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Amroha News: सरकारी धन नहीं लौटाया तो पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे सात प्रशासक
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अमरोहा। ग्राम पंचायतों में शासकीय धनराशि के दुरुपयोग के मामले में सात प्रशासकों पर वसूली की तलवार लटक गई है। इनसे 22.92 लाख रुपये की वसूली की जाएगी। धनराशि जमा न करने पर उनके पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त हुए थे। शासन ने नए कार्य या धनराशि खर्च करने से पहले जिलाधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया था। आरोप है कि जोया विकासखंड की नौ ग्राम पंचायतों में 27 मई के बाद 26.88 लाख रुपये बिना अनुमति निकाले गए। इन पंचायतों में बिजली फिटिंग, फॉगिंग और साफ-सफाई जैसे कार्यों पर खर्च दिखाया गया। ई-स्वराज पोर्टल पर भुगतान की जानकारी से अनियमितता सामने आई। जिलाधिकारी ने नौ प्रशासकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। दो प्रशासकों ने जवाब दिया, पर सात निर्धारित समय में पक्ष नहीं रख सके।
जवाब न मिलने पर जिलाधिकारी ने रजबपुर, शकरपुर-समसपुर, शाहबाजपुर कला, गफ्फारपुर, अटेरना, सूदनपुर और मंगूपुरा के प्रशासकों को पद से हटा दिया। अब इन ग्राम पंचायतों का संचालन एडीओ पंचायत करेंगे। शकरपुर-समसपुर की प्रशासक हुस्नबानो सपा विधायक महबूब अली के भाई की पत्नी हैं। कुल वसूली योग्य 22.92 लाख रुपये में 50 फीसदी प्रशासकों और 50 फीसदी ग्राम पंचायत सचिव मोनू कुमार से वसूल होंगे। मोनू कुमार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और उनके खिलाफ जांच जारी है।
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जून व जुलाई माह में इन पंचायतों में बगैर अनुमति खर्च हुई धनराशि
रजबपुर पंचायत में 7,52,673 रुपये, शकरपुर-समसपुर में 4,06,207 रुपये, सूदनपुर में 2,77,960 रुपये, मंगूपुरा में 2,58,945 रुपये, गफ्फारपुर में 2,30,541 रुपये, अटेरना में 1,91,310 रुपये, शाहबाजपुर कला में 1,73,092 रुपये निकाले गए।
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इनसे होगी वसूली
-रजबपुर सुम्बुल जहां, शकरपुर-समसपुर हुस्न बानो, शाहबाजपुर कला नवनीत कुमार, गफ्फारपुर आशा, अटेरना शीला देवी, सूदनपुर लाल सिंह, मंगूपुरा सर्वेश।
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यह है नियम
यदि निर्धारित 30 दिनों के भीतर प्रधान राशि जमा नहीं करता है, तो पंचायती राज अधिनियम की सुसंगत धाराओं ( उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 27) के तहत इस धनराशि की वसूली भू-राजस्व के बकाए की भांति की जाती है। इसके अंतर्गत दोषी की चल-अचल संपत्ति की कुर्की तक की जा सकती है। ग्राम प्रशासक पर यदि कोई सरकारी बकाया या रिकवरी है, तो उसे प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस की तय अवधि सामान्यतः 30 से दिन के भीतर जमा करनी होती है। नहीं तो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
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प्रशासक को तय समय तीस दिन के भीतर सरकारी धनराशि को जमा करना जरूरी है। नहीं तो आरसी जारी की जाएगी और ग्राम पंचायत के खाते में पैसा जमा न करने पर पंचायत चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। नितिन कुमार, डीपीआरओ
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ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होने के बाद प्रशासक नियुक्त हुए थे। शासन ने नए कार्य या धनराशि खर्च करने से पहले जिलाधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया था। आरोप है कि जोया विकासखंड की नौ ग्राम पंचायतों में 27 मई के बाद 26.88 लाख रुपये बिना अनुमति निकाले गए। इन पंचायतों में बिजली फिटिंग, फॉगिंग और साफ-सफाई जैसे कार्यों पर खर्च दिखाया गया। ई-स्वराज पोर्टल पर भुगतान की जानकारी से अनियमितता सामने आई। जिलाधिकारी ने नौ प्रशासकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। दो प्रशासकों ने जवाब दिया, पर सात निर्धारित समय में पक्ष नहीं रख सके।
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जवाब न मिलने पर जिलाधिकारी ने रजबपुर, शकरपुर-समसपुर, शाहबाजपुर कला, गफ्फारपुर, अटेरना, सूदनपुर और मंगूपुरा के प्रशासकों को पद से हटा दिया। अब इन ग्राम पंचायतों का संचालन एडीओ पंचायत करेंगे। शकरपुर-समसपुर की प्रशासक हुस्नबानो सपा विधायक महबूब अली के भाई की पत्नी हैं। कुल वसूली योग्य 22.92 लाख रुपये में 50 फीसदी प्रशासकों और 50 फीसदी ग्राम पंचायत सचिव मोनू कुमार से वसूल होंगे। मोनू कुमार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और उनके खिलाफ जांच जारी है।
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जून व जुलाई माह में इन पंचायतों में बगैर अनुमति खर्च हुई धनराशि
रजबपुर पंचायत में 7,52,673 रुपये, शकरपुर-समसपुर में 4,06,207 रुपये, सूदनपुर में 2,77,960 रुपये, मंगूपुरा में 2,58,945 रुपये, गफ्फारपुर में 2,30,541 रुपये, अटेरना में 1,91,310 रुपये, शाहबाजपुर कला में 1,73,092 रुपये निकाले गए।
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इनसे होगी वसूली
-रजबपुर सुम्बुल जहां, शकरपुर-समसपुर हुस्न बानो, शाहबाजपुर कला नवनीत कुमार, गफ्फारपुर आशा, अटेरना शीला देवी, सूदनपुर लाल सिंह, मंगूपुरा सर्वेश।
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यह है नियम
यदि निर्धारित 30 दिनों के भीतर प्रधान राशि जमा नहीं करता है, तो पंचायती राज अधिनियम की सुसंगत धाराओं ( उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 27) के तहत इस धनराशि की वसूली भू-राजस्व के बकाए की भांति की जाती है। इसके अंतर्गत दोषी की चल-अचल संपत्ति की कुर्की तक की जा सकती है। ग्राम प्रशासक पर यदि कोई सरकारी बकाया या रिकवरी है, तो उसे प्रशासन द्वारा दिए गए नोटिस की तय अवधि सामान्यतः 30 से दिन के भीतर जमा करनी होती है। नहीं तो चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
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प्रशासक को तय समय तीस दिन के भीतर सरकारी धनराशि को जमा करना जरूरी है। नहीं तो आरसी जारी की जाएगी और ग्राम पंचायत के खाते में पैसा जमा न करने पर पंचायत चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। नितिन कुमार, डीपीआरओ