिल की।
शहर के मोहल्ला अली नगर स्थित गुलशन-ए-इकबाल में शुक्रवार रात ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित किया गया। मुशायरे का आगाज जिगर नौगांवी ने किया। मसरूर जौहर ने कहा...कोई तो हो जो दरीचे ताजा हवा के खोले, कोई तो हो जो कहे फिजा में घुटन बहुत है। डॉ मखमूर काकोरवी ने पढ़ा...बुजुर्गों की शमीम-ए-क्लब से ताजीम करता हूँ, जो विरसे में मिला है मैं उसे तकसीम करता हूं। शीबान कादरी ने ऐसे पढ़ा...महफिल में हम फकीरों की आएं न बादशाह, सूरज के मंदिरों में चिरागों का काम क्या। मयकश अमरोहवी ने कहा...अजीब शख्स है बेचैनियों में रहता है, मेरी तरफ से गलत फहमियों में रहता है। शाने हैदर बेबाक ने ऐसे कहा... अजब अंदाज के महबूब हैं अब, मुरव्वत नई, मोहब्बत नई, वफा नई। फरहत उल्लाह ने पढ़ा...तू सुखनवर है तो मगरूर न होना वरना, जितना शीराजा है लफ्जों का बिखर जाएगा। तारिक शेरकोटी ने कहा...रुख हवाओं का बदलना भी हमें आता है, काईद-ए-वक्त हैं जीने का हुनर रखते हैं।
मुशायरे में वाहिद अमरोहवी, पंडित भुवन अमरोहवी, लाडले रहबर,अहमद रजा फराज,अमीर अमरोहवी, सरताज अमरोहवी व फराज अर्शी ने भी कलाम पेश किया। अध्यक्षता सैय्यद मसरूर हसन जौहर ने की। संस्था के संस्थापक व महासचिव मयकश अमरोहवी, संयोजक कमाल हैदर कमाल व वजाहत अली नकवी ने सभी का आभार जताया। इस दौरान हबीब अहमद एडवोकेट, मखमूर काकोरवी, शाने हैदर बेबाक आदि मौजूद रहे।
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शहर के मोहल्ला अली नगर स्थित गुलशन-ए-इकबाल में शुक्रवार रात ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित किया गया। मुशायरे का आगाज जिगर नौगांवी ने किया। मसरूर जौहर ने कहा...कोई तो हो जो दरीचे ताजा हवा के खोले, कोई तो हो जो कहे फिजा में घुटन बहुत है। डॉ मखमूर काकोरवी ने पढ़ा...बुजुर्गों की शमीम-ए-क्लब से ताजीम करता हूँ, जो विरसे में मिला है मैं उसे तकसीम करता हूं। शीबान कादरी ने ऐसे पढ़ा...महफिल में हम फकीरों की आएं न बादशाह, सूरज के मंदिरों में चिरागों का काम क्या। मयकश अमरोहवी ने कहा...अजीब शख्स है बेचैनियों में रहता है, मेरी तरफ से गलत फहमियों में रहता है। शाने हैदर बेबाक ने ऐसे कहा... अजब अंदाज के महबूब हैं अब, मुरव्वत नई, मोहब्बत नई, वफा नई। फरहत उल्लाह ने पढ़ा...तू सुखनवर है तो मगरूर न होना वरना, जितना शीराजा है लफ्जों का बिखर जाएगा। तारिक शेरकोटी ने कहा...रुख हवाओं का बदलना भी हमें आता है, काईद-ए-वक्त हैं जीने का हुनर रखते हैं।
मुशायरे में वाहिद अमरोहवी, पंडित भुवन अमरोहवी, लाडले रहबर,अहमद रजा फराज,अमीर अमरोहवी, सरताज अमरोहवी व फराज अर्शी ने भी कलाम पेश किया। अध्यक्षता सैय्यद मसरूर हसन जौहर ने की। संस्था के संस्थापक व महासचिव मयकश अमरोहवी, संयोजक कमाल हैदर कमाल व वजाहत अली नकवी ने सभी का आभार जताया। इस दौरान हबीब अहमद एडवोकेट, मखमूर काकोरवी, शाने हैदर बेबाक आदि मौजूद रहे।
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