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स्वास्थ्य अफसरों ने कराया स्टिंग ऑपरेशन, फंस गईं आशाएं
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 09 Aug 2016 01:43 AM IST
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- फोटो : getty images
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सरकारी की बजाय प्राइवेट अस्पतालों में डिलीवरी केस लेकर जाने की शिकायत पर जब स्वास्थ्य अफसरों ने जनपद भर में स्टिंग ऑपरेशन कराया तो कई आशाएं फंस गईं। कुछ भनक लगते ही अस्पतालों से खामोशी के साथ निकल गईं। अब अफसरों ने मामले की गहनता से पड़ताल के बाद स्टिंग में फंसी आशाओं को हटाने की कार्रवाई करने को कहा है। चूंकि इनमें से कुछ ने अपने काम से अस्पताल आने की बात भी कही है।
सरकार द्वारा चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में होने वाले डिलीवरी केसों में तेजी के साथ गिरावट आई है। जिस पर उच्चाधिकारियों को शिकायत मिल रही थीं कि आशाएं सरकारी अस्पताल नहीं बल्कि केस को प्राइवेट में लेकर जा रही हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारियों ने एक अभियान के तहत कार्रवाई करने के आदेश जनपद अधिकारियों को दिए थे। जिस पर नोडल अधिकारी डा.रामजी वर्मा ने अमल किया।
अधीनस्थ कर्मचारियों को प्राइवेट अस्पतालों का स्टिंग ऑपरेशन करने के निर्देश दिए। जिस पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने प्रत्येक अस्पताल को खंगाला। जिसमें कर्मियों को कुछ आशाएं अस्पतालों में मौजूद मिलीं। पूछने पर किसी ने कार्य से आना तो कोई डिलीवरी केस के साथ पकड़ी गई। कुछ मौका देखते ही वहां से निकल गईं। हालांकि चार आशाएं अस्पतालों में मिलीं। जिनको जांच के बाद विभाग हटाने की कार्रवाई करेगा।
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आशाओं की शिकायत मिल रही थी कि वह सरकारी की बजाय प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी केस लेकर जा रही हैं। एक अभियान के तहत अस्पतालों की चेकिंग कराई गई थीं। जिसमें कुछ निजी अस्पतालों में पकड़ी गई हैं। जांच के बाद उनको हटाने की कार्रवाई होगी।
डा.रामजी वर्मा, नोडल अधिकारी स्वास्थ्य विभाग
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सरकार द्वारा चलाई जा रही जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में होने वाले डिलीवरी केसों में तेजी के साथ गिरावट आई है। जिस पर उच्चाधिकारियों को शिकायत मिल रही थीं कि आशाएं सरकारी अस्पताल नहीं बल्कि केस को प्राइवेट में लेकर जा रही हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चाधिकारियों ने एक अभियान के तहत कार्रवाई करने के आदेश जनपद अधिकारियों को दिए थे। जिस पर नोडल अधिकारी डा.रामजी वर्मा ने अमल किया।
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अधीनस्थ कर्मचारियों को प्राइवेट अस्पतालों का स्टिंग ऑपरेशन करने के निर्देश दिए। जिस पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने प्रत्येक अस्पताल को खंगाला। जिसमें कर्मियों को कुछ आशाएं अस्पतालों में मौजूद मिलीं। पूछने पर किसी ने कार्य से आना तो कोई डिलीवरी केस के साथ पकड़ी गई। कुछ मौका देखते ही वहां से निकल गईं। हालांकि चार आशाएं अस्पतालों में मिलीं। जिनको जांच के बाद विभाग हटाने की कार्रवाई करेगा।
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आशाओं की शिकायत मिल रही थी कि वह सरकारी की बजाय प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी केस लेकर जा रही हैं। एक अभियान के तहत अस्पतालों की चेकिंग कराई गई थीं। जिसमें कुछ निजी अस्पतालों में पकड़ी गई हैं। जांच के बाद उनको हटाने की कार्रवाई होगी।
डा.रामजी वर्मा, नोडल अधिकारी स्वास्थ्य विभाग