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कच्ची शराब पीने से ग्रामीण की मौत, ग्राम प्रधान के फोन करने पर भी गांव में नहीं गए आबकारी निरीक्षक

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 09 Oct 2022 01:00 AM IST
सार

कच्ची शराब पीने से ग्रामीण की मौत, ग्राम प्रधान के फोन करने पर भी गांव में नहीं गए आबकारी निरीक्षकगजरौला (अमरोहा)।बारिश होने की बात कह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।ग्रामीणों का आरोप है कि कच्ची शराब बनाने वालों से पुलिस और आबकारी विभाग की खासी साठगांठ है।

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Villager dies due to drinking raw liquor, Excise inspector did not go to village even after calling village head

विस्तार

कच्ची शराब पीने से ग्रामीण की मौत, ग्राम प्रधान के फोन करने पर भी गांव में नहीं गए आबकारी निरीक्षक
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गजरौला (अमरोहा)। कच्ची शराब पी लेने से 50 वर्षीय ग्रामीण की मौत हो गई। ग्रामीणों ने आबकारी विभाग की टीम को सूचना दी, लेकिन गांव में नहीं गए। फोन पर ही ग्रामीणों से बात की। बारिश होने की बात कह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उधर मृतक के परिजनों ने दस बजे उसका गंगा किनारे अंतिम संस्कार कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि छह महीने में गांव में तीन लोगों की कच्ची शराब पी लेने से मौत हो चुकी है। सूचना देने के बावजूद पुलिस और आबकारी विभाग कच्ची शराब की बिक्री और सेवन को रोकने में नाकाम हैं।
मामला थाना क्षेत्र के एक गांव का है। ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने बताया कि गांव निवासी 50 वर्षीय ग्रामीण बीते काफी समय से शराब पीता था। शुक्रवार की शाम उसने गांव में ही कच्ची शराब पी। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन बाहर ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन ग्रामीणों ने उसे रोक दिया। रात दस बजे उसकी मौत हो गई। सुबह उन्होंने पुलिस को फोन किया। इसके बाद आबकारी निरीक्षक हसनपुर और आबकारी निरीक्षक मंडी धनौरा को फोन कर कच्ची शराब पी लेने से ग्रामीण की मौत की खबर दी। मगर न तो हसनपुर आबकारी निरीक्षक ने गांव में जाने की जहमत उठाई और न ही धनौरा आबकारी निरीक्षक ने ग्रामीण की मौत को गंभीरता से लिया। सुबह दस बजे के बाद परिजनों ने गंगा किनारे उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उधर आबकारी निरीक्षक हसनपुर गौतम कुमार सिंह का कहना है कि वह गांव में गए थे। किसी ने शराब पीने से मौत की बात नहीं की। लोग बीमारी से मौत की बात कह रहे थे।
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गांव में छह महीने में हो चुकी हैं
ग्राम प्रधान और ग्रामीणों के मुताबिक उनका गांव कच्ची शराब पीने के लिए बदनाम है। हालात यह हैं कि दिन में भी 20-25 लोग शराब के नशे में मिल जाएंगे। कई घरों में शराब की भट्ठी धधकती है। छह महीने में कच्ची शराब पी लेने से गांव में तीन लोगों की जान जा चुकी है। कई की हालत भी शराब का अधिक सेवन करने के कारण नाजुक हो गई है। ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शिकायत को पुलिस और आबकारी विभाग की टीम गंभीरता से नहीं ले रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कच्ची शराब बनाने वालों से पुलिस और आबकारी विभाग की खासी साठगांठ है। दबी जुबान में ग्रामीण यह भी आरोप लगा रहे हैं कि हर महीने शराब बनाने वालों से दस-दस हजार रुपये जाते हैं।
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