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Amroha News: राज कपूर का ऐसा क्रेज कि मिलने के लिए होटल में कर दी थी तोड़फोड़
Sun, 15 Dec 2024 01:53 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 15 Dec 2024 01:53 AM IST
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गजरौला (अमरोहा)।
बात 1985 की है। तब मैं देहरादून के डीएवी कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। मुझे और कुछ सहपाठियों को पता चला कि राज कपूर साहब साहब दून में राजपुर रोड स्थित एक बड़े होटल में ठहरे हुए हैं। हम सब उनसे मिलने होटल पहुंच गए। कोशिशों के बाद भी मुलाकात में कामयाबी नहीं मिली तो होटल में तोड़फोड़ कर दी।
यह कहना है कि गजरौला के नगर पंचायत अध्यक्ष रह चुके 65 वर्षीय राजकुमार अग्रवाल का। एक दौर में राज कपूर की फिल्मों के दीवाने रहे राजकुमार ने महान कलाकार का जिक्र आते ही छात्र जीवन के अनुभव साझा किए। राज कपूर के दौर को याद करते समय न सिर्फ उनकी आवाज कड़क होती गई, बल्कि चेहरे के भाव भी बदलते रहे। राज कपूर की कई उन फिल्मों के नाम गिनाए, जो एक से ज्यादा बार देखी थीं।
देहरादून की घटना सुनाते-सुनाते अचानक गंभीर हो गए। सवालिया अंदाज में बोले-मालूम है कि राज कपूर को करीब से देखने की कोशिश में तोड़फोड़ की कितनी कीमत चुकानी पड़ी। कुछ सेकेंड की खामोशी के बीच गहरी सांस लेते हुए खुद ही जवाब दिया। कहा कि राज कपूर साहब से होटल में मुलाकात तो नहीं हो सकी लेकिन तोड़फोड़ होती देख पहले पुलिस के डंडे बरसाकर छात्रों को खदेड़ा। फिर प्रशासन के निर्देश पर हॉस्टल खाली करा लिया गया। उस घटना के बाद फिर छात्रों को हॉस्टल देने पर ही रोक लग गई। (संवाद)
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गजरौला में लगातार 15 दिन चली थी संगम
राजकुमार अग्रवाल कहते हैं कि राज कपूर की फिल्में सिनेमा कारोबारियों के लिए भी लॉटरी मानी जाती थीं। उनकी सफल फिल्मों में संगम भी शामिल रही है। उस दौर में तमाम लोग एेसे थे, जिन्होंने संगम कई बार देखी। गजरौला के ज्योति सिनेमाहॉल में यह फिल्म लगातार 15 दिन चली थी। संगम का गाना... बुड्ढा मिल गया... उन दिनों खूब गूंजता था। आज भी उम्रदराज दूल्हे को देखकर लोग इस गीत के तीन शब्द बोलकर कमेंट कर देते हैं। कभी-कभी पत्नियां भी चुहलबाजी में यही बोलकर पति पर कटाक्ष करती हैं।
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...जब गजरौला में चली थी राज कपूर की फिल्मों की सीरीज
राज कपूर से सिनेमा प्रेमियों के लगाव का अंदाजा इससे लगाया था सकता है कि वर्ष 2000 में गजरौला जैसे छोटे कस्बे में उनकी फिल्मों की सीरीज का प्रदर्शन हुआ था। उस सीरीज में राज कपूर की कई ब्लैक-व्हाइट फिल्में कलर प्रिंट के नए प्रारूप में भी देखने को मिली थीं। यह सीरीज दो महीने चली थी। इससे तब के सिनेमा संचालकों की कमाई के नए रिकॉर्ड बने थे।
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सफलता की गारंटी मानी जाती थी राज कपूर-नरगिस की जोड़ी
अमरोहा। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिव स्वरूप टंडन भी राज कपूर की फिल्मों के दीवाने रहे हैं। वह बताते हैं कि वह दर्शक के रूप में तो राजकपूर की फिल्में देखते ही थे, बतौर सिनेमा व्यवसायी भी राज कपूर की फिल्मों के लिए आगे रहते थे।
नगर के आनंद सिनेमा के संचालक 78 वर्षीय टंडन कहते हैं कि राज साहब जैसा कलाकार आसानी से नहीं मिल सकता। 1955 से 1975 के फिल्मी दौर में राज साहब ने लोगों के दिलों पर राज किया। उन्होंने नरगिस से साथ एक से बढ़कर एक यादगार फिल्में दीं। राजकपूर-नरगिस की जोड़ी सफलता की गारंटी मानी जाती थी। अमरोहा में श्री 420 पांच हफ्ते और बॉबी छह हफ्ते लगातार चली थीं। तब टिकट के लिए लंबी लाइन लगती थी। संवाद
