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तीन प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज, की पूछताछ
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 02 May 2017 01:20 AM IST
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रास्ते के विवाद में गई महिला की जान
- फोटो : demo pic
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चर्चित हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा हत्याकांड की बरेली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। सोमवार को बरेली से पहुंची पुलिस ने हत्याकांड में तीन लोगों के बयान दर्ज किए, जो परिजनों की ओर से मामले के प्रत्यक्षदर्शी बताए गए थे। बयान दर्ज करने के बाद पुलिस वापस लौट गई।
गत वर्ष 26 नवंबर को हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की मुरादाबाद के डींगरपुर में तत्कालीन कैबिनेटमंत्री महबूब अली के रिश्तेदार के पेट्रोलपंप पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने लूट के विरोध में गोली मारने की रिपोर्ट दर्ज की थी, लेकिन जांच में लूट का मामला फर्जी निकला था।
वहीं पीएम के बाद शव के गांव पहुंचने पर परिजनों के साथ हजारों लोगों ने शव को नेशनल हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया था। पांच घंटे तक जमकर आगजनी और बसों में तोड़फोड़ हुई थी। परिजन तत्कालीन कैबिनेट मंत्री महबूब अली और रिश्तेदारों पर हत्या की साजिश रचने की रिपोर्ट दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
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पुलिस ने परिजनों को आश्वासन देकर जाम खुलवाया था। कई दिनों तक तुर्क बहुल गांवों में महबूब अली का विरोध हुई था।कुछ माह पहले आईजी के आदेश पर मामले की जांच मुरादाबाद से बरेली स्थानांतरित कर दी गई थी।
सोमवार को बरेली से डिडौली कोतवाली पहुंचे इंस्पेक्टर सुभाष त्यागी ने मामले में परिजनों और तीन लोगों मुस्तफा, रउफ और असद के बयान दर्ज किए। परिजनों ने इन्हें हत्याकांड का प्रत्यक्षदर्शी बताया था। बयान दर्ज करने के बाद बरेली पुलिस वापस लौट गई।
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गत वर्ष 26 नवंबर को हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की मुरादाबाद के डींगरपुर में तत्कालीन कैबिनेटमंत्री महबूब अली के रिश्तेदार के पेट्रोलपंप पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पुलिस ने लूट के विरोध में गोली मारने की रिपोर्ट दर्ज की थी, लेकिन जांच में लूट का मामला फर्जी निकला था।
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वहीं पीएम के बाद शव के गांव पहुंचने पर परिजनों के साथ हजारों लोगों ने शव को नेशनल हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया था। पांच घंटे तक जमकर आगजनी और बसों में तोड़फोड़ हुई थी। परिजन तत्कालीन कैबिनेट मंत्री महबूब अली और रिश्तेदारों पर हत्या की साजिश रचने की रिपोर्ट दर्ज करने और गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।
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पुलिस ने परिजनों को आश्वासन देकर जाम खुलवाया था। कई दिनों तक तुर्क बहुल गांवों में महबूब अली का विरोध हुई था।कुछ माह पहले आईजी के आदेश पर मामले की जांच मुरादाबाद से बरेली स्थानांतरित कर दी गई थी।
सोमवार को बरेली से डिडौली कोतवाली पहुंचे इंस्पेक्टर सुभाष त्यागी ने मामले में परिजनों और तीन लोगों मुस्तफा, रउफ और असद के बयान दर्ज किए। परिजनों ने इन्हें हत्याकांड का प्रत्यक्षदर्शी बताया था। बयान दर्ज करने के बाद बरेली पुलिस वापस लौट गई।