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Amroha News: पंचायत में एसडीएम के सामने ग्रामीणों का हंगामा, बिना कार्रवाई के लौटीं
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मंडी धनौरा (अमरोहा)।
गांव आजमपुर में चल रही चकबंदी की समस्या का समाधान निकालने के लिए बुलाई गई पंचायत में ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। इस पर पंचायत में पहुंचीं एसडीएम चंद्रकांता और चकबंदी अधिकारी बिना कार्रवाई करे ही वापस लौट गए। मौके पर ही ग्रामीणों के दो गुट आमने-सामने आ गए। गांव के ही कुछ जिम्मेदार लोगों ने स्थिति संभाली और मामला शांत कराया।
आजमपुर गांव में चल रही चकबंदी को लेकर काफी समय से विवाद चला आ रहा है। गांव आजमपुर और आशिकपुरा में 250 परिवारों को करीब 30 साल पहले पट्टे दिए गए थे। बाद में उन पट़्टों को निरस्त कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी विभाग ने ग्रामीणों की भूमि को झील के रूप में दर्ज कर दिया। इससे 250 परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा मंडराने लगा। इस वजह से आजमपुर क्षेत्र में चकबंदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। खादर क्षेत्र का इलाका होने के कारण दबंग लोगों पर भूमि पर अवैध कब्जे का भी आरोप है। कुछ लोग चकबंदी कराने तो कुछ लोग चकबंदी का विरोध करने लगे। इसमें किसान संगठन भी शामिल हो गए।
बुधवार को चकबंदी की समस्या का समाधान निकालने के लिए एसडीएम चंद्रकांता और चकबंदी अधिकारी आजमपुर गांव गए थे। वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। किसानों के दो संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। एसडीएम ने ग्रामीणों से चकबंदी कराने और नहीं कराने के लिए लिखित में राय देने के लिए कहा। एक पक्ष की ओर से वहां मौजूद महिलाओं ने हंगामा शुरू कर दिया। महिलाओं के हंगामा करता देख दूसरा पक्ष भी सामने आ गया। इस पर तनाव की स्थिति बन गई। मौके पर पुलिस को भी नहीं बुलाया गया था। ग्रामीणों के हंगामा करने के बाद एसडीएम और चकबंदी अधिकारी बिना कार्रवाई के ही चले गए। किसानों के संगठन भी आमने सामने की स्थिति में आ गए। गांव के ही कुछ जिम्मेदार लोगों ने स्थिति संभाली और मामला शांत कराया।
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गांव आजमपुर में चल रही चकबंदी की समस्या का समाधान निकालने के लिए बुलाई गई पंचायत में ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। इस पर पंचायत में पहुंचीं एसडीएम चंद्रकांता और चकबंदी अधिकारी बिना कार्रवाई करे ही वापस लौट गए। मौके पर ही ग्रामीणों के दो गुट आमने-सामने आ गए। गांव के ही कुछ जिम्मेदार लोगों ने स्थिति संभाली और मामला शांत कराया।
आजमपुर गांव में चल रही चकबंदी को लेकर काफी समय से विवाद चला आ रहा है। गांव आजमपुर और आशिकपुरा में 250 परिवारों को करीब 30 साल पहले पट्टे दिए गए थे। बाद में उन पट़्टों को निरस्त कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी विभाग ने ग्रामीणों की भूमि को झील के रूप में दर्ज कर दिया। इससे 250 परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा मंडराने लगा। इस वजह से आजमपुर क्षेत्र में चकबंदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी। खादर क्षेत्र का इलाका होने के कारण दबंग लोगों पर भूमि पर अवैध कब्जे का भी आरोप है। कुछ लोग चकबंदी कराने तो कुछ लोग चकबंदी का विरोध करने लगे। इसमें किसान संगठन भी शामिल हो गए।
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बुधवार को चकबंदी की समस्या का समाधान निकालने के लिए एसडीएम चंद्रकांता और चकबंदी अधिकारी आजमपुर गांव गए थे। वहां बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। किसानों के दो संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। एसडीएम ने ग्रामीणों से चकबंदी कराने और नहीं कराने के लिए लिखित में राय देने के लिए कहा। एक पक्ष की ओर से वहां मौजूद महिलाओं ने हंगामा शुरू कर दिया। महिलाओं के हंगामा करता देख दूसरा पक्ष भी सामने आ गया। इस पर तनाव की स्थिति बन गई। मौके पर पुलिस को भी नहीं बुलाया गया था। ग्रामीणों के हंगामा करने के बाद एसडीएम और चकबंदी अधिकारी बिना कार्रवाई के ही चले गए। किसानों के संगठन भी आमने सामने की स्थिति में आ गए। गांव के ही कुछ जिम्मेदार लोगों ने स्थिति संभाली और मामला शांत कराया।
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