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कलक्ट्रेट परिसर में दो किसान भाइयों ने पेट्रोल छिड़क कर आग लगाने की कोशिश की
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अमरोहा कलक्ट्रेट में डीएम को शिकायती पत्र देकर आता मुजफ्फरपुर पट्टी का परिवार। संवाद
- फोटो : JPNAGAR
अमरोहा। पत्नी और बच्चों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे दो किसान भाइयों ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की। घटना से अफरा-तफरी मच गई। दौड़कर पहुंचे कलक्ट्रेट कर्मचारियों ने दोनों भाइयों को सकुशल बचाया। आनन-फानन में पहुंचे एडीएम ने उनकी समस्या सुनी और जमीन की पैमाइश पर रोक लगवाई। घटना से प्रशासनिक अधिकारियों ने हड़कंप मचा रहा।
अमरोहा तहसील क्षेत्र की गांव मुजफ्फरपुर पट्टी में किसान जितेंद्र सिंह का परिवार रहता है। मंगलवार को जितेंद्र अपने बेटे दिवाकर सिंह व सुधाकर सिंह और उनकी पत्नी और बच्चों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। यह उन्होंने डीएम कार्यालय में पत्र देकर बताया कि गांव में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। उनकी अधिकांश जमीन पक्की सड़क के फ्रंट पर स्थित है। जबकि एक अन्य परिवार की केवल 4 बीघा जमीन सड़क के फ्रंट पर है। लेकिन चकबंदी अधिकारियों-कर्मचारियों ने सांठगांठ कर 4 बीघा जमीन के सापेक्ष दूसरे पक्ष का 35 बीघा जमीन का चक फ्रंट पर बना दिया। जबकि उनका चक सड़क से हटाकर पीछे पहुंचा दिया। यह मामला संभल के एसओसी (चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी) न्यायालय में विचाराधीन है। बावजूद इसके अवैध रूप से पैमाइश करा कर सड़क किनारे की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है।
इधर, चकबंदी अधिकारी-कर्मचारी फिर जमीन की पैमाइश करने पहुंच गए। इसकी जानकारी मिलते ही किसान के परिवार ने चकबंदी अधिकारी कर्मचारी पर मिलीभगत का आरोप लगाए हंगामा किया। मामले को न्यायालय में विचाराधीन होने तक पैमाइश रुकवाने की मांग की।
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बताते हैं कि अधिकारियों ने किसानों की बात को गंभीरता से नहीं लिया। करीब तीन बजे सगे भाई दिवाकर सिंह और सुधाकर सिंह का गुस्सा भड़क गया। कलक्ट्रेट परिसर में खड़ी बाइक से पेट्रोल निकाल कर अपने ऊपर उलेड़ लिया और आग लगाने की कोशिश की। घटना देखकर कलक्ट्रेट कर्मचारियों में खलबली मच गई। दौड़कर पहुंचे कर्मचारियों ने दोनों किसानों को पकड़ लिया। सूचना मिलते ही एडीएम भगवान शरण मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसान भाइयों को समझा कर शांत किया। साथ ही एसओसी चकबंदी नितिन कुमार को पैमाइश रोकने के निर्देश दिए। फिलहाल जमीन की पैमाइश रुकने के बाद किसान का परिवार अपने घर लौट गया। किसानों ने जमीन पर अवैध कब्जा करने पर पूरे परिवार सहित कलक्ट्रेट परिसर में अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है।
मामले में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का फोन नहीं उठा। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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अमरोहा तहसील क्षेत्र की गांव मुजफ्फरपुर पट्टी में किसान जितेंद्र सिंह का परिवार रहता है। मंगलवार को जितेंद्र अपने बेटे दिवाकर सिंह व सुधाकर सिंह और उनकी पत्नी और बच्चों के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। यह उन्होंने डीएम कार्यालय में पत्र देकर बताया कि गांव में चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। उनकी अधिकांश जमीन पक्की सड़क के फ्रंट पर स्थित है। जबकि एक अन्य परिवार की केवल 4 बीघा जमीन सड़क के फ्रंट पर है। लेकिन चकबंदी अधिकारियों-कर्मचारियों ने सांठगांठ कर 4 बीघा जमीन के सापेक्ष दूसरे पक्ष का 35 बीघा जमीन का चक फ्रंट पर बना दिया। जबकि उनका चक सड़क से हटाकर पीछे पहुंचा दिया। यह मामला संभल के एसओसी (चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी) न्यायालय में विचाराधीन है। बावजूद इसके अवैध रूप से पैमाइश करा कर सड़क किनारे की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है।
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इधर, चकबंदी अधिकारी-कर्मचारी फिर जमीन की पैमाइश करने पहुंच गए। इसकी जानकारी मिलते ही किसान के परिवार ने चकबंदी अधिकारी कर्मचारी पर मिलीभगत का आरोप लगाए हंगामा किया। मामले को न्यायालय में विचाराधीन होने तक पैमाइश रुकवाने की मांग की।
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बताते हैं कि अधिकारियों ने किसानों की बात को गंभीरता से नहीं लिया। करीब तीन बजे सगे भाई दिवाकर सिंह और सुधाकर सिंह का गुस्सा भड़क गया। कलक्ट्रेट परिसर में खड़ी बाइक से पेट्रोल निकाल कर अपने ऊपर उलेड़ लिया और आग लगाने की कोशिश की। घटना देखकर कलक्ट्रेट कर्मचारियों में खलबली मच गई। दौड़कर पहुंचे कर्मचारियों ने दोनों किसानों को पकड़ लिया। सूचना मिलते ही एडीएम भगवान शरण मौके पर पहुंच गए। उन्होंने किसान भाइयों को समझा कर शांत किया। साथ ही एसओसी चकबंदी नितिन कुमार को पैमाइश रोकने के निर्देश दिए। फिलहाल जमीन की पैमाइश रुकने के बाद किसान का परिवार अपने घर लौट गया। किसानों ने जमीन पर अवैध कब्जा करने पर पूरे परिवार सहित कलक्ट्रेट परिसर में अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है।
मामले में किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का फोन नहीं उठा। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।