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प्रदूषण की मार, ब्रजघाट गंगा में नहीं पहुंच रहे साइबेरियन पक्षी

Sun, 07 Jan 2018 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ गजरौला (अमरोहा)।
अमर उजाला ब्यूरो/ गजरौला (अमरोहा)। Updated Sun, 07 Jan 2018 01:58 AM IST
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Siberian birds not coming in brijghat due to water pollution
Siberian birds - फोटो : demo
प्रदूषण की चपेट में आम जनमास ही नहीं बल्कि पशु पक्षी भी हैं। इसका असर हजारों किमी दूरी से लंबी उड़ान भरकर हर वर्ष ब्रजघाट आने वाले साइबेरियन पक्षियों पर भी देखने को मिला है। ब्रजघाट में हर साल इन दिनों में मेहमान पक्षियों के पहुंचने पर लोग उन्हें देखने पहुंचने थे। लेकिन इस बार गंगा में बढ़ते प्रदूषण के कारण अब तक रंग-बिरंगे मेहमान पक्षियों की आमद देखने को नहीं मिल पाई है। 
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सोवियत रूस का साइबेरिया प्रांत विश्व का सबसे ठंडा क्षेत्र माना जाता है। वहां जलाशयों में सर्दी के मौसम में बर्फ की मोटी परत जम जाती है। इस कारण नदी, पोखर एवं तालाबों में रहकर, जिंदगी बसर करने वाले सारस, बत्तख, चहा, मुर्गाबी, सुर्खाब समेत विभिन्न प्रजाति के साइबेरियन जलीय पक्षियों का वहां रहना दूभर हो जाता है। जीवन के लिए सुरक्षित स्थान की तलाश में तलाश में मजबूरी में भारत में प्रवेश करते हैं। 
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माना जाता है कि करीब दो दशक पहले तक मेहमान पक्षियों का आगमन बड़े पैमाने पर होता था। इससे गंगा नगरी क्षेत्र के जलाशयों की रंगत बढ़ जाती थी। लेकिन गंगा में बढ़ते प्रदूषण, जल स्त्रोतों में गिरावट और असुरक्षा की भावना के कारण पक्षियों की तादाद लगातार घटती जा रही है। इस बार अभी तक ब्रजघाट गंगा के आसपास साइबेरियन पक्षी नहीं दिखाई दिए हैं।
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बुलंदशहर में हुआ दो पक्षियों का शिकार

गंगा की गोद में सैर करने के लिए विदेशों से आने वाले साइबेरियन पक्षियों का शिकार होना शुरू हो गया है। करीब डेढ़ माह पहले बुलंदशहर गंगा किनारे गंगा पुल के नीचे दो दर्जन विदेशी पक्षी बेहोशी की हालत में पड़े मिले थे। इन विदेशी पक्षियों का नाम सुर्खाब था। इनमें से दो पक्षियों की मौत हो गई थी। वहां शिकारियों ने दाने में नशीला पदार्थ मिलाकर मेहमान पक्षियों का शिकार करने की कोशिश की थी।

गजरौला। गंगा में बढ़ते प्रदूषण से बेश साइबेरियन पंछियों का मोहभंग हुआ है। लेकिन यहां आना उनका कम नहीं हुआ है। इस बार अभी तक पंछियों के आने की जानकारी नहीं मिली है। दो वर्ष पूर्व मंडी धनौरा के पास एक झील को उन्होंने अपना ठिकाना बनाया था। साइबेरिया में ठंड बढ़ने के कारण यह पक्षी इधर रुख करते हैं। 

पीपुल फॉर एनिमल रेडिंग टीम के उत्तर प्रदेश्‍ प्रभारी डा. रविंद्र शुक्ला ने बताया कि गंगा में बढ़ता प्रदूषण साइबेरियन पक्षियों को रास नहीं आ रहा। इसलिए उनका इस बार आमद नहीं हुआ है। इसके अलावा शिकारियों की निगाह भी साइबेरियन पक्षियों पर लगी है। बुलंदशहर में साइबेरियन पक्षियों का शिकार हो चुका है। माना जाता है कि साइबेरियन पक्षी बहुत ही चतुर होते हैं। इसलिए वह खतरे को भांप जाते हैं। असुरक्षा के माहौल में वह नहीं रहते हैं। 
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