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तिरंगे का सहारा लेकर खुद को सुरक्षित कर रहे यूक्रेनी
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Ukrainians are protecting themselves with the help of tricolor
- फोटो : JPNAGAR
रूस के हमले के बाद खारकीव में फंसे गजरौला के सुल्तानपुर निवासी कैलाश राणा सकुशल घर पहुंच गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके हॉस्टल से आठ किलो मीटर दूर तक बम ब्लास्ट हुए। खारकीव पूरी तरह तहस-नहस हो चुका है। उन्होंने यूक्रेन में बीते अनुभव को साझा करते हुए बताया कि 48 घंटे का खौफनाक सफर कर पोलैंड पहुंचे थे। यहां बॉर्डर पर 12 घंटे पैदल सफर किया। बॉर्डर पर माइनस 5 डिग्री तापमान में छात्र बेहोश होकर गिर रहे थे। मंजर देख कर रूह कांप रही थी। उन्होंने कहा कि हमारे तिरंगे की ऊंची शान है, यूक्रेन में चालक टैक्सी, बस, कैब के आगे भारत का तिरंगा लगाकर सड़कों पर निकलते हैं।
कैलाश राणा ने बताया कि जब उन्होंने टैक्सी बुक की थी तो उन्हें झंडा लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। टैक्सी पर पहले से भारत का तिरंगा लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि खारकीव के हालात सबसे ज्यादा बिगड़े हुए हैं। वहां से निकलना नामुमकिन था, लेकिन मौत आना सुनिश्चित समझ कर होस्टल से निकल पड़े थे। इस दौरान एक हजार से अधिक छात्रों का झुंड था। खारकीव के स्टेशन से 48 घंटे का सफर कर पोलैंड से पहले एक स्टेशन पर उतरे थे। यहां से उन्होंने 12 घंटे का पैदल सफर तय कर बॉर्डर पार करके पोलैंड में दाखिल हुए। उन्होंने बताया कि वह पांच दिन पहले खारकीव से निकले थे।
पोलैंड बॉर्डर पर भीड़ के चलते बुरे हालात थे। यूक्रेनी सैनिक छात्रों को निकलने नहीं दे रहे थे। जबकि वह चाहते तो एक घंटे में हजारों छात्रों बॉर्डर पार कर सकते थे। लेकिन उन्होंने भारतीय छात्रों के साथ बुरा बर्ताव किया। माइनस 5 डिग्री टेंपरेचर के बीच छात्र ठंड में कांप रहे थे, कई छात्राएं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी थीं। बॉर्डर पर फंसे छात्रों ने भारतीय दूतावास को फोन कर यूक्रेली सैनिकों द्वारा परेशान किए जाने की जानकारी दी। जिसके बाद यूक्रेनी सैनिकों ने छात्रों को बॉर्डर पार कराया। कैलाश ने बताया शुक्रवार की रात उन्हें फ्लाइट मिली और शनिवार की सुबह करीब 6 बजे गाजियाबाद एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट से गाजियाबाद के डीएम ने उन्हें रिसीव किया और इनोवा कार से ब्रजघाट तक छोड़ा। साथ ही जिलाधिकारी के द्वारा उन्हें घर तक पहुंचने के लिए 500 किराए के लिए दिए है। कैलाश के मुताबिक घर लौटने के बाद बेहद खुशी मिल रही है। वहीं कैलाश को देखकर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
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यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस के फाइनल वर्ष की शिक्षा ग्रहण कर रहे गांव सुल्तानपुर निवासी कैलाश राणा शुक्रवार को अपने गांव पहुंच गया। गजरौला में भाजपाइयों ने उसका फूल माला डालकर स्वागत किया। कैलाश यूक्रेन के शहर खारकीव में रह था। पर रूस द्वारा किए जा रहे हमलों की वजह से लोग बंगर में छुपकर जान बचा रहे हैं। काफी नुकसान भी हो चुका है। कैलाश ने बताया कि भारत सरकार के गंगा मिशन के तहत उसे मदद मिली और वह फ्लाइट के माध्यम से शनिवार सुबह को हिंडन एयरपोर्ट पहुंचा। वहां से अपने गांव पहुंच गया। परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। गजरौला में स्वागत करने वालों में मंडल अध्यक्ष डॉ उत्तम सिंह प्रजापति, गजरौला ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र चौधरी, एससी मोर्चा जिला अध्यक्ष राम रतन सिंह जाटव, युवा मंडल अध्यक्ष रोहित चौहान, राजीव शुक्ला एडवोकेट आदि मौजूद रहे।
