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Amroha News: नेपाल आपदा से अमरोहा की ढोलक पर पड़ी तगड़ी चोट, 50 से अधिक ऑर्डर रद्द
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अमरोहा। नेपाल में आई आपदा का असर अमरोहा के प्रसिद्ध ढोलक कारोबार पर पड़ा है। वहां बने हालात के कारण सिलीगुड़ी के निर्यातकों के माध्यम से नेपाल भेजे जाने वाले 50 से अधिक ऑर्डर निरस्त हो गए। इनमें करीब दो हजार ढोलक और छह हजार डमरू शामिल हैं। कारोबारियों के मुताबिक ऑर्डर रद्द होने से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
अमरोहा में छोटे-बड़े 300 से अधिक कारखाने और निर्माण इकाइयां ढोलक बनाती हैं। यहां की ढोलक, तबला और डमरू की मांग देश के अलावा सऊदी अरब, कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड और ईरान समेत कई देशों में है। हर साल करीब चार करोड़ रुपये की ढोलक निर्यात होने का अनुमान है। कांवड़ यात्रा, नवरात्र, दशहरा, दीपावली और मेलों का सीजन शुरू होने पर मांग बढ़ जाती है।
कारोबारियों के मुताबिक अमरोहा से नेपाल के लिए सीधा निर्यात नहीं होता। ढोलक और डमरू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के निर्यातकों के माध्यम से नेपाल भेजे जाते हैं। नेपाल में बाढ़ से कारोबार प्रभावित होने के कारण अमरोहा के कारोबारियों के ऑर्डर भी निरस्त हुए हैं।
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25 साल में बदली अमरोहा की ढोलक की पहचान
कारोबारियों का कहना है कि करीब 25 वर्ष पहले अमरोहा में बनने वाली ढोलक मुख्य रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में ही भेजी जाती थी। समय के साथ इसकी गुणवत्ता और मांग बढ़ी और अब अमरोहा की ढोलक अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही है। यही वजह है कि विदेशों के साथ पड़ोसी देशों में आने वाली किसी भी बड़ी आर्थिक या प्राकृतिक आपदा का असर यहां के कारीगरों और कारोबारियों तक भी पहुंच जाता है।
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दो साल में नेपाल गई ढोलक और डमरू की स्थिति
अमरोहा की प्रसिद्ध लकड़ी हस्तकला से तैयार ढोलक और डमरू की नेपाल में भी अच्छी मांग है। लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल के मुताबिक वर्ष 2025 में नेपाल से करीब 90 आर्डर मिले थे। इन आर्डरों के तहत यहां से करीब सात हजार ढोलक और 13 हजार डमरू की सप्लाई की गई। इससे पहले वर्ष 2024 में भी नेपाल से 83 आर्डर मिले थे। उस दौरान करीब 6,500 ढोलक और 11 हजार डमरू नेपाल भेजे गए थे।
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कारोबारी बोले....
नेपाल में जल प्रलय के कारण ढोलक कारोबार प्रभावित हुआ है। अमरोहा से बड़ी संख्या में ढोलक और डमरू नेपाल भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार मिले कई आर्डर भी कैंसिल हो गए हैं। नए आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। नवरात्र से पहले ढोलक की मांग आमतौर पर बढ़ जाती थी, लेकिन नेपाल में बने हालात के कारण कारोबारियों को इस बार नुकसान उठाना पड़ रहा है।
-राजीव कुमार प्रजापति, अध्यक्ष, ढोलक इंडस्ट्री एसोसिएशन
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अमरोहा से नेपाल के लिए ढोलक का सीधा निर्यात नहीं होता है। यहां से ढोलक और डमरू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में निर्यातकों के माध्यम से नेपाल भेजे जाते हैं। नेपाल में जल प्रलय के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर अमरोहा के कारोबार पर पड़ा है। अब तक 50 से अधिक ऑर्डर निरस्त हो चुके हैं। इनमें करीब दो हजार ढोलक और छह हजार डमरू नेपाल भेजे जाने थे। ऑर्डर रद्द होने से तैयार माल की बिक्री अटक गई है।
- दीपक अग्रवाल, अध्यक्ष, लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन
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अमरोहा में छोटे-बड़े 300 से अधिक कारखाने और निर्माण इकाइयां ढोलक बनाती हैं। यहां की ढोलक, तबला और डमरू की मांग देश के अलावा सऊदी अरब, कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड और ईरान समेत कई देशों में है। हर साल करीब चार करोड़ रुपये की ढोलक निर्यात होने का अनुमान है। कांवड़ यात्रा, नवरात्र, दशहरा, दीपावली और मेलों का सीजन शुरू होने पर मांग बढ़ जाती है।
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कारोबारियों के मुताबिक अमरोहा से नेपाल के लिए सीधा निर्यात नहीं होता। ढोलक और डमरू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के निर्यातकों के माध्यम से नेपाल भेजे जाते हैं। नेपाल में बाढ़ से कारोबार प्रभावित होने के कारण अमरोहा के कारोबारियों के ऑर्डर भी निरस्त हुए हैं।
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25 साल में बदली अमरोहा की ढोलक की पहचान
कारोबारियों का कहना है कि करीब 25 वर्ष पहले अमरोहा में बनने वाली ढोलक मुख्य रूप से देश के विभिन्न हिस्सों में ही भेजी जाती थी। समय के साथ इसकी गुणवत्ता और मांग बढ़ी और अब अमरोहा की ढोलक अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही है। यही वजह है कि विदेशों के साथ पड़ोसी देशों में आने वाली किसी भी बड़ी आर्थिक या प्राकृतिक आपदा का असर यहां के कारीगरों और कारोबारियों तक भी पहुंच जाता है।
दो साल में नेपाल गई ढोलक और डमरू की स्थिति
अमरोहा की प्रसिद्ध लकड़ी हस्तकला से तैयार ढोलक और डमरू की नेपाल में भी अच्छी मांग है। लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल के मुताबिक वर्ष 2025 में नेपाल से करीब 90 आर्डर मिले थे। इन आर्डरों के तहत यहां से करीब सात हजार ढोलक और 13 हजार डमरू की सप्लाई की गई। इससे पहले वर्ष 2024 में भी नेपाल से 83 आर्डर मिले थे। उस दौरान करीब 6,500 ढोलक और 11 हजार डमरू नेपाल भेजे गए थे।
कारोबारी बोले....
नेपाल में जल प्रलय के कारण ढोलक कारोबार प्रभावित हुआ है। अमरोहा से बड़ी संख्या में ढोलक और डमरू नेपाल भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार मिले कई आर्डर भी कैंसिल हो गए हैं। नए आर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। नवरात्र से पहले ढोलक की मांग आमतौर पर बढ़ जाती थी, लेकिन नेपाल में बने हालात के कारण कारोबारियों को इस बार नुकसान उठाना पड़ रहा है।
-राजीव कुमार प्रजापति, अध्यक्ष, ढोलक इंडस्ट्री एसोसिएशन
अमरोहा से नेपाल के लिए ढोलक का सीधा निर्यात नहीं होता है। यहां से ढोलक और डमरू पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में निर्यातकों के माध्यम से नेपाल भेजे जाते हैं। नेपाल में जल प्रलय के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है, जिसका सीधा असर अमरोहा के कारोबार पर पड़ा है। अब तक 50 से अधिक ऑर्डर निरस्त हो चुके हैं। इनमें करीब दो हजार ढोलक और छह हजार डमरू नेपाल भेजे जाने थे। ऑर्डर रद्द होने से तैयार माल की बिक्री अटक गई है।
- दीपक अग्रवाल, अध्यक्ष, लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन