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चिंगारी से पारेषण के बिजलीघर निकट आग लगने से पांच उपकेंद्रों की आपूर्ति ठप
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तारों से निकली चिंगारी से पारेषण बिजलीघर के निकट आग लग गई। आग की चपेट में पांच उपकेंद्रों को विद्युत आपूर्ति देने वाले केबल आने से बिजली आपूर्ति ठप हो गई, पारेषण केंद्र में अफरा तफरी मच गई। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने खासी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गनीमत की बात यह रही कि उस वक्त तेज हवा नहीं चल रही थी, वरना आग पास स्थित कालोनी के घरों को भी चपेट में ले सकती थी।
लक्ष्मी नगर के पश्चिम और बसंत विहार के पूर्व में 132 केवीए का पारेषण बिजलीघर है। बिजलीघर यार्ड में हसनपुर, अटारी मुरीदपुर, मोहम्मदाबाद और सिहाली उपकेंद्रों से जुड़े केबिल जा रहे हैं। केबिल जमीन पर पड़े हैं, जबकि औद्योगिक क्षेत्र के उपकेंद्र के केबिल ऊपर से गुजर रहे हैं। पारेषण बिजलीघर के बराबर में विद्युत वितरण निगम की कालोनी है। फायर ब्रिगेडकर्मियों ने बताया कि रविवार की दोपहर एक बजे उनको सूचना मिली कि पारेषण बिजलीघर यार्ड के निकट तारों से निकली चिंगारी से भयंकर आग लग रही है। जल्द ही मौके पर नहीं पहुंचे तो आग बिजली निगम की कालोनी के साथ ही पारेषण बिजलीघर को भी चपेट में ले सकती है। खबर मिलते ही वह मौके पर पहुंचे। उधर यहां आग बुझाने की कोशिश कर रहे बिजलीकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। फायर ब्रिगेडकर्मियों आग को कालोनी की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए भी मेहनत की। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन तब तक उपरोक्त पांचों विद्युत उपकेंद्रों के केबिल फुंक गए थे। जिससे पांचों उपकेंद्रों की आपूर्ति ठप हो गई। गनीमत की बात यह रही कि दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया, वरना कालोनी को अपनी चपेट में ले सकती थी। पारेषण के उपखंड अधिकारी अजहर अली ने बताया कि आग लगने से विभाग का कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने वितरण को नुकसान होने की बात स्वीकार की।
आखिर किसकी लापरवाही से इकट्ठा हो गया था कबाड़
गजरौला। पारेषण बिजलीघर की दीवारों के निकट हर साल सर्दियों में झाड़ियां उग आती हैं। जो धीरे-धीरे यार्ड तक को घेर लेती हैं। इन झाड़ियों से आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसी डर के चलते झाड़ियों को साफ करा दिया गया था। काटने के बाद उसके ढेर लगा दिए गए, लेकिन उनको उठाया नहीं। जिसकी वजह से उनमें चिंगारी गिरी और उसमें आग लग गई। भीषण गर्मी में यार्ड के निकट घास और झाड़ियों के ढेर किसकी लापरवाही से छोड़े गए यह चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ा हादसा हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। एसडीओ अजहर अली कहते हैं कि विभाग झाड़ियों को खुद साफ कराने के बाद आग लगवा कर उन्हें नष्ट करवाता है। इस बार खुद ही आग लग गई। इससे बड़ा नुकसान हो सकता था, इस सवाल का जवाब वह नहीं दे सके।
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जेई का दावा घंटे बाद चालू कर दी आपूर्ति
गजरौला। पारेषण बिजलीघर निकट आग लगने से वितरण के पांच उपकेंद्रों के केबिल फुंक जाने से आपूर्ति ठप हो गई। जिससे भीषण गर्मी में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विद्युत वितरण के अवर अभियंता साहब सिंह का कहना है कि केबिल पानी डाल कर जलने से बचा लिए गए। थोड़े क्षतिग्रस्त हुए थे। बहुत अधिक नुकसान नहीं हुआ। एक घंटे बाद आपूर्ति चालू कर दी गई।
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लक्ष्मी नगर के पश्चिम और बसंत विहार के पूर्व में 132 केवीए का पारेषण बिजलीघर है। बिजलीघर यार्ड में हसनपुर, अटारी मुरीदपुर, मोहम्मदाबाद और सिहाली उपकेंद्रों से जुड़े केबिल जा रहे हैं। केबिल जमीन पर पड़े हैं, जबकि औद्योगिक क्षेत्र के उपकेंद्र के केबिल ऊपर से गुजर रहे हैं। पारेषण बिजलीघर के बराबर में विद्युत वितरण निगम की कालोनी है। फायर ब्रिगेडकर्मियों ने बताया कि रविवार की दोपहर एक बजे उनको सूचना मिली कि पारेषण बिजलीघर यार्ड के निकट तारों से निकली चिंगारी से भयंकर आग लग रही है। जल्द ही मौके पर नहीं पहुंचे तो आग बिजली निगम की कालोनी के साथ ही पारेषण बिजलीघर को भी चपेट में ले सकती है। खबर मिलते ही वह मौके पर पहुंचे। उधर यहां आग बुझाने की कोशिश कर रहे बिजलीकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। फायर ब्रिगेडकर्मियों आग को कालोनी की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए भी मेहनत की। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। लेकिन तब तक उपरोक्त पांचों विद्युत उपकेंद्रों के केबिल फुंक गए थे। जिससे पांचों उपकेंद्रों की आपूर्ति ठप हो गई। गनीमत की बात यह रही कि दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पा लिया, वरना कालोनी को अपनी चपेट में ले सकती थी। पारेषण के उपखंड अधिकारी अजहर अली ने बताया कि आग लगने से विभाग का कोई नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने वितरण को नुकसान होने की बात स्वीकार की।
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आखिर किसकी लापरवाही से इकट्ठा हो गया था कबाड़
गजरौला। पारेषण बिजलीघर की दीवारों के निकट हर साल सर्दियों में झाड़ियां उग आती हैं। जो धीरे-धीरे यार्ड तक को घेर लेती हैं। इन झाड़ियों से आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसी डर के चलते झाड़ियों को साफ करा दिया गया था। काटने के बाद उसके ढेर लगा दिए गए, लेकिन उनको उठाया नहीं। जिसकी वजह से उनमें चिंगारी गिरी और उसमें आग लग गई। भीषण गर्मी में यार्ड के निकट घास और झाड़ियों के ढेर किसकी लापरवाही से छोड़े गए यह चर्चा का विषय बना हुआ है। बड़ा हादसा हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। एसडीओ अजहर अली कहते हैं कि विभाग झाड़ियों को खुद साफ कराने के बाद आग लगवा कर उन्हें नष्ट करवाता है। इस बार खुद ही आग लग गई। इससे बड़ा नुकसान हो सकता था, इस सवाल का जवाब वह नहीं दे सके।
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जेई का दावा घंटे बाद चालू कर दी आपूर्ति
गजरौला। पारेषण बिजलीघर निकट आग लगने से वितरण के पांच उपकेंद्रों के केबिल फुंक जाने से आपूर्ति ठप हो गई। जिससे भीषण गर्मी में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। विद्युत वितरण के अवर अभियंता साहब सिंह का कहना है कि केबिल पानी डाल कर जलने से बचा लिए गए। थोड़े क्षतिग्रस्त हुए थे। बहुत अधिक नुकसान नहीं हुआ। एक घंटे बाद आपूर्ति चालू कर दी गई।