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जल संकट: पानी को तरस रहे तालाब और नदियां

Fri, 13 Apr 2018 01:43 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला/गजरौला। 
ब्यूरो अमर उजाला/गजरौला।  Updated Fri, 13 Apr 2018 01:43 AM IST
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Water crisis: Rivers and ponds are need to water
गजरौला खेड़की खादर स्थित तालाब में पानी की एक बूंद तक नहीं है। - फोटो : अमर उजाला
क्षेत्र के लोग जल संकट की विषम परिस्थिति से गुजर रहे हैं। तालाब-नदियां पानी के लिए तरस रहे हैं। क्षेत्र के गांव खेड़की खादर में कभी दस तालाब हुआ करते थे, लेकिन आज पांच तालाबों का अस्तित्व मिट चुका है। वर्तमान में शेष पांच तालाब मौके पर हैं। लेकिन पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं।              
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गंगा खादर क्षेत्र में भूमिगत पानी का जलस्तर एक दशक पूर्व पांच से दस फीट गहरा हुआ करता था, लेकिन जल की अंधाधुंध बर्बादी और जलाशयों के संरक्षण के अभाव में भूमिगत जल का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। बात गांव खेड़की खादर की करें तो यहां पिछले एक दशक में चालीस फीट जलस्तर नीचे खिसक गया। अब यदि कोई अपने घर में हैंडपंप या सबमर्सिबल कराता है तो उसे चालीस-पचास फीट गहराई करानी पड़ती है। मंगलवार को तालाबों की हकीकत जानने अमर उजाला की टीम जब गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने बताया कि एक दशक पूर्व खेड़की खादर गांव में दस तालाब हुआ करते थे। जिनमें पानी पर्याप्त मात्रा में संरक्षित रहता था। ग्रामीण पशुओं को नहलाने अथवा तालाब किनारे खेती की सिंचाई भी किया करते थे। लेकिन अब इस गांव में पांच तालाबों का अस्तित्व मिट चुका है। हालांकि राजस्व कागजों में आज भी गांव में तालाबों की संख्या दस के करीब है, लेकिन मौके पर केवल पांच ही तालाब हैं। जिनमें पानी की एक बूंद भी नहीं है और भूमिगत जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। यह बहुत ही चिंताजनक है कि ग्रामीण पशुओं को नहलाने अथवा पानी पिलाने के लिए सबमर्सिबल का प्रयोग कर रहे हैं। पानी को बर्बाद किया जा रहा है, लेकिन इस तरफ किसी कोई ध्यान नहीं है। गांव खेड़की खादर के ग्राम प्रधान लखपत सिंह से जब तालाब पर कब्जे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि तालाब पर कब्जे होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि जांच पड़ताल के बाद ही कुछ बताया जा सकता है।
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