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Amroha News: पटाखों का धुआं फेफड़ों को पहुंचा सकता है नुकसान
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अमरोहा। दीपावली पर पटाखों का धुआं और तेज धमाके सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इससे आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, दमा और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। तेज आवाज कानों के पर्दों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। चिकित्सकों ने आतिशबाजी के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।
सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि पटाखों में पोटेशियम क्लोरेट और गन पाउडर जैसे रसायनों का इस्तेमाल होता है। इनके जलने से निकलने वाला धुआं सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है। इससे फेफड़ों की बीमारी और दमा से पीड़ित लोगों को अधिक खतरा है। सूक्ष्म कण और जहरीली गैसें सांस संबंधी समस्याएं बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।
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कैंसर और त्वचा संबंधी बीमारियों का भी खतरा
सीएमओ के अनुसार आतिशबाजी में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग रसायन जलने के बाद वातावरण में हानिकारक कण छोड़ते हैं। पटाखों में इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम तेज सफेद रोशनी पैदा करता है, लेकिन इसके संपर्क से त्वचा में जलन और डर्मेटाइटिस जैसी समस्या हो सकती है। वहीं, पटाखों के धुएं में मौजूद प्रदूषक तत्व फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। सांस की पुरानी बीमारी से पीड़ित लोगों को इससे विशेष परेशानी हो सकती है। प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
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आंखों और कानों पर भी पड़ता है असर
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार बादल ने बताया कि पटाखों से निकलने वाली तेज रोशनी और धमाके आंखों तथा कानों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। आतिशबाजी के दौरान निकलने वाले धुएं और रासायनिक कणों से आंखों में जलन, खुजली और पानी आने की समस्या हो सकती है। वहीं, कान के बिल्कुल पास तेज धमाका होने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। पटाखों की चिंगारी आंखों में पड़ने से गंभीर चोट भी लग सकती है। इसलिए आतिशबाजी करते समय पर्याप्त दूरी बनाए रखना जरूरी है।
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गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अधिक खतरा
महिला आयुष चिकित्सक डॉ. वी. मुजक्करा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को आतिशबाजी के धुएं से दूर रखना चाहिए। पटाखों से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित कर सकती हैं। इसका असर गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की सेहत पर पड़ सकता है। बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में धुआं और जहरीली गैसें उन्हें जल्दी प्रभावित कर सकती हैं।
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दिल और बीपी के मरीज भी बरतें सावधानी
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक गोयल के मुताबिक पटाखों के तेज धमाकों से हृदय रोगियों को परेशानी हो सकती है। अचानक तेज आवाज से तनाव और घबराहट बढ़ सकती है। इससे पहले से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की दिक्कत बढ़ सकती है। आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
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सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि पटाखों में पोटेशियम क्लोरेट और गन पाउडर जैसे रसायनों का इस्तेमाल होता है। इनके जलने से निकलने वाला धुआं सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है। इससे फेफड़ों की बीमारी और दमा से पीड़ित लोगों को अधिक खतरा है। सूक्ष्म कण और जहरीली गैसें सांस संबंधी समस्याएं बढ़ा सकती हैं। लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं।
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कैंसर और त्वचा संबंधी बीमारियों का भी खतरा
सीएमओ के अनुसार आतिशबाजी में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग रसायन जलने के बाद वातावरण में हानिकारक कण छोड़ते हैं। पटाखों में इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम तेज सफेद रोशनी पैदा करता है, लेकिन इसके संपर्क से त्वचा में जलन और डर्मेटाइटिस जैसी समस्या हो सकती है। वहीं, पटाखों के धुएं में मौजूद प्रदूषक तत्व फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। सांस की पुरानी बीमारी से पीड़ित लोगों को इससे विशेष परेशानी हो सकती है। प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
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आंखों और कानों पर भी पड़ता है असर
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार बादल ने बताया कि पटाखों से निकलने वाली तेज रोशनी और धमाके आंखों तथा कानों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। आतिशबाजी के दौरान निकलने वाले धुएं और रासायनिक कणों से आंखों में जलन, खुजली और पानी आने की समस्या हो सकती है। वहीं, कान के बिल्कुल पास तेज धमाका होने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। पटाखों की चिंगारी आंखों में पड़ने से गंभीर चोट भी लग सकती है। इसलिए आतिशबाजी करते समय पर्याप्त दूरी बनाए रखना जरूरी है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों को अधिक खतरा
महिला आयुष चिकित्सक डॉ. वी. मुजक्करा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को आतिशबाजी के धुएं से दूर रखना चाहिए। पटाखों से निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित कर सकती हैं। इसका असर गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु की सेहत पर पड़ सकता है। बच्चों की त्वचा संवेदनशील होती है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में धुआं और जहरीली गैसें उन्हें जल्दी प्रभावित कर सकती हैं।
दिल और बीपी के मरीज भी बरतें सावधानी
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक गोयल के मुताबिक पटाखों के तेज धमाकों से हृदय रोगियों को परेशानी हो सकती है। अचानक तेज आवाज से तनाव और घबराहट बढ़ सकती है। इससे पहले से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की दिक्कत बढ़ सकती है। आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।