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दो विभागों की खींचतान में बंद हुआ टापू में बसे 11 गांवों का रास्ता
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दो सिंचाई विभाग और उत्तर प्रदेश सेतु निगम की आपसी खींचतान में गंगा और रामगंगा पोषक नहर के टापू में बसे 11 गांवों का रास्ता बंद कर दिया है। रामगंगा पोषक नहर में पानी छोड़ा जाने के बावजूद पैंटून चालू नहीं किया गया। सिंचाई विभाग का कहना है कि सेतु निगम द्वारा पिलर को भूमि में पहुंचाने के लिए खोदी गई मिट्टी का ढेर लगा होने के कारण पैंटून पुल को जोड़ने में दिक्कत सामने आ रही है, जबकि सेतु निगम के अधिकारी-कर्मचारी कहते हैं कि पैंटून पुल अस्थाई बनाया जाता है। दूसरी जगह पर अप्रोच मार्ग बनाकर पुल चालू करना चाहिए। दोनों की खींचतान में पैंटून पुल चालू नहीं होने के कारण ग्रामीण नावों से पार उतरने को मजबूर हैं।
मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के दर्जन भर गांव गंगा और रामगंगा पोषक नहर के टापू में बसे हैं। गांवों में बरसात के सीजन और बाढ़ के दौरान रास्ते बंद हो जाते हैं। नाव के जरिए ही ग्रामीण गजरौला, मंडी धनौरा और अन्य स्थानों को आते जाते हैं। बाढ़ का सीजन खत्म हो जाने के दो महीने बाद दिसंबर में रामगंगा पोषक नहर पर चकनवाला सामने हर साल पैंटून पुल चालू कर दिया जाता है। जिससे लोग ट्रैक्टर ट्राली आदि लेकर नहर को पार होते हैं। चीनी मिलों और क्रय केंद्रों पर अपना गन्ना आदि डालते हैं।
जून आखिरी सप्ताह में हर साल पैंटून पुल को हटा दिया जाता है। इसके बाद नाव का रास्ता रह जाता है। ग्रामीणों के आवागमन सुगम करने को मंडी धनौरा विधायक राजीव तराराके प्रयास से चकनवाला सामने रामगंगा पोषक नहर पर पक्का पुल बनाया जा रहाहै। जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश सेतु निगम कर रहा है। पुल के कई गोले ( पिलर ) का आधे से अधिक निर्माण हो गया है। इसी के बराबर में पैंटून पुल बनाया जा रहा है। उसके दोनों तरफ अप्रोच मार्ग भी बन गए हैं। सेतु निगम द्वारा पिलर को नीचे पहुंचाने के लिए भूमि को खोदकर लिए निकाली गई मिट्टी काटीला जैसा बन गया है, जो पैंटून पुल को चालू करने में रोड़ा बना है, जबकि इस समय नहर मेंपानी भी छोड़ दिया गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कहते हैं कि सेतु निगम अपना मलबा हटाए तो पुल को चालू कर दिया जाए। उधर सेतु निगम का कहना है कि पैंटून पुल अस्थाई बनाया जाता है। अगले सीजन में जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इस बार कहा गया था कि वह पक्के पुल से कुछ दूर पैंटून पुल बनाए, लेकिन सुनी नहीं।
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गजरौला। टापू में बसे शीशो वाली के ग्राम प्रधान हरपाल सिंह, चंद्रपाल सिंह, जाट वाली के देवेंद्र, टीका वाली के नानक सिंह, भुड्डी वाली निवासी झंगीर सिंह, दारानगर के डॉ.मंगत सिंह और चकनवाला निवासी महाश्य जयचंद्र सिंह, अमित बैंसला, राजवीर सिंह भाटी, श्रीपाल सिंह, अनिल भाटी, गौतम सिंह नागर का कहना है कि दो विभागों की खींचतान में परेशानी ग्रामीणों को झेलनी पड़ रही है। शीशो वाली, दारानगर, जाटों वाली, टीकों वाली, भुड्डी वाली, विशावली, रमपुरा, लंगड़े वाली, देवी वाली, लाला वाले घेर, सुल्तानपुर, ढाकों वाली गांवों के ग्रामीणों का रास्ता बंद हो गया है। बस नाव का ही रास्ता रह गया है, लेकिन नाव पर न तो गन्ना उतारा जा सकता और न ही अन्य कोई भारी सामान। जबकि इस समय गन्ने की छिलाई चल रही है। दूसरा रास्ता शेरपुर ढ्यौटी के सामने है। जहां कर आने जाने में 20 से 30 किमी का फेर अधिक लगता है। दो विभागों की खींचतान का खामियाजा उनको भुगतना पड़ रहा है।
यह कहते हैं सिंचाई विभाग के अधिकारी
सेतु निगम द्वारा बाह नाला पर पक्का पुल बनाया जा रहा है। पुल केलिए पिलर निर्माणको खोदी गई मिट्टी का ढेर लग गया है। जिसका टीला सा बन गया है। इसी के कारण पैंटून पुल चालू नहीं किया जा सका है, जबकि इस समय नहर में पानी भी आ गया है। लोगों का रास्ता बंद हो गया है-जयंती प्रसाद सुमन एसडीओ, सिंचाई खंड मुरादाबाद उपखंड द्वितीय अमरोहा।
