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Amroha News: डीएपी-एनपीके की किल्लत, कहीं लाइन में लगे रहे किसान तो कहीं समितियों पर लटके ताले
Fri, 22 Nov 2024 04:29 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 22 Nov 2024 04:29 AM IST
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अमरोहा। जिले में खाद की समस्या से जूझ रहे किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। गेहूं व सरसों की बोआई के लिए किसान डीएपी खाद के लिए परेशान हैं। कई समितियों पर बृहस्पतिवार को पहुंचे किसानों को लाइन में लगने के बाद निराश होकर लौटना पड़ा, जबकि कई समितियों पर ताले लटके मिले। इन दिनों खाद को लेकर मारामारी जैसे हालात बने हुए हैं।
अमरोहा, हसनपुर, नौगांवा, जोया आदि क्षेत्र में किसान परेशान हैं। ऐसे में किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों में खाद की खरीदारी करनी पड़ रही है। यह स्थिति तब है जब शासन इस मामले को लेकर लगातार गंभीर है। उधर, अधिकारियों का दावा है कि समितियों पर खाद की कोई कमी नहीं है, जबकि असलियत बिल्कुल अलग है। इस समय गेहूं की बुवाई की तैयारी चल रही है। साथ ही किसान आलू की बुवाई भी की जा रही है। ऐसे में किसानों को डीएपी और एनपीके की जरूरत है। जिले की 42 सहकारी समितियां से खाद वितरित किया जाता है, लेकिन इन दिनों किसानों को खाद की कमी से जूझना पड़ रहा है। आलम यह है कि कई जगह डीएपी ही नहीं है। जबकि, एनपीके की भी भारी कमी है। भारी मांग के चलते कुछ जगह खाद पहुंचती भी है तो कुछ ही देर में समाप्त हो जाता है। बृहस्पतिवार को जोया रोड स्थिति पीसीएफ कृषर्क सेवा केंद्र पर किसानों की भीड़ लगी मिली। लाइन में लगकर किसान खाद मिलने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान एनपीके के केवल 45 कट्टे थे। जबकि किसानों की संख्या पचास के करीब थे। वहीं डीएपी समिति पर थी ही नहीं। लिहाजा कई किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा।
गजरौला की किसी सहकारी समिति पर नहीं खाद, भटक रहे किसान
गजरौला। गेहूं की बुवाई कर रहे किसान को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। किसान खाद के लिए मारे-मारे घूम रहे हैं। हालात इस कदर बदतर हो गए हैं कि गजरौला, बैरमपुर भूड़, अल्लीपुर भूड़, ढकिया भूड़, तिगरी और कर्मल्लीपुर सहित किसी भी सहकारी समिति पर खाद नहीं है। किसान समितियों के चक्कर लगाकर लौट रहे हैं। बृहस्पतिवार को गजरौला व अल्लीपुर भूड़ सहकारी समिति पर ताले लटके रहे। एडीओ सहकारिता संदीप कुमार का कहना है कि किसी भी समिति पर इस समय खाद नहीं है। अभी कई दिन तक खाद आने की संभावना भी नहीं है।
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खाद आने की सूचना मिलते ही सहकारी संघ पर लगी किसानों की भीड़
मंडी धनौरा। सहकारी संघ पर एनपीके व डीएपी खाद आने की सूचना मिलते ही किसानों की भीड़ लग गई। किसान अपनी खतौनी लेकर खाद लेने के लिए पहुंच गए। हालांकि शाम तक खाद समाप्त हो गया। इन दिनों गेहूं की बुवाई का सीजन चल रहा है। किसान एनपीके व डीएपी खाद के लिए मारे मारे घूम रहे हैं। खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। क्षेत्र में पांच किसान सेवा सहकारी समितियां व दो सहकारी संघ हैं। पिछले दिनों पांच सहकारी समितियों पर 1400 बोरा खाद आया था। करीब आठ हजार किसान सहकारी समितियों से खाद लेते हैं। एक ही दिन में खाद का स्टॉक समाप्त हो गया। बृहस्पतिवार की सुबह सहकारी संघ पर एनपीके व डीएपी खाद आने की सूचना मिली। सहकारी संघ के सदस्य खाद लेने के लिए पहुच गए। संघ के एक कर्मचारी ने बताया कि कुल 400 बोरा खाद आया था। किसानों को उनकी खतौनी में दर्ज रकबे के अनुसार खाद वितरित किया गया है।
खाद नहीं मिलने से परेशान रहे किसान
हसनपुर/आदमपुर। सहकारी समिति पर भदौरा पर कई दिन से खाद नहीं है। जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार केा भी सहकारी समिति पर खाद नहीं पहुंचा। किसान खाद लेने पहुंचे, लेकिन मायूस होकर वापस लौट गए। जिससे गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है। रहरा में सहकारी समिति पर खाद नहीं होने पर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
