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Amroha News: गंगा एक्सप्रेस-वे के ठेकेदारों ने खोद डाली नंदी अभ्यारण्य की जमीन
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ढबारसी(अमरोहा)। जिले में गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य चल रहा है। शासन का निर्देश था कि जनपदवार तालाबों-पोखरों से मिट्टी उठाकर हाईवे निर्माण की जरूरतों को पूरा किया जाएगा, लेकिन अमरोहा जिले में ऐसा नहीं हुआ। गंगा एक्सप्रेसवे के ठेकेदारों ने गंगेश्वरी ब्लॉक के गांव चंदनकोटा में नदी अभ्यारण्य केंद्र के लिए चिह्नित चरागाह की साढे 300 बीघा जमीन को खोद डाला। पिछले एक सप्ताह से लगातार मिट्टी उठाई जा रही है। ग्रामीणों का ये भी आरोप है कि इस संबंध में न तो कोई टेंडर हुआ है और न ही कोई मिट्टी उठाने के लिए शासनादेश है। ये सब स्थानीय स्तर पर अधिकारी और भाजपा नेताओं से सांठगांठ के बाद हो रहा है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत डीएम और मुख्यमंत्री पोर्टल पर की है। चन्दनकोटा गांव राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 367 में चरागाह भूमि दर्ज है। इस भूमि पर 60 लोगों ने पट्टे के नाम पर कब्जा कर रखा था। जिसके विरोध में वर्षों पहले ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए चरागाह की भूमि को कब्जा मुक्त कराने की मांग की थी। वर्ष 2019 में हाईकोर्ट के आदेश पर जमीन को राजस्व विभाग ने कब्जा मुक्त करा दिया। छुट्टा पशुओं से किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान पर जिला प्रशासन ने उक्त भूमि पर नंदी अभ्यारण्य केन्द्र की स्थापना करने का निर्णय लिया। नंदी अभ्यारण्य केन्द्र की स्थापना के लिए उक्त भूमि का मनरेगा द्वारा समतलीकरण कार्य कराया गया तथा भूमि की मेड़ बंदी करने के लिए चारों दिशाओं में 6 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। पशुओं को गर्मी से बचाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराए गए 52 सौ पौधों को अमृत वन महोत्सव के अन्तर्गत लगाए गए। मनरेगा द्वारा उक्त पौधों को लगाने के लिए मनरेगा द्वारा एक लाख 81 हजार रुपए का खर्चा भी दर्शाया गया।
सरकार द्वारा छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए उक्त नन्दी अभ्यारण्य केन्द्र का काम प्रगति पर था, लेकिन गंगा एक्सप्रेस वे के ठेकेदार की नजर उक्त खाली पड़ी जमीन पर पड़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील स्तर के अधिकारियों व ग्राम प्रधान से सांठगांठ करके चारागाह की 350 बीघा जमीन पर दो से तीन जेसीबी मशीनों द्वारा लगभग 40 डम्परों से खनन कार्य कई दिनों से 24 घंटे चल रहा है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की तो जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश जिला खनन अधिकारी को दिए। खनन अधिकारी ने मौके पर जाकर देखा तो खनन जारी था। बताया जाता है कि जिसके बाद खनन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। खनन अधिकारी की दी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए तहसीलदार हसनपुर को आदेश दिए जा चुके हैं। शिकायतकर्ता संदीप कुमार का कहना कि जनपद के अधिकारियों द्वारा खनन कार्य नहीं रुकवाया गया है। जिसके बाद मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई है।
ये है गंगा एक्सप्रेस वे के कार्य में भराव का नियम
-गंगा एक्सप्रेस वे निर्माण से जुड़े अधिकारियों द्वारा पंजीकृत फर्म को मिट्टी का भराव करने के लिए ठेका दिया जाता है। फर्म के ठेकेदार द्वारा भी मिट्टी की आपूर्ति करने के लिए दूसरी जगह भूमि का ठेका लिया जाता है। प्रशासन से अनुमति ली जाती है। लेकिन यहां नंदी अभ्यारण्य केंद्र की भूमि से मिट्टी का भराव नियम के अनुसार नहीं हो रहा।
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एक्सप्रेस वे लिए सरकार ने दी है छूट
