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Amroha News: जिन्हें डर से जीतना सीखाया...आज उन्हीं के खौफ से वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 01:40 AM IST
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Those whom I taught to overcome fear...today I am forced to live in an old age home due to their fear.
अमरोहा। जीवन में कितने ही कष्ट झेलते हुए बड़े ही अरमानों से अपने बेटों को पाला, कंधों पर बैठा कर मेले दिखाए। बचपन में जिनको डर से जीतना सिखाया, आज उन्हीं बेटों के डर से भयभीत दो पिता वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं। अपने घर की कहानी सुनाते हुए दोनों की ही आंखों से आंसू बह निकले। साथियों ने कंधे पर हाथ रख कर संभाला। बोले इससे अच्छा तो बेऔलाद होते तो खुश रहते। ऐसे ही दो वृद्ध महिलाओं ने भी अपने हालात सुनाए, कौन यहां रहना चाहता है, सबका मन अपने पोते-पोती के साथ रहने को करता है लेकिन मजबूरी में रहना पड़ रहा है।
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इन दिनों पितृ पक्ष में लोग पूर्वजों की याद में पकवान बनाकर कौवों को भोग लगा रहे हैं, लेकिन वृद्धाश्रमों में रह रहे इन माता-पिताओं का सवाल समाज के सामने खड़ा है। 80 वर्षीय एक बुजुर्ग ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। बड़े बेटे ने किसी तरह कुछ जमीन अपने नाम करा ली। अब दोनों अन्य बेटे भी जमीन अपने नाम कराने का दबाव बनाते हैं। तीनों के डर से वह चार माह से आश्रम में रह रहे हैं। आशंका है कि जमीन के लालच में कहीं बेटे उन्हें मार न दें। पोते-पोतियों के साथ खेलने की उम्र में आश्रम में रहने की बात कहते-कहते उनकी आंखें भर आईं।
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शहर निवासी 62 वर्षीय बुजुर्ग निजी शिक्षक रहे हैं। उन्होंने बच्चों को माता-पिता की सेवा की सीख दी, लेकिन अपने ही बेटे उनका घर नहीं संभाल सके। उन्होंने बताया कि तीन बेटों ने धोखे से जमीन बेच दी और घर से निकाल दिया। मारपीट के डर से आश्रम में रह रहे हैं। बोले, परिवार के साथ रहने का समय आया तो घर से दूर हो गए। उनकी भी आंखों से आंसू छलक पड़े। ऐसी दास्तान यहां रह रहे कई बुजुर्गों की है।
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पत्नी बेटों के साथ मिलकर पिटवाती है
एक 75 साल के बुजुर्ग ने कुछ अलग ही बताया कि उनकी पत्नी खुद अपने बेटों से मारपीट कराती है। बार-बार बेइज्जत होने से तो अच्छा है कि आश्रम में रहकर जीवन के बचे दिन गुजर जाएंगे।

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बेटे रखें भी तो बहू नहीं रहने देतीं

आश्रम में बुजुर्ग महिलाएं भी रह रही हैं। दोनों ही करीब 70 साल की हैं। बताया बेटा यह उम्र घर से दूर रहने की है बल्कि पोते-पोती के साथ खेलने की है। दोनों ही महिलाएं अमरोहा के आसपास की है। कहती हैं कि कौन रहना चाहता है, मजबूरी में रह रहे हैं। बेटे अगर रखना भी चाहे तो बहू नहीं रहने देती। हालांकि घर परिवार से मुलाकात हो जाती है।

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वृद्धाश्रम में मनाया अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस
श्याम ग्रामोद्योग संस्थान नंगला बादशाह छर्रा अलीगढ़ समाज कल्याण के सहयोग से आवासीय वृद्धाश्रम का संचालन करता है। वार्डन संध्या ने बताया कि इस आश्रम में 42 बुजुर्ग रहते हैं। जिसमें 16 महिलाएं और 26 पुरुष है। सबको सुबह नाश्ता और दोपहर और शाम को भोजन दिया जाता है। बृहस्पतिवार को समाज कल्याण की ओर से बुजुर्गों को फल और कपड़ों का वितरण किया गया। इस दौरान प्रदीप सक्सेना, शुभम आदि मौजूद रहे।
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