{"_id":"662059f37b65bebf310c9b77","slug":"tea-shop-owners-son-becomes-technical-assistant-in-isro-jpnagar-news-c-284-1-smbd1016-117276-2024-04-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: चाय की दुकान चलाने वाले का बेटा बना इसरो में तकनीकी सहायक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: चाय की दुकान चलाने वाले का बेटा बना इसरो में तकनीकी सहायक
Thu, 18 Apr 2024 04:53 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 18 Apr 2024 04:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रहरा। चाय की दुकान चलाने वाले दिव्यांग का बेटा इसरो में तकनीकी सहायक बन गया है। जिससे परिवार के लोगों में खुशी का माहौल है।
क्षेत्र के गांव रहरा निवासी सरजीत पुत्र मोहन सिंह का चयन विक्रम सारा भाई अंतरिक्ष केंद्र में तकनीकी सहायक के रूप में हआ है। सरजीत के पिता मोहन सिंह रहरा में पुलिस थाने के पास चाय की दुकान चलाते हैं। वह एक हादसे में दिव्यांग हो गए थे। सरजीत ने बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा राजेश पायलेट इंटर कालेज जेबड़ा गुर्जर से पास की। इसके बाद राजकीय पॉलिटेक्निक सुतावली से तीन वर्षीय केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। इसके बाद कृफको में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्य किया। सरजीत ने बताया कि इसरो में काम करने का सपना था। इसरो में जाने के लिए तैयारी करता रहा। सरजीत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया। सरजीत का इसरो में चयन होने की जानकारी मिलने पर परिवार में खुशी का माहौल है। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
विज्ञापन
क्षेत्र के गांव रहरा निवासी सरजीत पुत्र मोहन सिंह का चयन विक्रम सारा भाई अंतरिक्ष केंद्र में तकनीकी सहायक के रूप में हआ है। सरजीत के पिता मोहन सिंह रहरा में पुलिस थाने के पास चाय की दुकान चलाते हैं। वह एक हादसे में दिव्यांग हो गए थे। सरजीत ने बताया कि हाईस्कूल की परीक्षा राजेश पायलेट इंटर कालेज जेबड़ा गुर्जर से पास की। इसके बाद राजकीय पॉलिटेक्निक सुतावली से तीन वर्षीय केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। इसके बाद कृफको में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्य किया। सरजीत ने बताया कि इसरो में काम करने का सपना था। इसरो में जाने के लिए तैयारी करता रहा। सरजीत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता व गुरुजनों को दिया। सरजीत का इसरो में चयन होने की जानकारी मिलने पर परिवार में खुशी का माहौल है। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।