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बुजुर्ग पिता की गर्दन काटकर हत्या करने में बेटे को उम्रकैद
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बुजुर्ग पिता की गर्दन काटकर हत्या करने के मामले में न्यायालय ने बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। गिरफ्तारी के बाद से दोषी जेल में बंद है, उसे जमानत नहीं मिल सकी थी।
यह घटना एक जून 2019 को आदमपुर थानाक्षेत्र के जेबड़ा गांव में हुई थी। यहां रहने वाले किसान राजाराम आर्य के दो बेटे थे। दोनों बेटों के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। राजाराम आर्य अपने बड़े बेटे वेद प्रकाश आर्य के साथ रहते थे। घटना वाली शाम उनका छोटा बेटा सतपाल अपने तहेरे भाई रामचंद्र के साथ घर आया और पिता राजाराम के साथ झगड़ा करने लगा। विवाद के बाद उसने बलकटी से अपने बुजुर्ग पिता राजाराम आर्य की गर्दन काटकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। इस मामले में बड़े बेटे वेद प्रकाश आर्य ने दोनों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने आरोपी सतपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने रामचंद के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने पर उसका नाम मुकदमे से निकाल दिया था। इस मामले में अकेले सतपाल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ सूर्य प्रकाश सिंह की अदालत में विचाराधीन था। मंगलवार को न्यायालय ने मामले में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता राम भरोसे ने जोरदार पैरवी करते हुए आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की मांग की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने सतपाल को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक दोषी सतपाल गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में बंद है। उसे जमानत नहीं मिल सकी थी।
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यह घटना एक जून 2019 को आदमपुर थानाक्षेत्र के जेबड़ा गांव में हुई थी। यहां रहने वाले किसान राजाराम आर्य के दो बेटे थे। दोनों बेटों के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। राजाराम आर्य अपने बड़े बेटे वेद प्रकाश आर्य के साथ रहते थे। घटना वाली शाम उनका छोटा बेटा सतपाल अपने तहेरे भाई रामचंद्र के साथ घर आया और पिता राजाराम के साथ झगड़ा करने लगा। विवाद के बाद उसने बलकटी से अपने बुजुर्ग पिता राजाराम आर्य की गर्दन काटकर हत्या कर दी थी। वारदात के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। इस मामले में बड़े बेटे वेद प्रकाश आर्य ने दोनों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। बाद में पुलिस ने आरोपी सतपाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने रामचंद के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिलने पर उसका नाम मुकदमे से निकाल दिया था। इस मामले में अकेले सतपाल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
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यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ सूर्य प्रकाश सिंह की अदालत में विचाराधीन था। मंगलवार को न्यायालय ने मामले में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से शासकीय अधिवक्ता राम भरोसे ने जोरदार पैरवी करते हुए आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की मांग की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने सतपाल को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक दोषी सतपाल गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में बंद है। उसे जमानत नहीं मिल सकी थी।
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