{"_id":"6866e39c0cb0d882390170fd","slug":"the-mourners-made-themselves-bleed-by-mourning-the-knives-jpnagar-news-c-284-1-jpn1008-143003-2025-07-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: छुरियाें का मातम कर अजादारों ने खुद को किया लहूलुहान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: छुरियाें का मातम कर अजादारों ने खुद को किया लहूलुहान
Fri, 04 Jul 2025 01:40 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 04 Jul 2025 01:40 AM IST
विज्ञापन
नौगांवा सादात (अमरोहा)।
कस्बे में सात मोहर्रम का मातमी जुलूस अंजुमन यादगार-ए-हुसैनी के तत्वावधान में दोहरी गश्त के साथ बरामद हुआ। इमाम हुसैन की शहादत याद करते हुए अजादारों ने जंजीर से मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।
बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे जुलूस की शुरुआत कस्बे के मजहर-ए-कर्बला से हुई। मोहर्रम अली व हमनवां ने मर्सिया पेश किया। वहीं, नौहे ख्वानी की शुरुआत मरगूब हैदर व शमीम हैदर ने की। करीब दो सौ साल पुराना मर्सिया बानो ने रो-रो के ये शह से कहा, असगर-ए-मासूम को गश आ गया, सुनकर अजादार गमगीन हो गए। जुलूस में जुल्जनाह भी शामिल रहा। अलम मुबारक की तादाद भी अन्य जुलूसों के मुकाबले ज्यादा थी। जरी मुबारक के साथ ऊंट पर अमरियां सजी हुईं थीं।
जुलूस के मजहर-ए-कर्बला पहुंचने पर अयाज अब्बास ने रजा नौगांवी का मशहूर मर्सिया पढ़कर इमाम हुसैन को पुरसा पेश किया। अंजुमन की ओर से कर्बला की मंजरकशी भी पेश की जा रही थी। शोएब रजा व तकी अब्बास ने राकिम नौगांवी ने नौहे पढ़े। जुलूस के मेन बाजार पहुंचने पर अजादारों ने छुरियों व जंजीर के मातम से गमे हुसैन में खुद को लहूलुहान कर लिया।
विज्ञापन
इस दौरान बस्ती में या हुसैन-या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। दोहरी गश्त का यह जुलूस देर शाम इमाम बारगाह हसनैन पहुंचकर संपन्न हुआ। सुरक्षा को लेकर एसडीएम सुनीता सिंह, सीओ अवधभान भदौरिया व प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार पुलिस बल के साथ डटे रहे। जुलूस में चिकित्सकों की टीम भी शामिल रही। इस दौरान वक्कार हैदर, तनवीर इमाम, काशिफ नईम, मोहम्मद रजा, अली अशरफ आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कस्बे में सात मोहर्रम का मातमी जुलूस अंजुमन यादगार-ए-हुसैनी के तत्वावधान में दोहरी गश्त के साथ बरामद हुआ। इमाम हुसैन की शहादत याद करते हुए अजादारों ने जंजीर से मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया।
बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे जुलूस की शुरुआत कस्बे के मजहर-ए-कर्बला से हुई। मोहर्रम अली व हमनवां ने मर्सिया पेश किया। वहीं, नौहे ख्वानी की शुरुआत मरगूब हैदर व शमीम हैदर ने की। करीब दो सौ साल पुराना मर्सिया बानो ने रो-रो के ये शह से कहा, असगर-ए-मासूम को गश आ गया, सुनकर अजादार गमगीन हो गए। जुलूस में जुल्जनाह भी शामिल रहा। अलम मुबारक की तादाद भी अन्य जुलूसों के मुकाबले ज्यादा थी। जरी मुबारक के साथ ऊंट पर अमरियां सजी हुईं थीं।
विज्ञापन
जुलूस के मजहर-ए-कर्बला पहुंचने पर अयाज अब्बास ने रजा नौगांवी का मशहूर मर्सिया पढ़कर इमाम हुसैन को पुरसा पेश किया। अंजुमन की ओर से कर्बला की मंजरकशी भी पेश की जा रही थी। शोएब रजा व तकी अब्बास ने राकिम नौगांवी ने नौहे पढ़े। जुलूस के मेन बाजार पहुंचने पर अजादारों ने छुरियों व जंजीर के मातम से गमे हुसैन में खुद को लहूलुहान कर लिया।
विज्ञापन
इस दौरान बस्ती में या हुसैन-या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। दोहरी गश्त का यह जुलूस देर शाम इमाम बारगाह हसनैन पहुंचकर संपन्न हुआ। सुरक्षा को लेकर एसडीएम सुनीता सिंह, सीओ अवधभान भदौरिया व प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार पुलिस बल के साथ डटे रहे। जुलूस में चिकित्सकों की टीम भी शामिल रही। इस दौरान वक्कार हैदर, तनवीर इमाम, काशिफ नईम, मोहम्मद रजा, अली अशरफ आदि मौजूद रहे।