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Amroha News: भाई-बहन के रिश्ते के आगे टूटी मजहब की दीवार
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हसनपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन हसनपुर में हर साल गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश करता है। यहां मजहब की दीवारें भाई-बहन के रिश्ते के आगे छोटी पड़ जाती हैं। मोहल्ला कोट पश्चिमी पूठ रोड निवासी शाहजहां बेगम इस बार भी अपने मुंहबोले हिंदू भाई मुकेश गुप्ता की कलाई पर रक्षासूत्र बांधेंगी।
28 अगस्त को होने वाला यह रक्षाबंधन दोनों परिवारों के लिए खास होगा, क्योंकि यह सिलसिला लगातार 26वें वर्ष जारी रहेगा। पेशे से कपड़ा व्यापारी, भाजपा कार्यकर्ता और व्यापारी सुरक्षा फोरम के प्रदेश महासचिव मुकेश गुप्ता बताते हैं कि वर्ष 2000 में जब शाहजहां बेगम के सामने विकट परिस्थितियां आईं, तब उन्होंने भाई का फर्ज निभाते हुए उनका साथ दिया और हरसंभव मदद की। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच भाई-बहन का ऐसा रिश्ता बना, जो समय के साथ और मजबूत होता गया।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अली अहमद सैफी की पत्नी शाहजहां बेगम तभी से हर रक्षाबंधन पर मुकेश गुप्ता की कलाई पर राखी बांधती आ रही हैं। इस बार भी वह पूरे स्नेह के साथ भाई को राखी बांधेंगी, तिलक करेंगी और उनकी लंबी उम्र व खुशहाल जीवन की दुआ मांगेंगी। 26 वर्षों से निभाया जा रहा यह रिश्ता धार्मिक सौहार्द, आपसी विश्वास और भाईचारे की मिसाल बन गया है। शाहजहां और मुकेश का यह रिश्ता बताता है कि सच्चे रिश्ते धर्म और मजहब की सीमाओं से ऊपर होते हैं।
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28 अगस्त को होने वाला यह रक्षाबंधन दोनों परिवारों के लिए खास होगा, क्योंकि यह सिलसिला लगातार 26वें वर्ष जारी रहेगा। पेशे से कपड़ा व्यापारी, भाजपा कार्यकर्ता और व्यापारी सुरक्षा फोरम के प्रदेश महासचिव मुकेश गुप्ता बताते हैं कि वर्ष 2000 में जब शाहजहां बेगम के सामने विकट परिस्थितियां आईं, तब उन्होंने भाई का फर्ज निभाते हुए उनका साथ दिया और हरसंभव मदद की। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच भाई-बहन का ऐसा रिश्ता बना, जो समय के साथ और मजबूत होता गया।
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वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अली अहमद सैफी की पत्नी शाहजहां बेगम तभी से हर रक्षाबंधन पर मुकेश गुप्ता की कलाई पर राखी बांधती आ रही हैं। इस बार भी वह पूरे स्नेह के साथ भाई को राखी बांधेंगी, तिलक करेंगी और उनकी लंबी उम्र व खुशहाल जीवन की दुआ मांगेंगी। 26 वर्षों से निभाया जा रहा यह रिश्ता धार्मिक सौहार्द, आपसी विश्वास और भाईचारे की मिसाल बन गया है। शाहजहां और मुकेश का यह रिश्ता बताता है कि सच्चे रिश्ते धर्म और मजहब की सीमाओं से ऊपर होते हैं।
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