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Amroha News: तारकोल संकट से सड़कों के निर्माण पर असर

Sat, 28 Mar 2026 12:12 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Sat, 28 Mar 2026 12:12 AM IST
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Tar crisis impacts road construction
अमरोहा। अमेरिक-इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के असर से तारकोल का संकट गहरा गया है और अगर युद्ध लंबा चला तो विकास कार्यों पर भी सीधा असर पड़ेगा।
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जारी हालात के चलते आपूर्ति प्रभावित होने से न केवल तारकोल की उपलब्धता घट गई है, बल्कि इसके दाम भी तेजी से बढ़ गए हैं। इस समय तारकोल के रेटों में इजाफा हुआ है। उधर, सिलिंडर नहीं मिलने से भी सड़क निर्माण के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
डेढ़ गुना कीमत चुकाने और पहले भुगतान के बावजूद ठेकेदारों को रिफाइनरी से पर्याप्त माल नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा है कि जल्द ही तारकोल के दाम में करीब 10 रुपये प्रति टन तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में सड़क निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने में कुछ ही दिन शेष हैं, इसलिए ठेकेदार उपलब्ध तारकोल के हिसाब से अधूरे निर्माण कार्यों को जल्द-से-जल्द पूरा कर भुगतान लेने की कोशिश में जुटे हैं।
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आशंका जताई जा रही है कि एक अप्रैल से कई निर्माण कार्य प्रभावित हो जाएंगे। जिससे करीब 400 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क परियोजनाएं प्रभावित होंगी। युद्ध से पहले फरवरी में तारकोल की कीमत करीब 42 हजार रुपये प्रति टन (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) थी। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद मथुरा और पानीपत रिफाइनरी ने धीरे-धीरे कीमतें बढ़ानी शुरू कर दीं।
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16 मार्च को इसमें करीब 2500 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी की गई। इसके अलावा रिफाइनरी से हॉटमिक्स प्लांट तक तारकोल पहुंचाने में करीब 2500 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त भाड़ा भी लग रहा है। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर यही हालात रहे तो आने वाले दिनों में तारकोल की कीमत आसमान छूने लगेंगी। अंतर तो अभी से ही दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में काम करना मुश्किल हो जाएगा। लोक निर्माण विभाग के एक जेई ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तारकोल जो पहले 40 से 45 किलोग्राम बिक रहा था।

आज इसकी कीमत 50 रुपये से 55 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। यानि जो ड्रम पहले साढ़े आठ हजार के आसपास मिलता था। आज वही ड्रम जीएसटी समेत साढ़े ग्यारह हजार रुपये का पड़ रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत कामर्शियल सिलिंडर न मिलने से आ रही है। शहर में प्रतिदिन करीब 500 टन तारकोल की खपत होती है, जिसमें से 250 से 300 टन बिटुमिनस सड़कों के निर्माण में उपयोग किया जाता है।
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