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कैलाश राणा ने बताया कि जब उन्होंने टैक्सी बुक की थी तो उन्हें झंडा लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। टैक्सी पर पहले से भारत का तिरंगा लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि खारकीव के हालात सबसे ज्यादा बिगड़े हुए हैं। वहां से निकलना नामुमकिन था, लेकिन मौत आना सुनिश्चित समझ कर होस्टल से निकल पड़े थे। इस दौरान एक हजार से अधिक छात्रों का झुंड था। खारकीव के स्टेशन से 48 घंटे का सफर कर पोलैंड से पहले एक स्टेशन पर उतरे थे। यहां से उन्होंने 12 घंटे का पैदल सफर तय कर बॉर्डर पार करके पोलैंड में दाखिल हुए। उन्होंने बताया कि वह पांच दिन पहले खारकीव से निकले थे।
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पोलैंड बॉर्डर पर भीड़ के चलते बुरे हालात थे। यूक्रेनी सैनिक छात्रों को निकलने नहीं दे रहे थे। जबकि वह चाहते तो एक घंटे में हजारों छात्रों बॉर्डर पार कर सकते थे। लेकिन उन्होंने भारतीय छात्रों के साथ बुरा बर्ताव किया। माइनस 5 डिग्री टेंपरेचर के बीच छात्र ठंड में कांप रहे थे, कई छात्राएं बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी थीं। बॉर्डर पर फंसे छात्रों ने भारतीय दूतावास को फोन कर यूक्रेली सैनिकों द्वारा परेशान किए जाने की जानकारी दी। जिसके बाद यूक्रेनी सैनिकों ने छात्रों को बॉर्डर पार कराया। कैलाश ने बताया शुक्रवार की रात उन्हें फ्लाइट मिली और शनिवार की सुबह करीब 6 बजे गाजियाबाद एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट से गाजियाबाद के डीएम ने उन्हें रिसीव किया और इनोवा कार से ब्रजघाट तक छोड़ा। साथ ही जिलाधिकारी के द्वारा उन्हें घर तक पहुंचने के लिए 500 किराए के लिए दिए है। कैलाश के मुताबिक घर लौटने के बाद बेहद खुशी मिल रही है। वहीं कैलाश को देखकर परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।
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यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस के फाइनल वर्ष की शिक्षा ग्रहण कर रहे गांव सुल्तानपुर निवासी कैलाश राणा शुक्रवार को अपने गांव पहुंच गया। गजरौला में भाजपाइयों ने उसका फूल माला डालकर स्वागत किया। कैलाश यूक्रेन के शहर खारकीव में रह था। पर रूस द्वारा किए जा रहे हमलों की वजह से लोग बंगर में छुपकर जान बचा रहे हैं। काफी नुकसान भी हो चुका है। कैलाश ने बताया कि भारत सरकार के गंगा मिशन के तहत उसे मदद मिली और वह फ्लाइट के माध्यम से शनिवार सुबह को हिंडन एयरपोर्ट पहुंचा। वहां से अपने गांव पहुंच गया। परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। गजरौला में स्वागत करने वालों में मंडल अध्यक्ष डॉ उत्तम सिंह प्रजापति, गजरौला ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र चौधरी, एससी मोर्चा जिला अध्यक्ष राम रतन सिंह जाटव, युवा मंडल अध्यक्ष रोहित चौहान, राजीव शुक्ला एडवोकेट आदि मौजूद रहे।