भेजी गई 2600 मीट्रिक टन की डिमांड
जनपद में खाद की कमी न रहे, इसके लिए 2600 मीट्रिक टन की डिमांड और भेजी गई है। समिति से जुड़े किसान सदस्यों के अलावा आम किसान को भी खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। जिस समिति पर खाद नहीं है वहां उपलब्ध कराया जा रहा है। बबलू सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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अमरोहा, हसनपुर, नौगांवा, जोया आदि क्षेत्र में किसान परेशान हैं। ऐसे में किसानों को निजी दुकानों से महंगे दामों में खाद की खरीदारी करनी पड़ रही है। यह स्थिति तब है जब शासन इस मामले को लेकर लगातार गंभीर है। उधर, अधिकारियों का दावा है कि समितियों पर खाद की कोई कमी नहीं है, जबकि असलियत बिल्कुल अलग है। इस समय गेहूं की बुवाई की तैयारी चल रही है। साथ ही किसान आलू की बुवाई भी की जा रही है। ऐसे में किसानों को डीएपी और एनपीके की जरूरत है। जिले की 42 सहकारी समितियां से खाद वितरित किया जाता है, लेकिन इन दिनों किसानों को खाद की कमी से जूझना पड़ रहा है। आलम यह है कि कई जगह डीएपी ही नहीं है। जबकि, एनपीके की भी भारी कमी है। भारी मांग के चलते कुछ जगह खाद पहुंचती भी है तो कुछ ही देर में समाप्त हो जाता है। बृहस्पतिवार को जोया रोड स्थिति पीसीएफ कृषर्क सेवा केंद्र पर किसानों की भीड़ लगी मिली। लाइन में लगकर किसान खाद मिलने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान एनपीके के केवल 45 कट्टे थे। जबकि किसानों की संख्या पचास के करीब थे। वहीं डीएपी समिति पर थी ही नहीं। लिहाजा कई किसानों को निराश होकर लौटना पड़ा।
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गजरौला की किसी सहकारी समिति पर नहीं खाद, भटक रहे किसान
गजरौला। गेहूं की बुवाई कर रहे किसान को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। किसान खाद के लिए मारे-मारे घूम रहे हैं। हालात इस कदर बदतर हो गए हैं कि गजरौला, बैरमपुर भूड़, अल्लीपुर भूड़, ढकिया भूड़, तिगरी और कर्मल्लीपुर सहित किसी भी सहकारी समिति पर खाद नहीं है। किसान समितियों के चक्कर लगाकर लौट रहे हैं। बृहस्पतिवार को गजरौला व अल्लीपुर भूड़ सहकारी समिति पर ताले लटके रहे। एडीओ सहकारिता संदीप कुमार का कहना है कि किसी भी समिति पर इस समय खाद नहीं है। अभी कई दिन तक खाद आने की संभावना भी नहीं है।
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खाद आने की सूचना मिलते ही सहकारी संघ पर लगी किसानों की भीड़
मंडी धनौरा। सहकारी संघ पर एनपीके व डीएपी खाद आने की सूचना मिलते ही किसानों की भीड़ लग गई। किसान अपनी खतौनी लेकर खाद लेने के लिए पहुंच गए। हालांकि शाम तक खाद समाप्त हो गया। इन दिनों गेहूं की बुवाई का सीजन चल रहा है। किसान एनपीके व डीएपी खाद के लिए मारे मारे घूम रहे हैं। खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। क्षेत्र में पांच किसान सेवा सहकारी समितियां व दो सहकारी संघ हैं। पिछले दिनों पांच सहकारी समितियों पर 1400 बोरा खाद आया था। करीब आठ हजार किसान सहकारी समितियों से खाद लेते हैं। एक ही दिन में खाद का स्टॉक समाप्त हो गया। बृहस्पतिवार की सुबह सहकारी संघ पर एनपीके व डीएपी खाद आने की सूचना मिली। सहकारी संघ के सदस्य खाद लेने के लिए पहुच गए। संघ के एक कर्मचारी ने बताया कि कुल 400 बोरा खाद आया था। किसानों को उनकी खतौनी में दर्ज रकबे के अनुसार खाद वितरित किया गया है।
खाद नहीं मिलने से परेशान रहे किसान
हसनपुर/आदमपुर। सहकारी समिति पर भदौरा पर कई दिन से खाद नहीं है। जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार केा भी सहकारी समिति पर खाद नहीं पहुंचा। किसान खाद लेने पहुंचे, लेकिन मायूस होकर वापस लौट गए। जिससे गेहूं की बुवाई प्रभावित हो रही है। रहरा में सहकारी समिति पर खाद नहीं होने पर किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
भेजी गई 2600 मीट्रिक टन की डिमांड
जनपद में खाद की कमी न रहे, इसके लिए 2600 मीट्रिक टन की डिमांड और भेजी गई है। समिति से जुड़े किसान सदस्यों के अलावा आम किसान को भी खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। जिस समिति पर खाद नहीं है वहां उपलब्ध कराया जा रहा है। बबलू सिंह, जिला कृषि अधिकारी