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दीपदान कर अपनों की याद में आंखों से छलके आंसू
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Tears spilled from eyes in memory of loved ones by donating lamps
- फोटो : GAJRAULA
कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर सूर्यास्त के समय श्रद्धालुओं ने पितरों के मोक्ष को दीपदान किया तो तिगरी के सूने घाट जगमगा उठे। इस दौरान अपनों की याद में लोगों की आंखों में आंसू भर आए। तिगरी में गंगा घाटों और डेरों का माहौल गमगीन हो गया।
मंगलवार की शाम सूर्यास्त होते ही तिगरी में हजारों श्रद्धालु दीपदान के लिए घाट पर पहुंच गए और नम आंखों से दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। अपने सगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर लोगों की आंखें भर आईं। दीपदान के बाद पुरोहितों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा आदि का दान भी किया गया।
ये है मान्यता
मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है।
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मंगलवार की शाम सूर्यास्त होते ही तिगरी में हजारों श्रद्धालु दीपदान के लिए घाट पर पहुंच गए और नम आंखों से दीपदान का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक जारी रहा। अपने सगे संबंधी और परिजनों से बिछड़े लोगों को याद कर लोगों की आंखें भर आईं। दीपदान के बाद पुरोहितों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा आदि का दान भी किया गया।
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ये है मान्यता
मान्यता है कि महाभारत युद्ध में मारे गए हजारों सैनिक और असंख्य योद्धाओं की आत्मा की शांति के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पांडवों की मौजूदगी में सर्वप्रथम चतुर्दशी को दीपदान किया था, तब से यह परंपरा चल रही है।
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