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सीलिंग की भूमि पर हाउस टैक्स की रसीदें काटने वाले पालिका के दो बाबू, डीएम के निर्देश पर निलंबित
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गजरौला(अमरोहा)। सीलिंग की भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए भूखंड की रसीद काटने के मामले को डीएम उमेश मिश्र ने गंभीरता से लिया है। इस संबंध में उन्होंने पालिका के ईओ बिजेंद्र सिंह पाल से फोन पर नाराजगी जाहिर कर आरोपी बाबुओं को निलंबित करने के निर्देश दिए। ईओ ने पालिका के बाबू ललित कुमार और इरशाद अली को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
वहीं पालिका दफ्तर के पास ही स्थित गाटा संख्या 111 की भू मि पर दो दिन पूर्व की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद अब नया मोड़ आ गया है। डीएम द्वारा इस प्रकरण में दोषियों के खिलाफ एंटी भूमाफिया एक्ट में एफआईआर कराने की चेतावनी के बाद अब पालिका ने इस भूमि पर अपना अधिकार होने से हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं इस मामले में चौथे दिन भी किसी पर एफआईआर नहीं हो सकी।
रविवार की देर शाम ईओ बिजेंद्र सिंह पाल ने डीएम के निर्देश पर पालिका के दो बाबुओं को निलंबित करने की जानकारी दी। ईओ ने निलंबन पत्र में कहा है कि गाटा संख्या 111 का वाद सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद कुसुम देवी पत्नी देशराज एवं किरन देवी पत्नी दिनेश कुमार की संपत्ति कर का निर्धारण करते हुए रसीदें काट दी गईं। जो कि नियम विरुद्ध है। वहीं ईओ ने बताया कि पूर्व में तहसीलदार ने इस भूमि का चिन्हांकन किया था। इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर ही पालिका ने बुल्डोजर चलाकर सीलिंग की इस जमीन को कब्जामुक्त कराया था। स्टे आर्डर भी मिला हुआ है। ईओ ने बताया कि गाटा संख्या 111 की भूमि पालिका की नहीं है। अभी सरकार की ओर से इस भूमि का अधिकार किसी को नहीं दिया गया है। वहीं चर्चा है कि सीलिंग की भूमि का मौजूदा नक्शा भी किसी के पास नहीं है। इसके बावजूद वहां चिन्हांकन कर की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। वहीं बड़ा सवाल यह है कि जब भूमि सीलिंग की है और इस पर अभी कोर्ट ने कोई निर्णय भी नहीं दिया है तो फिर मंडी धनौरा तहसील के भूमि पर बेचे गए भूखंडों के दाखिल खारिज कैसे कर दिए गए? इस प्रकरण में एक लेखपाल पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। वहीं देर शाम डीएम उमेश मिश्र ने फिर दोहराया कि इस प्रकरण में किसी भी दोषी को वह नहीं बख्शेंगे। सख्त से सख्त कार्रवाई करेंगे। साथ ही इस प्रकरण में तहसील प्रशासन की भूमिका की जांच एडीएम को सौंपी गई है।
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वहीं पालिका दफ्तर के पास ही स्थित गाटा संख्या 111 की भू मि पर दो दिन पूर्व की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद अब नया मोड़ आ गया है। डीएम द्वारा इस प्रकरण में दोषियों के खिलाफ एंटी भूमाफिया एक्ट में एफआईआर कराने की चेतावनी के बाद अब पालिका ने इस भूमि पर अपना अधिकार होने से हाथ खड़े कर दिए हैं। वहीं इस मामले में चौथे दिन भी किसी पर एफआईआर नहीं हो सकी।
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रविवार की देर शाम ईओ बिजेंद्र सिंह पाल ने डीएम के निर्देश पर पालिका के दो बाबुओं को निलंबित करने की जानकारी दी। ईओ ने निलंबन पत्र में कहा है कि गाटा संख्या 111 का वाद सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद कुसुम देवी पत्नी देशराज एवं किरन देवी पत्नी दिनेश कुमार की संपत्ति कर का निर्धारण करते हुए रसीदें काट दी गईं। जो कि नियम विरुद्ध है। वहीं ईओ ने बताया कि पूर्व में तहसीलदार ने इस भूमि का चिन्हांकन किया था। इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर ही पालिका ने बुल्डोजर चलाकर सीलिंग की इस जमीन को कब्जामुक्त कराया था। स्टे आर्डर भी मिला हुआ है। ईओ ने बताया कि गाटा संख्या 111 की भूमि पालिका की नहीं है। अभी सरकार की ओर से इस भूमि का अधिकार किसी को नहीं दिया गया है। वहीं चर्चा है कि सीलिंग की भूमि का मौजूदा नक्शा भी किसी के पास नहीं है। इसके बावजूद वहां चिन्हांकन कर की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। वहीं बड़ा सवाल यह है कि जब भूमि सीलिंग की है और इस पर अभी कोर्ट ने कोई निर्णय भी नहीं दिया है तो फिर मंडी धनौरा तहसील के भूमि पर बेचे गए भूखंडों के दाखिल खारिज कैसे कर दिए गए? इस प्रकरण में एक लेखपाल पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। वहीं देर शाम डीएम उमेश मिश्र ने फिर दोहराया कि इस प्रकरण में किसी भी दोषी को वह नहीं बख्शेंगे। सख्त से सख्त कार्रवाई करेंगे। साथ ही इस प्रकरण में तहसील प्रशासन की भूमिका की जांच एडीएम को सौंपी गई है।
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