पैंटून पुल अस्थाई बनाया जाता है। जहां पर पैंटून पुल बनता था, उसके अप्रोच मार्ग के सामने पक्का पुल बन रहा है। पैंटून पुल का अप्रोच मार्ग बनाए जाने से पहले सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों से कहा गया था कि वह कुछ दूर बनाएं। मगर उन्होंने अपना स्थान नहीं बदला। क्योंकि दूसरी जगह अप्रोच मार्ग बनाने पर उनको खर्च अधिक करना पड़ता।-संतोष कुमार यादव सहायक अभियंता सेतु निगम।
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मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के दर्जन भर गांव गंगा और रामगंगा पोषक नहर के टापू में बसे हैं। गांवों में बरसात के सीजन और बाढ़ के दौरान रास्ते बंद हो जाते हैं। नाव के जरिए ही ग्रामीण गजरौला, मंडी धनौरा और अन्य स्थानों को आते जाते हैं। बाढ़ का सीजन खत्म हो जाने के दो महीने बाद दिसंबर में रामगंगा पोषक नहर पर चकनवाला सामने हर साल पैंटून पुल चालू कर दिया जाता है। जिससे लोग ट्रैक्टर ट्राली आदि लेकर नहर को पार होते हैं। चीनी मिलों और क्रय केंद्रों पर अपना गन्ना आदि डालते हैं।
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जून आखिरी सप्ताह में हर साल पैंटून पुल को हटा दिया जाता है। इसके बाद नाव का रास्ता रह जाता है। ग्रामीणों के आवागमन सुगम करने को मंडी धनौरा विधायक राजीव तराराके प्रयास से चकनवाला सामने रामगंगा पोषक नहर पर पक्का पुल बनाया जा रहाहै। जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश सेतु निगम कर रहा है। पुल के कई गोले ( पिलर ) का आधे से अधिक निर्माण हो गया है। इसी के बराबर में पैंटून पुल बनाया जा रहा है। उसके दोनों तरफ अप्रोच मार्ग भी बन गए हैं। सेतु निगम द्वारा पिलर को नीचे पहुंचाने के लिए भूमि को खोदकर लिए निकाली गई मिट्टी काटीला जैसा बन गया है, जो पैंटून पुल को चालू करने में रोड़ा बना है, जबकि इस समय नहर मेंपानी भी छोड़ दिया गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कहते हैं कि सेतु निगम अपना मलबा हटाए तो पुल को चालू कर दिया जाए। उधर सेतु निगम का कहना है कि पैंटून पुल अस्थाई बनाया जाता है। अगले सीजन में जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इस बार कहा गया था कि वह पक्के पुल से कुछ दूर पैंटून पुल बनाए, लेकिन सुनी नहीं।
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गजरौला। टापू में बसे शीशो वाली के ग्राम प्रधान हरपाल सिंह, चंद्रपाल सिंह, जाट वाली के देवेंद्र, टीका वाली के नानक सिंह, भुड्डी वाली निवासी झंगीर सिंह, दारानगर के डॉ.मंगत सिंह और चकनवाला निवासी महाश्य जयचंद्र सिंह, अमित बैंसला, राजवीर सिंह भाटी, श्रीपाल सिंह, अनिल भाटी, गौतम सिंह नागर का कहना है कि दो विभागों की खींचतान में परेशानी ग्रामीणों को झेलनी पड़ रही है। शीशो वाली, दारानगर, जाटों वाली, टीकों वाली, भुड्डी वाली, विशावली, रमपुरा, लंगड़े वाली, देवी वाली, लाला वाले घेर, सुल्तानपुर, ढाकों वाली गांवों के ग्रामीणों का रास्ता बंद हो गया है। बस नाव का ही रास्ता रह गया है, लेकिन नाव पर न तो गन्ना उतारा जा सकता और न ही अन्य कोई भारी सामान। जबकि इस समय गन्ने की छिलाई चल रही है। दूसरा रास्ता शेरपुर ढ्यौटी के सामने है। जहां कर आने जाने में 20 से 30 किमी का फेर अधिक लगता है। दो विभागों की खींचतान का खामियाजा उनको भुगतना पड़ रहा है।
यह कहते हैं सिंचाई विभाग के अधिकारी
सेतु निगम द्वारा बाह नाला पर पक्का पुल बनाया जा रहा है। पुल केलिए पिलर निर्माणको खोदी गई मिट्टी का ढेर लग गया है। जिसका टीला सा बन गया है। इसी के कारण पैंटून पुल चालू नहीं किया जा सका है, जबकि इस समय नहर में पानी भी आ गया है। लोगों का रास्ता बंद हो गया है-जयंती प्रसाद सुमन एसडीओ, सिंचाई खंड मुरादाबाद उपखंड द्वितीय अमरोहा।
पैंटून पुल अस्थाई बनाया जाता है। जहां पर पैंटून पुल बनता था, उसके अप्रोच मार्ग के सामने पक्का पुल बन रहा है। पैंटून पुल का अप्रोच मार्ग बनाए जाने से पहले सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों से कहा गया था कि वह कुछ दूर बनाएं। मगर उन्होंने अपना स्थान नहीं बदला। क्योंकि दूसरी जगह अप्रोच मार्ग बनाने पर उनको खर्च अधिक करना पड़ता।-संतोष कुमार यादव सहायक अभियंता सेतु निगम।