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बात 1985 की है। तब मैं देहरादून के डीएवी कॉलेज में स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। मुझे और कुछ सहपाठियों को पता चला कि राज कपूर साहब साहब दून में राजपुर रोड स्थित एक बड़े होटल में ठहरे हुए हैं। हम सब उनसे मिलने होटल पहुंच गए। कोशिशों के बाद भी मुलाकात में कामयाबी नहीं मिली तो होटल में तोड़फोड़ कर दी।
यह कहना है कि गजरौला के नगर पंचायत अध्यक्ष रह चुके 65 वर्षीय राजकुमार अग्रवाल का। एक दौर में राज कपूर की फिल्मों के दीवाने रहे राजकुमार ने महान कलाकार का जिक्र आते ही छात्र जीवन के अनुभव साझा किए। राज कपूर के दौर को याद करते समय न सिर्फ उनकी आवाज कड़क होती गई, बल्कि चेहरे के भाव भी बदलते रहे। राज कपूर की कई उन फिल्मों के नाम गिनाए, जो एक से ज्यादा बार देखी थीं।
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देहरादून की घटना सुनाते-सुनाते अचानक गंभीर हो गए। सवालिया अंदाज में बोले-मालूम है कि राज कपूर को करीब से देखने की कोशिश में तोड़फोड़ की कितनी कीमत चुकानी पड़ी। कुछ सेकेंड की खामोशी के बीच गहरी सांस लेते हुए खुद ही जवाब दिया। कहा कि राज कपूर साहब से होटल में मुलाकात तो नहीं हो सकी लेकिन तोड़फोड़ होती देख पहले पुलिस के डंडे बरसाकर छात्रों को खदेड़ा। फिर प्रशासन के निर्देश पर हॉस्टल खाली करा लिया गया। उस घटना के बाद फिर छात्रों को हॉस्टल देने पर ही रोक लग गई। (संवाद)
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गजरौला में लगातार 15 दिन चली थी संगम
राजकुमार अग्रवाल कहते हैं कि राज कपूर की फिल्में सिनेमा कारोबारियों के लिए भी लॉटरी मानी जाती थीं। उनकी सफल फिल्मों में संगम भी शामिल रही है। उस दौर में तमाम लोग एेसे थे, जिन्होंने संगम कई बार देखी। गजरौला के ज्योति सिनेमाहॉल में यह फिल्म लगातार 15 दिन चली थी। संगम का गाना... बुड्ढा मिल गया... उन दिनों खूब गूंजता था। आज भी उम्रदराज दूल्हे को देखकर लोग इस गीत के तीन शब्द बोलकर कमेंट कर देते हैं। कभी-कभी पत्नियां भी चुहलबाजी में यही बोलकर पति पर कटाक्ष करती हैं।
...जब गजरौला में चली थी राज कपूर की फिल्मों की सीरीज
राज कपूर से सिनेमा प्रेमियों के लगाव का अंदाजा इससे लगाया था सकता है कि वर्ष 2000 में गजरौला जैसे छोटे कस्बे में उनकी फिल्मों की सीरीज का प्रदर्शन हुआ था। उस सीरीज में राज कपूर की कई ब्लैक-व्हाइट फिल्में कलर प्रिंट के नए प्रारूप में भी देखने को मिली थीं। यह सीरीज दो महीने चली थी। इससे तब के सिनेमा संचालकों की कमाई के नए रिकॉर्ड बने थे।
सफलता की गारंटी मानी जाती थी राज कपूर-नरगिस की जोड़ी
अमरोहा। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिव स्वरूप टंडन भी राज कपूर की फिल्मों के दीवाने रहे हैं। वह बताते हैं कि वह दर्शक के रूप में तो राजकपूर की फिल्में देखते ही थे, बतौर सिनेमा व्यवसायी भी राज कपूर की फिल्मों के लिए आगे रहते थे।
नगर के आनंद सिनेमा के संचालक 78 वर्षीय टंडन कहते हैं कि राज साहब जैसा कलाकार आसानी से नहीं मिल सकता। 1955 से 1975 के फिल्मी दौर में राज साहब ने लोगों के दिलों पर राज किया। उन्होंने नरगिस से साथ एक से बढ़कर एक यादगार फिल्में दीं। राजकपूर-नरगिस की जोड़ी सफलता की गारंटी मानी जाती थी। अमरोहा में श्री 420 पांच हफ्ते और बॉबी छह हफ्ते लगातार चली थीं। तब टिकट के लिए लंबी लाइन लगती थी। संवाद