ढबारसी। ग्राम पंचायत में स्थित तालाबों व पोखरों व नहरों की खोदाई कराकर मिट्टी उठाकर एक्सप्रेस- वे की जरूरतों को पूरा करने की सरकार ने छूट दे रखी है। लेकिन चारागाह की भूमि को मिट्टी खनन से अलग रखा गया है। चन्दनकोटा की चरागाह की भूमि उपजाऊ है। राजस्व विभाग द्वारा कब्जा मुक्त किए जाने से पूर्व में इस भूमि पर खेती की जाती थी। फसलों की सिंचाई के लिए तीन ट्यूबवेल लगे हुए हैं।
क्या बोलीं खनन अधिकारी
-जिला खनन अधिकारी रंजना सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी के आदेश पर मैंने खनन स्थल जाकर जांच की थी। विभाग की ओर चरागाह की भूमि में खनन करने की अनुमति नहीं दी गई है। मैंने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी है। शीघ्र ही खनन कार्य को बंद कराया जाएगा।
एसडीएम का बयान
-चरागाह और नंदी अभ्यारण केंद्र की भूमि से मिट्टी खोदवाकर गंगा एक्सप्रेस-वे की जरूरतों को पूरा किया जाने का मामला जानकारी में नहीं है। पूरे मामले की जांच कराने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
-- -- अशोक कुमार शर्मा, एसडीएम हसनपुर।
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सरकार द्वारा छुट्टा पशुओं को संरक्षित करने के लिए उक्त नन्दी अभ्यारण्य केन्द्र का काम प्रगति पर था, लेकिन गंगा एक्सप्रेस वे के ठेकेदार की नजर उक्त खाली पड़ी जमीन पर पड़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील स्तर के अधिकारियों व ग्राम प्रधान से सांठगांठ करके चारागाह की 350 बीघा जमीन पर दो से तीन जेसीबी मशीनों द्वारा लगभग 40 डम्परों से खनन कार्य कई दिनों से 24 घंटे चल रहा है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की तो जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश जिला खनन अधिकारी को दिए। खनन अधिकारी ने मौके पर जाकर देखा तो खनन जारी था। बताया जाता है कि जिसके बाद खनन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। खनन अधिकारी की दी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए तहसीलदार हसनपुर को आदेश दिए जा चुके हैं। शिकायतकर्ता संदीप कुमार का कहना कि जनपद के अधिकारियों द्वारा खनन कार्य नहीं रुकवाया गया है। जिसके बाद मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई है।
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ये है गंगा एक्सप्रेस वे के कार्य में भराव का नियम
-गंगा एक्सप्रेस वे निर्माण से जुड़े अधिकारियों द्वारा पंजीकृत फर्म को मिट्टी का भराव करने के लिए ठेका दिया जाता है। फर्म के ठेकेदार द्वारा भी मिट्टी की आपूर्ति करने के लिए दूसरी जगह भूमि का ठेका लिया जाता है। प्रशासन से अनुमति ली जाती है। लेकिन यहां नंदी अभ्यारण्य केंद्र की भूमि से मिट्टी का भराव नियम के अनुसार नहीं हो रहा।
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एक्सप्रेस वे लिए सरकार ने दी है छूट
ढबारसी। ग्राम पंचायत में स्थित तालाबों व पोखरों व नहरों की खोदाई कराकर मिट्टी उठाकर एक्सप्रेस- वे की जरूरतों को पूरा करने की सरकार ने छूट दे रखी है। लेकिन चारागाह की भूमि को मिट्टी खनन से अलग रखा गया है। चन्दनकोटा की चरागाह की भूमि उपजाऊ है। राजस्व विभाग द्वारा कब्जा मुक्त किए जाने से पूर्व में इस भूमि पर खेती की जाती थी। फसलों की सिंचाई के लिए तीन ट्यूबवेल लगे हुए हैं।
क्या बोलीं खनन अधिकारी
-जिला खनन अधिकारी रंजना सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी के आदेश पर मैंने खनन स्थल जाकर जांच की थी। विभाग की ओर चरागाह की भूमि में खनन करने की अनुमति नहीं दी गई है। मैंने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी है। शीघ्र ही खनन कार्य को बंद कराया जाएगा।
एसडीएम का बयान
-चरागाह और नंदी अभ्यारण केंद्र की भूमि से मिट्टी खोदवाकर गंगा एक्सप्रेस-वे की जरूरतों को पूरा किया जाने का मामला जानकारी में नहीं है। पूरे मामले की जांच कराने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।