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Amroha News: अमरोहा के शिया इमाम व शिक्षाविद मौलाना सियादत नकवी का इंतकाल
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अमरोहा। शहर के मशहूर शिया इमाम, शिक्षाविद और साहित्यकार मौलाना डॉ. सैय्यद मोहम्मद सियादत नकवी का सोमवार को 84 वर्ष की उम्र में इंतकाल हो गया। वह करीब दो सप्ताह से बीमार थे और दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में उपचार चल रहा था। देर रात करीब 10 बजे आईएम इंटर कॉलेज मैदान में उनकी नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। इसके बाद हुसैनी हॉल के पास उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। जनाजे में धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और शहर के बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
मौलाना सियादत नकवी का जन्म छह नवंबर 1942 को अमरोहा में हुआ था। वर्ष 1989 में पिता मौलाना सैय्यद मोहम्मद इबादत कलीम के इंतकाल के बाद उन्हें जामा मस्जिद अशरफ-उल-मसाजिद का इमाम-ए-जुमा व जमाअत बनाया गया। उन्होंने एएमयू से उर्दू में एमए के साथ अरबी और फारसी की डिग्रियां हासिल कीं और एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से पीएचडी की। वह जेएस हिंदू पीजी कॉलेज में सीनियर रीडर और उर्दू विभागाध्यक्ष रहे।
वर्ष 1995 में उन्होंने मौलाना मोहम्मद इबादत एजुकेशन सोसायटी की स्थापना की। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2009 में ईरान सरकार के अंतरराष्ट्रीय शहीद मतहरी अवॉर्ड और वर्ष 2000 में जिला प्रशासन के शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से धार्मिक, शैक्षिक और साहित्यिक जगत में शोक की लहर है।
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शिया शहर इमाम जनाब मौलाना मोहम्मद सियादत नकवी आलिम-ए-दीन, खुलूस और इल्मी शख्सियत के मालिक थे। उन्होंने अवाम को हर मोड़ पर सही रास्ता दिखाया। उनकी नसीहतों से लोग हमेशा रोशनी हासिल करते रहेंगे। जेएस हिंदू पीजी कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष के तौर पर भी वह छात्रों के बीच बेहद मकबूल रहे। परवरदिगार मरहूम की मगफिरत फरमाए, उन्हें आला मुकाम अता फरमाए।
- कुंवर दानिश अली, पूर्व सांसद अमरोहा
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मौलाना सियादत नकवी का जन्म छह नवंबर 1942 को अमरोहा में हुआ था। वर्ष 1989 में पिता मौलाना सैय्यद मोहम्मद इबादत कलीम के इंतकाल के बाद उन्हें जामा मस्जिद अशरफ-उल-मसाजिद का इमाम-ए-जुमा व जमाअत बनाया गया। उन्होंने एएमयू से उर्दू में एमए के साथ अरबी और फारसी की डिग्रियां हासिल कीं और एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से पीएचडी की। वह जेएस हिंदू पीजी कॉलेज में सीनियर रीडर और उर्दू विभागाध्यक्ष रहे।
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वर्ष 1995 में उन्होंने मौलाना मोहम्मद इबादत एजुकेशन सोसायटी की स्थापना की। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2009 में ईरान सरकार के अंतरराष्ट्रीय शहीद मतहरी अवॉर्ड और वर्ष 2000 में जिला प्रशासन के शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से धार्मिक, शैक्षिक और साहित्यिक जगत में शोक की लहर है।
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शिया शहर इमाम जनाब मौलाना मोहम्मद सियादत नकवी आलिम-ए-दीन, खुलूस और इल्मी शख्सियत के मालिक थे। उन्होंने अवाम को हर मोड़ पर सही रास्ता दिखाया। उनकी नसीहतों से लोग हमेशा रोशनी हासिल करते रहेंगे। जेएस हिंदू पीजी कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष के तौर पर भी वह छात्रों के बीच बेहद मकबूल रहे। परवरदिगार मरहूम की मगफिरत फरमाए, उन्हें आला मुकाम अता फरमाए।
- कुंवर दानिश अली, पूर्व सांसद अमरोहा