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Amroha News: बीमा कंपनी को देना होगा दो लाख रुपये का क्लेम
Sun, 10 May 2026 11:47 PM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 10 May 2026 11:47 PM IST
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अमरोहा। किसान की सड़क हादसे में मौत के बाद बीमा क्लेम देने से इन्कार करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को मृतक किसान के परिजनों को दो लाख रुपये की बीमा राशि नौ प्रतिशत ब्याज सहित देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न तथा वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये अलग से अदा करने होंगे।
गजरौला निवासी किसान सोमवीर का एक बैंक में बचत खाता था, जिसमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा पॉलिसी संचालित थी। 20 अगस्त 2019 को सड़क हादसे में सोमवीर की मौत हो गई थी। मामले में दिल्ली नंबर वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। मृतक के बेटे योगेश कुमार और बेटी दुर्गेश ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंक और बीमा कंपनी की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई। आरटीआई के जरिए जानकारी मांगने के बावजूद कंपनी ने जवाब नहीं दिया और 14 जुलाई 2020 को क्लेम निरस्त कर दिया। इसके बाद मृतक की पत्नी सावित्री देवी, बेटे बृजेश कुमार ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बैंक और बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब किया। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि एफआईआर, पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक दस्तावेज हैं और इन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा। आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी की ओर से मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेजों को विधिविरुद्ध मानते हुए बीमा कंपनी को बीमा राशि ब्याज समेत अदा करने के निर्देश दिए।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी को मृतक किसान के परिजनों को दो लाख रुपये की बीमा राशि नौ प्रतिशत ब्याज सहित देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न तथा वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये अलग से अदा करने होंगे।
गजरौला निवासी किसान सोमवीर का एक बैंक में बचत खाता था, जिसमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा पॉलिसी संचालित थी। 20 अगस्त 2019 को सड़क हादसे में सोमवीर की मौत हो गई थी। मामले में दिल्ली नंबर वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। मृतक के बेटे योगेश कुमार और बेटी दुर्गेश ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंक और बीमा कंपनी की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई। आरटीआई के जरिए जानकारी मांगने के बावजूद कंपनी ने जवाब नहीं दिया और 14 जुलाई 2020 को क्लेम निरस्त कर दिया। इसके बाद मृतक की पत्नी सावित्री देवी, बेटे बृजेश कुमार ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया।
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सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बैंक और बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब किया। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि एफआईआर, पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक दस्तावेज हैं और इन्हें साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाएगा। आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी की ओर से मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेजों को विधिविरुद्ध मानते हुए बीमा कंपनी को बीमा राशि ब्याज समेत अदा करने के निर्देश दिए।
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